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गोवर्धन पर्वत उठाकर भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार किया दूर: पं. तिवारी

पं. तिवारी ने बताया कि एक समय की बात है श्रीकृष्ण अपने मित्र ग्वालों के साथ पशु चराते हुए गोवर्धन पर्वत जा पहुंचे

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गोवर्धन पर्वत उठाकर भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार किया दूर: पं. तिवारी

गोवर्धन पर्वत उठाकर भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अहंकार किया दूर: पं. तिवारी

बरेली. नगर के डीएलस परिसर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन श्री अन्नकूट महोत्सव कथा पर श्रद्धालु जमकर थिरके। कथा व्यास पंडित राकेश तिवारी शास्त्री महाराज द्वारा भक्ति भजनों के साथ अन्नकूट महोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का प्रभावी वर्णन किया। पं. तिवारी महाराज ने बताया कि एक समय की बात है श्रीकृष्ण अपने मित्र ग्वालों के साथ पशु चराते हुए गोवर्धन पर्वत जा पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि बहुत से व्यक्ति एक उत्सव मना रहे थे। श्रीकृष्ण ने इसका कारण जानना चाहा तो वहां उपस्थित गोपियों ने उन्हें कहा कि आज यहां मेघ व देवों के स्वामी इंद्रदेव की पूजा होगी।

फिर इंद्रदेव प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे, फलस्वरूप खेतों में अन्न उत्पन्न होगा और ब्रजवासियों का भरण-पोषण होगा। यह सुन श्रीकृष्ण सबसे बोले कि इंद्र से अधिक शक्तिशाली तो गोवर्धन पर्वत है, जिनके कारण यहां वर्षा होती है। गोवर्धन पर्वत पर हमारी गायें चरती हंै। गायों से दूध, घी, माखन बनता है। सबको इंद्र से भी बलशाली गोवर्धन की पूजा करना चाहिए।

श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत : भगवान श्रीकृष्ण की बात मान कर सभी ब्रजवासी इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और प्रलय के समान मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा कर ब्रजवासियों की भारी बारिश से रक्षा की थी।
इंद्र देव पहुंचे भगवान की शरण में : इसके बाद इंद्र को पता लगा कि श्रीकृष्ण वास्तव में विष्णु के अवतार हैं और अपनी भूल का आभास हुआ। तब इंद्र देवता को भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना करनी पड़ी। इन्द्रदेव की याचना पर भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और सभी ब्रजवासियों से कहा कि अब वे हर साल गोवर्धन की पूजा कर अन्नकूट पर्व मनाएं। तब से ही यह पर्व गोवर्धन के रूप में मनाया जाता है।