
निजी स्कूल बसों की ऐसी हरकतों पर अभिभावकों में पनप रहा भारी आक्रोश
रायसेन@शिवलाल यादव की रिपोर्ट...
निजी स्कूल बसों और मारूति वैन आटो के अनाप-शनाप किराया से अभिभावकों को राहत दिलाने में जिला व पुलिस प्रशासन सहित जिला परिवहन विभाग के अधिकारी बिल्कुल गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। हालात यह हैं कि प्रदेश शासन के परिवहन विभाग द्वारा दिशा निर्देश जारी किए हुए पूरे एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। लेकिन स्कूल बसों, मारूति वैन सहित सवारी आटो का किराया तय करने के लिए अभी अधिकारियों और अभिभावकों की कमेटियां नहीं बन सकी हैं। इसीलिए निजी स्कूल बसों सहित प्रायवेट वाहनों के मालिकों द्वारा पालकों से मनमाना किराया वसूल कर जमकर कमाई कर रहे हैं। ट्रेफिक पुलिस और जिला परिवहन विभाग की कार्रवाई भी महज दिशा निर्देशों तक सीमित है।
इस मनमाने पूर्ण किराया वृद्धि को लेकर अभिभावकों में भी भारी आक्रोश पनप रहा है।लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस सारे मामले में फिलहाल खामोश बने हुए हैं।मालूम हो कि जून महीने 2018 में हुई अभिभावकों, आरटीओ सहित बस ऑपरेटरों, मारूति वैन संचालकों और यातायात पुलिस अधिकारियों की बैठक में ओवरलोडिंग रोकने की शर्त पर ही आरटीओ रीतेश कुमार तिवारी ने यह छूट दे दी थी। साथ ही किराए में बढ़ोत्तरी करने की भी छूट दी थी। एक साल पूर्व भी तमाम नाटक-नौटंकी के बाद स्कूल आने जाने के किराए में बढ़ोत्तरी हुई थी। इसके बाद भी इन प्रायवेट स्कूलों की बसों सहित आटो और मारूति वैनों में ओवरलोडिंग तो बिल्कुल रूकी नहीं। बल्कि बस और वैन संचालकों ने मनमाना किराया और भी बढ़ा दिया है। स्कूल बसों का किराया बढ़ाए जाने को लेकर अभिभावकों में इस मनमानी को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
दूरी के हिसाब से वसूला जा रहा मनमाना किराया शुल्क
शहर के प्रायवेट स्कूलों में संचालित हो रहे वाहन मालिक, चालक दूरी के मान से किराया तय कर लेते हैं। डीजल पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी की दुहाई देकर अभिभावकों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। मनमाना और मोटा किराया राशि वसूलकर वाहन मालिक मालामाल हो गए हैं। लेकिन अभिभावकों की जेबों पर इस महंगाई डायन की मारपड़ रही है। मजबूरी में अभिभावक किराया फीस देकर बच्चों को महंगे और अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इस मनमाने किराया वृद्धि पर सख्ती से शिकंजा कसने के लिए जिम्मेदार अधिकारी ही बेपरवाह बने हुए हैं तो वह मनमाना किराया तो सख्ती से वसूल कर कमाई तो निरंतर कर ही रहे हैं।
यह बस ऑपरेटर दो से तीन किलोमीटर का किराया 380 रूपए और 4 से 5 किमी की दूरी का किराया 400 से 500 रूपए तक प्रति छात्र वसूलने लगे हैं। जबकि फिर एक दो साल पूर्व ही किराया 200 से 250 रूपए से ज्यादा नहीं था .लेकिन दो से तीन सालों में यह किराया दो से ढ़ाई गुना बढ़ चुका है। बस किराया बढ़ाया जाने के लिए पहलू की देखभाल स्कूल प्रबंधन राय लेना तक मुनासिब नहीं समझते हैं। बस किराया बढ़ोत्तरी के मामले में शहर के एक ईसाई राजनीति स्कूल सहित अन्य प्रायोजित स्कूलों के साथ हाल ही में हैं। कमोवेस्ट ही हालात मारुति वैन, आटो ऑपरल के बनियां हैं।
अब तक नहीं बनी समिति
प्रदेश के परिवहन आयुक्त के निर्देश पर मप्र के हरेक जिलों में अभिभावक अधिकारी किराया तय करने के लिए समिति गठित की जानी थीं। लेकिन रायसेन जिले में इस समिति का अभी तक गठन नहीं हो सका है। जबकि जिला परिवहन महक मे के अधिकारी भी दबी जुबान से कहते हैं कि समिति गठित की जा चुकी है। अगर समिति का गठन किया जा चुका है तो उसकी सूची व उसकी बैठक की गतिविधियों की सूची जानकारी मीडिया कर्मियों को उपलब्ध आखिर क्यों नहीं कराई जाती। परिवहन विभाग के आदेश के मुताबिक जिला स्तरीय कमेटी का गठन कर नियमित कमेटी की बैठक की जाना थी।लेकिन जिला मुख्यालय पर इस कमेटी व उसके पदाधिकारियों का कहीं अता-पता तक नहीं है।
सिर्फ निर्देशों तक सिमटी कार्रवाई.....
ओवर लोडिंग कम करने के लिए आरटीओ एवं यातायात विभाग पुलिस के अभी तक प्रयास महज दिशा निर्देशों तक ही सीमित हैं।पिछले महीने आरटीओ कार्यालय में ंबैठक लेने के बाद भी आरटीओ और यातायात पुलिस अमले ने एक बार भी इन निजी स्कूलों की बसों और मैजिक आटो समेत मारूति वैन संचालकों की वाहनों की जांच पड़ताल करने एक बार भी जहमत नहीं उठाई है।वहीं इस सारे मामले में स्कूल प्रबंधन भी अपनी मनमानी से बच रहे हैं।
यह बोले अभिभावक .....
जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी किराया निर्धारण कराने के लिए जिम्मेदार अफसरों ने कमेटी का गठन कराना तक मुनासिब नहीं समझा है।साल दर साल इस शुल्क में इजाफा हो रहा है।वाहन चालकों को कम से कम किराया बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि अभिभावकों की जेबें खाली होने से बच सके।
समरथ सिंह विश्वकर्मा अधिवक्ता
पिछले साल ४०० रूपए बस किराया वसूला जा रहा था। लेकिन इस साल नए शिक्षा सत्र से यह किराया ४८० रूपए वसूला जाने लगा है। ईसाई मिशनरी के स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों के सुझाव भी नहीं मांगे जाते। ओवरलोडिंग की जाती है सो अलग बात है। बस सड़क तक ही बच्चों को छोड़कर आगे चली जाती है।
ज्योति सोनी गृहणि
बस किराए में मनमानी पर सख्ती से रोक लगाना चाहिए। कमेटी का गठन कर उसकी गतिविधियां नियमित की जाना जरूरी है। तभी बस संचालकों पर अंकुश लगेगा। अन्यथा वह वह अपनी मनमानी से बाज नहीं आएंगे।
लोकभूषण दुबे, अभिभावक
हर साल एक सौे रूपए से डेेढ़ सौ रूपया किराया मनमाने तरीके से यह वाहन चालक बढ़ाते हैं। जिम्मेदार अधिकारी भी इनकी मनमानी पर सख्ती से प्रतिबंधन हीं लगाते। जिस कारण इनके हौंसले इस कदर बुलंद हैं कि पालकों की मनमर्जी के खिलाफ वाहन किराए में इजाफा कर लेते हैं।
लक्ष्मी नारायण यादव, पालक
निजी स्कूल बसोंं सहित अन्य चलने वाले प्रायवेट वाहनों में भी ओवरलोडिंग कम करने की शर्त पर ही हमने रियायत दी थी। लेकिन स्कूल बसों, आटो, वैन संचालकों के किराए में कुछ बढ़ोत्तरी करने की छूट दी है। फिलहाल वाहनों के फीस निर्धारण के लिए जिला स्तरीय कमेटी गठन की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही स्कूल वाहन किराया निर्धारण करने के लिए कमेटी गठित कर ओवरलोडिंग किराया बढ़ोत्तरी पर सख्ती से कार्रवाई कर उस पर शिकंजा कसा जाएगा।
रीतेश कुमार तिवारी,आरटीओ रायसेन।
Published on:
22 Jul 2018 11:48 am
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