20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जान जोखिम में डालकर गहरे गड्ढों में नहा रहे बच्चे

गुलगांव रोड पर गहरे गड्ढों में छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर नहाने के दौरान अठखेलियां करते हुए नजर आ रहे हैं

2 min read
Google source verification
गुलगांव रोड पर गहरे गड्ढों में छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर नहाने के दौरान अठखेलियां करते हुए नजर आ रहे हैं

जान जोखिम में डालकर गहरे गड्ढों में नहा रहे बच्चे

सलामतपुर. पिछले वर्षोंं में बारिश के दौरान क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक जलाशयों में पानी में डूबने से कई लोगों मौत हो चुकी है। इसके बाद भी लापरवाही नहीं रुक रही। गुलगांव रोड पर बरसात के पानी से भरे गहरे गड्ढों में छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर नहाने के दौरान अठखेलियां करते हुए नजर आ रहे हैं। जागरूक ग्रामीणों ने बताया कि घर से जब बच्चे नहाने के लिए इन तालाब, गहरे गड्ढे या नदी के लिए निकलते हैं, तो खतरा बना रहता है। ऐसे में परिवार के सदस्य बच्चों को ऐसे जानलेवा जल स्रोतों में नहाने के लिए ना भेजें। क्योंकि पुरानी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा आवश्यक है। मगर आज भी तालाबों में बच्चे उछल-कूद करने में जुटे हैं। बरसात के मौसम में नदी व जल स्रोतों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। लापरवाही का आलम यह है बच्चों को ऐसा करने से लोग रोकते भी नहीं हैं। शीघ्र ही इस और ध्यान नहीं दिया गया तो बड़ी घटना होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस प्रशासन सहित जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।

रपटे पर पानी, गांवों का संपर्क टूटा
दीवानगंज. ग्राम सरार से लेकर सेमरी तक ठेकेदार ने रोड बनाया है इसी के बीच में एक नाला पड़ता है जिस पर ठेकेदार ने पुलिया ना बनाकर रपटा बना दिया। जब बारिश ज्यादा हो जाती है तो रपटा के ऊपर से पानी बहने लगता है। जिससे चार गांव का संपर्क भोपाल-विदिशा हाईवे से टूट जाता है। ऐसे में गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं। पिछले दिनों हुई बारिश के दौरान भी यहां पर इसी तरह के हालात बने। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार से रोड पर पुलिया बनाने को कहा गया था। मगर ठेकेदार ने एक भी ग्रामीणों की नहीं सुनी, जिससे आज हम लोग परेशान हो रहे हैं। तेज बारिश के दौरान जब रपटे के ऊपर पानी बहता है, तब बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक ले जाना काफी मुश्किल भरा हो जाता। इस दौरान मरीज की जान जोखिम में बनी रहती। मगर जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने इस स्थिति को समझने और पुलिया बनाने की जरुरत नहीं समझी।