रायसेन। श्री तुलसी मानस समिति
द्वारा नगर के पाटनदेव स्थित लोहापीटा-अगरिया समाज के हनुमान मंदिर पर पांच दिवसीय
मानस सत्संग का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अयोध्या से आए मानस प्रवक्ता पं.
नरेन्द्र शुक्ला ने माता सीता की खोज का वृतांत सुनाया।
उन्होंने कहा कि
सीताजी की खोज में अनेक वानर सुग्रीव के द्वारा भेजे जाते हैं। सुग्रीव ने बानर
सेना से वीर योद्धाओं का चयन माता सीता की खोज के लिए किया। जब दक्षिण दिशा में
सीताजी को खोजने का विषय आया तो सुग्रीव ने प्रमुख योद्धाओं जामवंत, हनुमान, अंगद,
द्विविद, मयंद एवं नल-नील आदि को भगवान श्रीराम के पास भेजा। सभी योद्धा भगवान
श्रीराम को प्रणाम कर चल देते हैं। तब हनुमानजी महाराज सबसे पीछे प्रभु के चरणों
में प्रणाम करते हैं। भगवान हनुमानजी महाराज के सिर पर अपने हाथ रखकर मुद्रिका देते
हैं। मार्ग में सभी बंदर सीताजी की खोज ऎसे कर रहे हैं कि उनको अपने शरीर की सुधबुध
नहीं रह गई। पहले तो यात्रा में अंगदजी नेतृप्त करते हैं पर जब इतना प्रयत्न करने
के बाद भी सीताजी का पता नहीं लगा तो सभी बंदर भूख और प्यास से व्याकुल हो गए। ऎसा
क्षण उपस्थित हो गया कि जल के बिना सबके प्राण जाने वाले थे।
तब श्रीहनुमानजी की
भूमिका सामने आती है। वे एक पर्वत पर चढ़कर चारों दिशाओं में देखते हैं तो सामने एक
गुफा दिखाई देती है। जिसमें जलचर पक्षी आ-जा रहे थे। हनुमानजी उस पर्वत से
उतरकर सभी बंदरों को उस गुफा में ले जाते हैं। वहां मौजूद सरोवर में उन्हे देवी
स्वयंप्रभा मिलती हैं। जहां उन्होंने देवी से प्रार्थना की और समस्त वानरों को
पानी प्राप्त होता है और अपनी प्यास बुझाने में सफल होते है।