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संदूक की नदी पर सालों से नहीं बना पुल, ग्रामीण इस तरह करते हैं आवागमन

संदूक की नदी पर सालों से नहीं बना पुल, ग्रामीण इस तरह करते हैं आवागमन

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संदूक की नदी पर सालों से नहीं बना पुल, ग्रामीण इस तरह करते हैं आवागमन

रायसेन@शिवलाल यादव की रिपोर्ट...
जहां एक ओर केंद्र की मोदी सरकार, मप्र की सरकारें व उनके मंत्री, भाजपा नेता सड़कों के जाल बिछाने व पुलों का निर्माण तेज गति से करवाकर विकास की बड़ी बड़ी बातें जन सभाओं में करते नजर आ रहे हैं। लेकिन सांची विधानसभा क्षेत्र के तहसील गैरतगंज के देवनगर के नजदीक संदूक गांव की नदी और दीवानगंज केे नजदीक पुलों का निर्माण नहीं हो सका है। सरकार के विकास संबंधी दावों और मंत्रियों के वायदों की पोल खोलती इस रिपोर्ट ने वास्तव में भाजपा के मंत्रियों व नेताओं के सामने जमीनी हकीकत की पोल खोल कर रख दी है। इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व विदिशा सांसद एवं केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री सांसद सुषमा स्वराज और जिले के तीनों मंत्रियों, जिला पंचायत के अध्यक्ष, प्रभारी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा के होने के बावजूद सात दशक गुजर जाने के बाद भी इन ग्रामीण अंचलों में पुलों का निर्माण नहीं हो सका है। ये बड़े शर्म की बात है।

संदूक गांव की नदी पर जहां ग्रामीणों व स्कूली छात्रों को आने जाने के लिए एक बांस बल्लियों व रस्सी के सहारे आने जाने के लिए एक अस्थायी पुल का निर्माण कर लिया है। वहीं अंबाड़ी दीवानगंज और शाहपुर में घोड़ापछाड़ नदी पर ग्रामीणों ने बारिश में इस लबालब पानी से नयिों के ऊपर बिजली के दो सीमेंट पोल रख दिए हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों और स्कूल के छात्र-छात्राओं को इन बिजली खंभों के ऊपर से चढ़कर पानी के बीच जान जोखिम में डालकर आवागमन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

तहसील गैरतगंज के संदूक गांव में सालों बीत जाने के बाद भी नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका है। जबकि ग्रामीणजनों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर मंत्रियों और जनसुनवाई कार्यक्रम रायसेन पहुंचकर कलेक्टरों को कई आवेदन दिए जा चुके हैं। लेकिन बावजूद इसके इन जटिल समस्या का समाधान नहीं हो सका है। कमोवेश यही हालात दीवानगंज के बने हुए हैं। वर्षों से इन दोनों जगह की नदियों पर पुलों का अभाव आवागमन बाधा बना हुआ है। फिलहाल विकल्प के तौर पर संदूक गांव के ग्रामीणों ने मिल जुलकर श्रमदान कर बांस की पिंचियों व बल्लियों का श्रमदान के जरिए अस्थयी पुल का निर्माण कर लिया है। जब झुंड के रूप में ग्रामीण और स्कूली छात्र-छात्राएं जब इस पुल से गुजरते हैं तो दोनों सिरों पर रस्सी पेड़ों की डालियों से बांध दी जाती है।

बच्चे, युवा व बुजुर्ग इस रस्सी के सहारे नदी के इस पार से उस पार एक बाद एक गुजरते हैं। तब कहीं जाकर वह जरूरी कामकाज निपटा पाते हैं। कुल मिलाकर चौमासा ग्रामीणों के लिए एक आफत लेकर आता है। ऐसी स्थिति में जब कोई बीमार हो जाए तो उसकी तो मानो जान पर बन आती है। कई ग्रामीण चार महीनों तक घरों व गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं। बच्चे प्रतिदिन संदूक गांव की नदी के उस पार सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूल पढऩे जाते हैं।

संदूक गांव के बीचोंबीच रास्ते से निकली यह नदी वास्तव में सालों से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। संदूक गांव के निवासी कांग्रेस के युवा नेता सोनू मीणा, प्रेम सिंह, रामदयाल धाकड़, मूरत सिंह आदि ने बताया कि हमने इस नदी पर पुल निर्माण की आस में मंत्रियों से लेकर नेताओं को अर्जियां देकर गुहार लगा चुके हैं। लेकिन इनकी अनदेखी के चलते पुल का निर्माण नहीं हो सका है।

जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अफसरों, जिला पंचायत के अफसरों ने भी पुलों के निर्माण में रूचि नहीं ली है। इनका खामियाजा ग्रामीणजनों को बारिश के दौरान आवागमन में परेशानी के रूप में उठाना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला पंचायत की अध्यक्ष अनीता जय प्राकश किरार का कहना है कि संदूक गांव की नदी पर पुल निर्माण और पीएम सड़क योजना के तहत पक्की सड़क बनाए जाने मंजूरी हो चुकी है। जल्द ही यहां की नदी पर पुल का और सड़क निर्माण कर ग्रामीणों का आवागमन सुचारू किया जाएगा।

चुनाव का ग्रामीण कर चुके हैं बहिष्कार
सोनू मीणा सहित ग्रामीणों का कहना है कि संदूक गांव, दीवानगंज के ग्रामीण पुलों के अभाव का सालों से दंश झेल रहे ग्रामीणजनों ने पिछले लोकसभा, विधानसभा चुनावों का सामूहिक बहिष्कार कर प्रत्याशियों को वोट डालने तक नहीं गए थे। मंत्रियों से लेकर उनके नेता संदूक गांव वोट मांगने के लिए हर चुनाव में जाते हैं। पुलों का निर्माण कराने का भी आश्वासन भी देते हैं। लेकिन चुनाव के उम्मीदवारों द्वारा चुनाव जीतने के बाद उनके वादे हवा हो जाते हैं। दीवानगंज के ग्रामीणजन भी ऐसे कदम उठा चुके हैं। लेकिन फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मंत्री, नेता इस जटिल समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं देते।

अंबाड़ी की टूटी पुलिया पर पोल रखकर गुजर रही जिंदगी
सांची ब्लॉक के दीवानगंज के समीप अंबाड़ी में वर्ष 2006 में नदी की पुलिया टूट गई थी। डेढ़ दशक गुजर जाने के बाद भी इस नदी पर पुलिया का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों ने इस टूटी पुलिया के ऊपर सीमेंट पोल रख दिया है। इस पोल के सहारे पानी से लबालब भरी इस पुलिया के ऊपर से स्कूली छात्रों से लेकर ग्रामीणजन बमुश्किल आनाजाना कर रहे हैं। पहले इस पुलिया में स्कूली बच्चे, बुजुर्ग गिरकर चोटग्रस्त हो चुके हैं। इस अस्थायी पुल से रोजाना करबीन 20 गांवों के ग्रामीण यहां से आवागमन करते हैं। इसी तरह चार दशक से स्टॉपडैम की दीवार पर बिजली पोल के सहारे शाहपुर की घोड़ापछाड़ नदी पर रखे सीमेंट पोल के सहारे ग्रामीण प्रतिदिन आना जाना करते हैं। यह गांव भी विकासखंड सांची में आता है।

इस अस्थायी पुल से तीन गांवों के ग्रामीण आवागमन करने के लिए मजबूर हैं। चुनाव आते ही दोनों प्रमुख राजनीति दलों के नेता मंत्रियों द्वारा एक दूसरे के कार्यकाल में विकास उपलब्धियों को गिनाने से नहीं थकते। इन नदियों पर ग्रामीण पुलिया, पुलों का निर्माण की उम्मीद में थक हार चुके हैं। ग्रामीण सैकड़ो बार जिम्मेदार अधिकारियों को आवेदन देकर जटिल समस्या से अवगत करवा चुके हैं। इस अस्थायी पुल के सहारे बरसात के इस मौसम में बीमारों, छात्रों, बुजुर्गों को सर्वाधिक परेशानी झेलना पड़ती है।

जल्द बनाए जाएंगे पुल व सड़कें
गैरतगंज तहसील के संदूक गांव में नदी पर पुलिया,पुल और तहसील रायसेन के शाहपुर, अंबाड़ी की टूटी पुलियाओं पर भी पुलों कानिर्माण कराया जाएगा। इनका इस्टीमेट बनवाकर जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों से यह काम करवा दिया जाएगा। ताकि ग्रामीणों की इन जटिल समस्याओं का जल्द समाधान कराया जा सके ।
प्रिया मिश्रा कलेक्टर रायसेन

मैंने घोड़ापछाड़ नदी पर पुल निर्माण, सड़क निर्माण कराने प्रस्ताव मुख्यमंत्री सड़क परियोजना कार्यालय रायसेन में जमा करवा दिया है। जल्द ही सड़क पुल का निर्माण कराने के बाद ग्रामीणों, स्कूली छात्रों की समस्या हल हो जाएगी।
रेखा टीकाराम पाल सरंपच शाहपुर