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-पर्यावरण में घुल रहा जहरीला धुआं

विभाग के दस्तावेजों में भरे जा रहे हर महीने फर्जी आंकड़े....
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रायसेन

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Shibu lal yadav

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Updated: 29 Oct 2018, 2:44 PM IST

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Central excise raid, Rs. 50 crores penalty on Jaypee Cement Factory

रायसेन। मप्र पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय हवा में प्रदूषण नापने के नाम पर महज औपचारिता निभा रहा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में लगे ईंटों को पकाने के लिए लगे चिमनी और भोपाल रोड स्थित राजीवनगर सेहतगंज के बीच लगी एक शराब फैक्ट्री की चिमनियां दिन-रात जहरीला धुआं उगल रही हैं।

चिकलोद कलां के समीप लगी एक बीयर फैक्ट्री समेत जिले की औद्योगिक नगरी मंडीदीप,राजीव नगर के छोटे के कारखानों में लगीं कई चिमनियां जहरीला धुआं उगल कर लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं।


हवा में तेजी से घुलता धीमा जहर श्रमिकों की मौत का कारण भी बनता है।इसके अलावा खरबई, मेंडोरी सहित मकोडिय़ा में लगे कई चिमनी ईंटभटों का जहरीला धुआं भी लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं।

अगर हम विशेषज्ञों की मानें तो वाहनों और फै क्ट्रियों से लगातार निकलने वाले धुएं में कैमिकल्स पाए जाते हैं। जो हवा के जरिए लोगों के शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे कई तरह की बीमारियां और एलर्जी होती हैं। धुआं अधिक विषैला होन पर लोगों की जान पर भीबन आती है।

बताया जा रहा है कि जिले की फैक्ट्रियों में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल द्वारा दिए गए यंत्रों की देखरेख सही तरीके से नहीं की जाती है। इतना ही नहीं कारखानों के इंजीनियर अमला फर्जी आंकड़े दस्तावेजों में भरकर जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को भिजवा दी जाती है।


बदले में कारखानों के मालिक व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की सांठगांठ बनीं रहती है। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की अगर जांच पड़ताल की जाए तो असलियत सामने उजागर हो सकती है।मालूम हो कि पिछले एक दशक में वाहनों की संख्या में भी 5 से 7 गुना बढ़ोत्तरी हुई है।


वहीं मंडीदीप औद्योगिक नगरी में भी कारखानों,लघु कारखानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।इस तरह मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है।

सेहतगंज निवासी गोपीलाल बंजारा,मऩु बंजारा,प्रदीप सिंह, खूबचंद बंजारा,नेमी नायक ,शांति बाई बंजारा आदि ने बताया कि गांव के नजदीक लगी एक शराब फैक्ट्री के चिमनी के धुएं का जहर लोगों की सेहत को खराब करने लगा है।

लोगों को हमेशा के लिए सर्दी-जुकाम खांसी बनने लगी है। इस जहरीले धुएं की वजह से पिछले 5 से 10 सालों में कई युवा ग्रामीण,बुजुर्ग मौत की नींद भी सो चुके हैं।इस गंभीर मामले की शिकायत सरपंच सहित पंचों ने आवेदन देकर जिला-प्रशासन को जन समस्या से अवगत भी करवाया था। लेकिन जिला-प्रशासन से लेकर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के अधिकारी इस तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं।

धुएं में होते हैं काफी खतरनाक रसायन....
कैमेस्ट्री के एक्सपर्ट व प्रोफेसर डॉ.संतोष भार्गव ने बताया कि फैक्टरी और वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं में लेड,कार्बन मोनोक्साइड,कार्बन और सल्फर जैसे जहरीले केमिकल्स पाए जाते हैं। सबसे ज्यादा जहरीला लेड नामक केमिकल्स के कण खतरनाक है। जो कि सीधे शरीर में प्रवेश कर मानव शरीर के तंत्र को खराब कर रहे हैं।

इसके अलावा शरीर में कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा अधिक हो जाने पर मनुष्य की दम घुटने लगती है।कार्बन के कण शरीर में प्रवेश कर जाने से व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है।


फैक्टरी और वाहनों से फैल रहा प्रदूषण
हवा के प्राकृतिक संगठन को वाहनों व ईंट भट्टोंं समेत कारखानों की चिमनियों का यह जहरीला धुआं बदल देता है।इस तरह प्रदूषण परोस रहा है तेजी से बीमारियां ।

मेडिकल अधिकारी डॉ.एमएल अहिरवार बताते हैं कि वाहनों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले धुएं विभिन्न तरह की एलर्जी होती है।वहीं सांस फूलने वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।हर दिन 2 से 4 मरीज श्वांस में तकलीफ होने पर इलाज कराने अस्पताल रायसेन आते हैं।

अगर वायु प्रदूषण की गति इसी तरह से बढ़ती रही तो इनेस घातक बीमारियां हो सकती हैं। जैसे फेफड़े खराब होने की शिकायतें आने लगी हैं। इसीलिए लोगों को इन कारखानों, चिमनी ईंट भट्टों समेत प्रदषण फैलाते वाहनों के करीब से मुंह ढंककर निकलना चाहिए।

रोजाना लेते हैं आंकड़े.....
हमने कई कारखानों में वायु प्रदूषण नापने में यंत्र लगवाने के आदेश कारखाना मालिक, चिमनी ईंटभट्टा मालिकों को दिए हैं। इनसे हम आंकड़े प्रतिदिन लेते हैं।
इन यंत्रों से प्राप्त आंकड़े हमारे दैनिक रजिस्टर में दर्ज किए जाते हैं।हर बार जगह बदलकर यंत्र लगाए जाते हैं।

संदीप श्रीवास्तव,अधिकारी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड