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इतना गिरा पारा कि पत्तियों पर जम गई बर्फ, जिले में बढ़ी ठंड

- गिरते तापमान से बढ़ा पाला का खतरा, शीतलहर में कांपते हुई शनिवार की सुबह।- दोपहर में निकली धूप से मिली राहत, शाम को फिर चला ठंड का लहरा।

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इतना गिरा पारा कि पत्तियों पर जम गई बर्फ

इतना गिरा पारा कि पत्तियों पर जम गई बर्फ

रायसेन। शनिवार की सुबह मौसम की सबसे ठंडी सुबह रही। जब तापमान गिरकर 3.2 डिग्री पर जा पहुंचा। ठंड का आलम यह था कि पेड़, पौधों की पत्तियों पर बर्फ की पतली पतर जम गई। मैदान में घांस-फूंस पर बर्फ की सफेद चादर बिछी दिखाई दी। तापमान की गिरावट का सबसे अधिक असर गैरतगंज तहसील क्षेत्र में दिखाई दिया।


रायसेन क्षेत्र में भी ओस की बूंदें पत्तों पर जमी दिखाई दीं। तापमान की यह गिरावट अब फसलों के लिए खतरा बनती जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार यदि पारा तीन डिग्री पर या इससे नीचे गया तो फसलों पर पाला पड़ जाएगा। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में तापमान बढऩे और बादल छाने के साथ हल्की बारिश की संभावना व्यक्त की है।


इससे पहले तापमान में इतनी गिरावट वर्ष 2011-12 में हुई थी, जब तापमान दो डिग्री तक पहुंचा था और जिलेभर में रबी की फसलें काली पड़कर बर्बाद हो गई थीं। किसानो को ऐसे ही पाला का डर सता रहा है।


बीते सात दिन में इस तरह गिरा तापमान
दिनांक अधिकतम न्यूनतम
23 दिसंबर 25 14
24 दिसंबर 24 12
25 दिसंबर 22 12
26 दिसंबर 20 08
27 दिसंबर 21.7 07
28 दिसंबर 20 6.5
29 दिसंबर 20 3.2

ये पड़ेगा तापमान में गिरावट का असर
तापमान में बर्फ जमने के स्तर तक की गिरावट फसलों के साथ व्यक्ति की सेहत पर भी गहरा असर डालेगी। फसलों पर पाला पडऩे का खतरा अधिक बढ़ गया है। विशेषकर गेहूं और चना की फसल को खतरा है।

इस स्थिति में बर्फ बनता है पानी
मौसम विशेषज्ञ एसएस तोमर के अनुसार तापमान के 3.5 डिग्री से नीचे आने पर ओस जमने की स्थिति बनती है। शनिवार को तापमान 3.2 डिग्री पर था। जिसका असर पत्तियों पर बर्फ जमने के रूप में सामने आया। इससे नीचे तापमान जाने पर खुले में रखे पानी पर बर्फ कर परत जम जाती है।

हाइपोथर्मिया का खतरार रखें सावधानी
जिला अस्पताल में पदस्थ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एमएल अहिरवार के मुताबिक ऐसी ठंड में बच्चों और बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। इसमें पीडि़त की मृत्यु तक हो सकती है।

40 से अधिक आयु के व्यक्ति को लकवा, हृदयघात, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। चार डिग्री से कम तापमान होने पर खून की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्रेन और हृदय तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता है। जो लकवा, हृदयघात का कारण बनता है। डा. अहिरवार के मुताबिक ऐसे मौसम में हार्टअटेक से मौत के मामले बढ़ जाते हैं।

ये रखें सावधानियां
- बच्चे और बुजुर्गों को बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। यदि बाहर जा रहे हैं तो ठंडी हवा से बचने सिर, कान, नाक, मुंह पर कपड़ा बांधें, गर्म कपड़े पहने।
- घर के दरवाजे अधिकतर समय बंद रखें।
- सुबह उठकर तुरंत घर से बाहर नहीं निकलें।
- बच्चे और बुजुर्ग धूप गर्म होने के बाद ही घर से बाहर निकलें।
- गुनगुना पानी पीयें।

ऐसे पड़ता है पाला
कृषि वैज्ञानिक स्वप्रिल दुबे के मुताबिक जब तापमान 04 डिग्री से कम होता है तब फसलों पर पाला पडऩे की संभावना बढ़ जाती है। पाले से प्रभावित फसलों की पत्तियों पर पानी की बूंद जमा हो जाती है। जिससे पत्तियों की कोषिका भित्ती फट जाती है, जिससे पत्तियां सूख कर झडऩे लगती हैं।

दुबे ने बताया कि तापमान गिरने से गेहूं की फसल में दीमक व जड़ माहू, चने में इल्ली, मसूर व तिवड़ा में माहू का प्रकोप दिखाई दे रहा है।

पाले से बचाव के लिए करें ये उपाय
- शाम के समय खेतों के चारों ओर कूड़ा-करकट जलाकर धूआं करें।
- जहां पर पानी की उपलब्धता हो व फसल में सिंचाई का उचित समय भी हो वहां खेतों में सिंचाई करें।
- उद्यानों व साग, सब्जी फसलों में शीत लहर से बचाव के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में वायूरोधी टटियां लगाएं।
- एक पीपीएम या 0.1 प्रतिशत गन्धक अम्ल का छिड़काव करें।
- साइकोसिल दवा 400 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करें।
- गेहूं में दीमक व जड़ माहू पर नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी 2 लीटर/हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
- चने की फसल में इल्ली पर नियंत्रण के लिए खेत में 'टी' आकार की खूंटी 20-25 प्रति हेक्टेयर व नीम ऑयल 5 मिली/लीटर पानी में या एनपीव्ही वायरस 250 एलई प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।
- मसूर व तिवड़ा में माहू नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या एसीटामिप्रिड 125 ग्राम/हेक्टेयर दवा का उपयोग करें।

दो दिन में मिलेगी राहत
मौसम विशेषज्ञ एसएस तोमर के अनुसार अगले दो दिन में कड़ाके की ठंड से राहत मिलेगी। अगले दो दिन में मौसम में हल्के घने से मध्यम घने बादल छाये रहने की संभावना है। कहीं-कहीं बूंदा-बांदी के आसार हैं। आसमान साफ रहने, हवाओं की गति अधिक होने तथा दिशा उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम रहने के कारण शीत लहर जारी रहेगी।