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अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठे कर रहे पर्यावरण को दूषित, जानते हुए भी जिम्मेदार बने मूकदर्शक

हां भट्टे हैं वहां आसपास रहने वाले लोग भी धुआं निकलने के कारण काफी परेशान होते हैं

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अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठे कर रहे पर्यावरण को दूषित, जानते हुए भी जिम्मेदार बने मूकदर्शक

अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठे कर रहे पर्यावरण को दूषित, जानते हुए भी जिम्मेदार बने मूकदर्शक

सिलवानी. सिलवानी तहसील के अंतर्गत कई स्थानों पर अवैध रूप से ईंट भट्ठों का व्यवसाय किया जा रहा है। यह भट्ठे न केवल पर्यावरण प्रदूषित कर रहे है, बल्कि इससे मिट्टी का अवैध उत्खनन भी हो रहा है। जहां भट्टे हैं वहां आसपास रहने वाले लोग भी धुआं निकलने के कारण काफी परेशान होते हैं।
इधर जिम्मेदार इस तरफ कोई ध्यान नहीं देते और लगातार इन ईंट भट्ठों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। जानकारी के मुताबिक इन अवैध ईंट भट्ठों का संचालन करने वाले लोगों ने नदी के किनारे मशीनों से इस कदर खुदाई कर दी गई है कि जगह-जगह गहरी खाइयां साफ दिखाई दे रही हैं। नदी किनारे मशीनें लगाकर खुदाई करने से नदी के तटों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। चुन्हैटिया, कछार, पटना, गुप्ती हमीरपुर, चंद्रपुरा में नदी के किनारे बहुत बुरी हालत हैं।

पर्यावरण को नुकसान
अवैध ईंट भट्ठों से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है, बल्कि राजस्व एवं जंगल की लकड़ी, पानी चोरी की मिट्टी का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण नदी का बहाव की दिशा भी बदल गया है। भू-तल भी गिरता जा रहा है। बताना लाजमी होगा कि अगर नदी के किनारे गांवों में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन जोरों पर है जिन पर किसी भी तरह की कोई कार्यवाही नहीं होने से अवैध ईंट संचालकों के हौसले बुलंद है।

अवैध भट्ठों में खपाए जा रहे जंगल के पेड़
आदिवासी अंचल के वनांचल के गांवों में अवैध ईंट भट्ठों की बाढ़ सी आ गई है। जगह-जगह लोग ईंट बनवा रहे हैं और नदी के किनारे का महुआ, जाम, साजा के अनमोल पेड़ों को काटा जा रहा है। इसी तरह सागौन के पेड़ को काटकर ईंट पका रहे हैं। वन विभाग द्वारा कोई गश्त न कार्यवाही की जा रही है। क्षेत्र में राजस्व और खनिज विभाग द्वारा अनदेखी के चलते वनांचल के गांवों में दर्जनों स्थानों पर अवैध ईंट निर्माण धड़ल्ले से जारी है जबकि ईंट बनाने पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है।

वन विभाग भी बना मूक दर्शक
राजस्व और खनिज विभाग, वन विभाग के अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है। वहीं ईंट भट्ठों की संख्या बढ़ती जा रही है। जंगल से पेड़ों को काटकर ईंट भट्ठों में खपाया जा रहा है। वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। वहीं भट्ठे वालों द्वारा रात को भी पेड़ों को काटकर लाया जा रहा है।

कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद
अवैध ईंट भट्ठों के संचालन के खिलाफ कार्रवाई के अभाव में इनकी संख्या बढ़ती जा रही है ईंट भट्ठे संचालकों द्वारा नियमों का खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। ईंट भट्ठे संचालित होने से पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही राजस्व विभाग को बहुत हानि हो रही है, लेकिन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हे। ये लोग बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। जंगल से मुफ्त की लकड़ी से ईंट भट्ठा पकाया जाता है। एक हजार पांच सौ ईंट लगभग 9000 रुपए में बेचकर मलामाल हो रहे हैं। बावजूद राजस्व विभाग, वन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

आपके द्वारा मामला संज्ञान में लगाया गया है, यदि अवैध रूप से ईंट भट्ठे चल रहे हैं, तो मैं इसको दिखवाता हूं।
-सुनील शर्मा, तहसीलदार सिलवानी
- ईंट भट्ठों में जंगल से काटकर लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है। इसकी जानकारी मिलने पर मैंने रेंजर को जांच के लिए लिखा है। जांच उपरांत कार्रवाई की जाएगी।
- पीके रजक, एसडीओ वन विभाग सिलवानी