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एक ध्वज तले जुटे 50 हजार से अधिक लोग गूंजे भारत माता के जयकारे

सभी समाजों को एकजुट कर हिंदू समाज की कल्पना को साकार करने के लिए आयोजित समरसता कुंभ का बुधवार को नगर के दशहरा मैदान पर भव्य आयोजन किया गया।

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Raisen Samrasata Kumbha, organized to realize the concept of Hindu society by uniting all the societies, was organized on Wednesday on the Dussehra grounds of the city. After about nine months of preparation, about 50 thousand people took part in the event on Wednesday.

रायसेन। सभी समाजों को एकजुट कर हिंदू समाज की कल्पना को साकार करने के लिए आयोजित समरसता कुंभ का बुधवार को नगर के दशहरा मैदान पर भव्य आयोजन किया गया। लगभग नौ माह की तैयारी के बाद बुधवार को इस आयोजन में लगभग 50 हजार लोग जुटे। दोपहर १२ बजे से चार बजे तक शहर भारत माता के जयकारों से गूंजता रहा। नगर के तीनों प्रवेश मार्गों से 12 बजे के बाद कलश यात्राएं और शोभायात्राएं शुरू हुईं, जो ढोल नगाड़ों के साथ जयकारे लगाते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ीं। लगभग एक घंटे की यात्रा के बाद सभी कार्यक्रम स्थल पहुंचे। जहां मुख्य वक्ता सुरेश सोनी का उद्बोधन हुआ।

इससे पहले दुर्गावति छात्रावास एवं सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने लोक संस्कृति पर आधारिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम बाबा वीरेंद्र पूरी ने की। जबकि मुख्य अतिथि और वक्ता सुरेश सोनी सर सह कार्यवाह, आयोजन समिति के अध्यक्ष भागचंद उइके, सचिव नीलम चंद साहू सहित 25 संत मौजूद थे। जब भी हिंदू भाव भूले तब हुआ धोखा सोनी ने कहा कि हम जब-जब हिंदू भाव को भूले हैं तब-तब हमारे साथ धोखा हुआ है, हमें नुकसान उठाना पड़ा है। भारी विपत्ति आई है और कई अपने हमसे बिछुड़ गए हैं।

सोनी ने कहा कि हमे समरसता का भाव लाना होगा, तभी हिंदुस्तान एक बार फिर विश्व गुरू बनेगा। इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देश में रामायण का मंचन होता है। उसमें सभी पात्र मुस्लिम होते हैं। आज हिंदुस्तान में कई ताकतें सक्रिय हैं, जो हिन्दू समाजों को जातियों में बांटने का काम कर रही हैं। सोनी ने कहा कि देश के हर हिस्से में जनजातीय समाज के लोगों ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़कर अपना योगदान दिया। जो कुंभ में होता है वही गांवों में भी हो: सुरेश सोनी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुरेश सोनी ने कहा कि कुंभ का मतलब सभी समाजों और वर्गों का सम्मिलन है।

विभिन्न तीर्थ स्थानों पर हर 12 साल में लगने वाले कुंभ मेला की तरह ही यह समरसता कुंभ है। जिस तरह कुम्भ में जात पात भूलकर एक-दूसरे के साथ रहते हैं, उसी तरह हमें दैनिक जीवन में रहना चाहिए। ताकि समाजों के बीच जाति और वर्ग का भेद खत्म हो और एक हिंदू समाज का निर्माण हो। भारतीय संस्कृति भी यही कहती है। सोनी ने कहा कि भगवान कण-कण में रहते हैं, यह हमारी संस्कृति ने बताया है। जब कण-कण में भगवान हैं तो हम इंसानों में भी भगवान हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, प्रेम करना चाहिए। हमें एक-दूसरे को परिवार का सदस्य मानना चाहिए।

चंदा को मामा और बिल्ली मौसी कहकर संबोधित करने वाली हमारी संस्कृति में आज लोग पड़ोसी को भी नहीं पहचानते। यह स्थिति बदलना होगी।
अब ये करना है जरूरी
- हमें हर जाति और समाज के लोगों से संपर्क रखना होगा।
- हर गांव में मंदिर, जल स्रोत और शमशान एक होना चाहिए।
- संस्कारों को मजबूत करना होगा।
- कुरीतियों से मुक्ति, व्यसन से मुक्ति जरूरी है।


- सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प समाजों के प्रमुख लें।
- पर स्त्री को मां समझो
- पराये धन को मिट्टी समझो
- सभी भसाओं, संस्कृतियों, समाजों को एक मानकर रहें।
- बड़े लोग छोटों का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाएं।