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मन पर गहरा असर छोड़ गया कोरोना

एक माह में पांच से 34 तक पहुंची संख्या

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कुछ बीमारियां ऐसी हैं, जो सीधे तौर पर व्यक्ति के मन पर असर कर रही हैं, जिससे मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

मन पर गहरा असर छोड़ गया कोरोना

रायसेन. कोरोना तो चला गया, लेकिन अपने पीछे कई ऐसी बीमारियां छोड़ गया, जो सालों तक पीछा नहीं छोड़ेंगी। कुछ बीमारियां ऐसी हैं, जो सीधे तौर पर व्यक्ति के मन पर असर कर रही हैं, जिससे मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बीते दो सालों और वर्तमान साल के तीन महीनों में सामने आई मानसिक रोगियों की संख्या यह बता रही है कि कोरोना संक्रमण के दौरान जिस तरह लोगों को तरह-तरह की समस्याओं, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और डर का सामना करना पड़ा है, उसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ा है। आंकडे जिला अस्पताल के मन कक्ष में पहुंचे मरीजों के हैं, लेकिन जिन मरीजों के परिजन मरीज की बीमारी को नहीं समझ पा रहे या सामाजिक कारणों से छुपा रहे हैं, उनकी संख्या सामने आए मरीजों से अधिक हो सकती है।

पत्रिका यह बताकर किसी को डराने का प्रयास नहीं करता, लेकिन मर्ज को पहचानना और समय पर इलाज कराना जरूरी है, इसलिए आगाह कर रहा है। जिला अस्पताल के मन कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में 57 मरीज मानसिक बीमारी से पीडि़त दर्ज किए गए थे। वर्ष 2021 में यह संख्या बढ़कर 372 हो गई थी, जबकि वर्ष 2022 के पहले तीन माह में 106 मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीज जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। ये वो मरीज हैं जो किसी अन्य मर्ज का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन जांच में उनकी बीमारी मानसिक विकृति की पाई गई।

साइकोलॉजिस्ट शैली राय का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार, खान पान परिवर्तित हो रहा है और लगातार दिन प्रतिदिन बढ़ ही रहा है। 15 दिन से अधिक यदि व्यक्ति का व्यवहार ठीक नहीं होता है, या व्यक्ति ठीक नहीं होता है। तो उसे मानसिक बीमारी में परिवर्तित होने में बहुत बड़ी संभावना होती है।

1. व्यक्ति की भूख में कमी आई हो या व्यक्ति को बहुत भूख लगती हो।
2. व्यक्ति अकेलेपन में अंधेरे में रहना पसंद करता हो।
3. लोगों से मिलने में घबराता हो।
4. चिड़चिड़ापन या गुस्सैल हो रहा हो।
5. नींद में कमी आ रही हो या अत्यधिक नींद आ रही हो।
6. व्यक्ति अपने आप में खोया रहना पसंद करता हो।
7. छोटी-छोटी आवाजें भी उसे विचलित करती हो।

जिला अस्पताल के मनकक्ष में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे मरीजों के परिजनों को मरीज की काउंसलिंग कराने की सलाह दी जाती है, उससे भी लाभ नहीं होने पर मनोचिकित्सक से इलाज कराना उचित है।
-डॉ एके शर्मा, सिविल सर्जन
कोरोना के बाद से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। हमारे पास परामर्श के लिए आने वाले हर पांच में तीन लोग मानसिक बीमार होते हैं, यह संख्या ज्यादा है। डब्लूएचओ ने भी कोरोना के बाद मानसिक बीमारों की संख्या बढऩे की आशंका जताई है।
-शैली राय, साइकोलॉजिस्ट एवं काउंसलर