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National Highway news : 1968 में मिली थी इस नेशनल हाईवे को स्वीकृति, आज भी है अधूरा

सत्तर के दशक की स्वीकृति पता नहीं कब होगी पूरी।तीन साल में काम कर चुकी तीन कंपनियां। सिंदूर नदी से बरेली तक की सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान। जगह-जगह सड़क पर बने गड्ढे, धूल के गुबार से वाहन चालक परेशान।

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इंतजार करते हुए बूढ़े गुजर गए और जवान बूढ़े हो गए पर नहीं बन पाया एनएच १२

रायसेन/उदयपुरा. जिले में पश्चिम से पूर्व की ओर जाते हुए बीच से मंडीदीप, गौहरगंज, बाडी, बरेली, उदयपुरा से होकर निकले एनएच 12 जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग National Highway की स्वीकृति 1968 में मिली थी। लगभग पांच दशक का लंबा समय बीतने के बाद भी यह मार्ग नेशनल हाईवे की तरह नहीं बन सका। जबकि देश के अन्य हिस्सों में इससे कम समय में एक्सप्रेस वे expressway बनकर तैयार हो गए। लेकिन एनएच 12 अब तक फोरलेन Four lane नहीं बन सका।

इन पांच दशकों में फोरलेन रोड निर्माण पूरा होने की उम्मीद में क्षेत्र के कई बूढ़े गुजर चुके और नौजवान बूढ़े होते जा रहे। इस बीच राज्य से लेकर केन्द्र तक की कई सरकारें आईं और बदल गईं पर नहीं बदली तो इस रोड की तकदीर। 1967 में बनी सरकार में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ शंकर दयाल शर्मा जो कि उस समय उदयपुरा विधायक भी थे उनके प्रयासों से यह मार्ग एनएच स्वीकृत हुआ था।

वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई
तब से लेकर आज तक इसकी हालत नहीं सुधर सकी। हालांकि वर्तमान में निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन धीमी रफ्तार से निर्माण चलने और घटिया स्तर का कार्य होने से इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। कहीं सड़क बना दी तो कहीं पर मिट्टी डालकर छोड़ दी। ऐसे में बारिश होने पर मिट्टी के कारण वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई।

कई बसें बंद हो गई
दिसंबर 2015 में शासन की तरफ से कहा गया था कि वर्ष 2016 से राष्ट्रीय राजमार्ग 12 फोरलेन रोड का निर्माण शुरू हो जाएगा और भोपाल से जबलपुर तक सफर करने वालों का लंबे समय से फोरलेन सड़क के बनने का इंतजार पूरा होगा। लेकिन अफसोस यह रोड आज भी अधूरा ही है। जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की उपेक्षा की शिकार हुई इस सड़क की हालत तेंदूखेड़ा से भोपाल के बीच बहुत खराब है रोड खराब होने से भोपाल जबलपुर चलने बाली अनेक बसें बंद हो गईं।

ये पैकेज बनाए गए
गौरतलब है कि पांच पैकेजों में बनने वाले इस फ ोरलेन रोड के लिए एक दिसंबर 2015 को दिल्ली में निविदाएं बुलाई गई थीं। पहले पैकेज का काम दिल्ली की एमडीएल कंपनी ने लिया था। इस पैकेज में जबलपुर से हिरन नदी तक निर्माण कराने की बात कही गई थी। यह दूरी करीब 57 किलोमीटर की है।


खास खास
पहला पैकेज जबलपुर से हिरन नदी दूरी 57 किमी, लागत 419 करोड़।
दूसरा पैकेज हिरन नदी से सिंदूर नदी तक दूरी 62 किमी।
तीसरा पैकेज सिंदूर नदी से बरेली तक दूरी 63.45 किमी, लागत 500 करोड़।
चौथा पैकेज बरेली बायपास से बिनेका तक दूरी 60 किमी।
पांचवां पैकेज बिनेका से मिसरोद तक दूरी 59 किमी, लागत 560 करोड़।
इसके लिए 60 मीटर का भूमि अधिग्रहण किया गया है।

दो राज्यों को जोड़ रहा एनएच
यह राष्ट्रीय राजमार्ग छह जिलों से गुजरता हुआ जबलपुर तक जाता है यह राजस्थान के जयपुर 52.20 टोंक 108.40 भीलवाड़ा 4 बूंदी 70, कोटा 83,झालावाड 93.60 किमी से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजमार्ग की राजस्थान में कुल लंबाई 411.20 किलोमीटर है नेशनल हाईवे को नया राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 52 आवंटित की गई है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग दो राज्यों की राजधानियों राजस्थान की जयपुर को मध्य प्रदेश की भोपाल को जोड़ता है राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 890 किलोमीटर है। जिसका लगभग 411 किलोमीटर भाग राजस्थान से होकर गुजरता है।


35 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में
एनएच 12 के सिंदूर नदी से बरेली तक के हिस्से में फिलहाल निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन इसकी हालत लंबे समय से खराब है, सड़क पर वाहन सुगमता से चल सकें। इसके लिए जिम्मेदारों ने ठोस कदम नहीं उठाए। यही वजह है कि अब बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों को भरा नहीं गया। ऐसे में उदयपुरा से बरेली के बीच 35 किमी की दूरी को तय करने में करीब डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। जिससे यात्री और वाहन दोनों परेशानी से गुजर रहे।

उड़ रहे धूल के गुबार
इसी मार्ग पर खरगोन से बरेली तक करीब 15 किमी के हिस्से पर हालात बेहद खराब है। पुरानी सड़क पर छोटे-बड़े आकार के सैकड़ों गड्ढे, जगह-जगह खुदाई कर छोड़ी गई अधूरी सड़क और मिट्टी डालने वाले स्थान से धूल के गुबार उडऩे लगे। जिससे दो पहिया वाहन चालकों का सफर तो खतरनाक होता जा रहा। वैसे तो बताया जा रहा है कि बरेली-उदयपुरा और देवरी तक लगभग 52 किमी का पूरा मार्ग ही खराब है। यहां पर गड्ढों से बचाकर वाहन चलाना मुश्किल है।


तीन वर्ष में तीन कंपनियों ने किया काम
सिंदूर नदी से बरेली तक बनाए जा रहे फोरलेन रोड के लिए बीते तीन वर्ष में तीन कंपनियां काम कर चुकी हैं। लेकिन रोड की एक साइड भी पूरी नहीं हो पाई। सबसे पहले जीवीआर ने लगभग दो वर्ष काम किया। जिसके बाद हैदराबाद की डीएलसी कंपनी आई जिसने लगभग एक वर्ष काम किया। अब पिछले लगभग आठ माह से अब बंसल कंपनी इस रोड का निर्माण कर रही है।

गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे
वर्तमान में निर्माण कार्य कर रही बंसल कंपनी काम सबसे कमजोर और स्तरहीन देखा जा रहा है। सूत्रों की माने तो अवैध खनन में कंपनी ने सभी कंपनियो को पीछे छोड़ दिया। कंपनी के डंपर और पोकलेन बिना शासन की अनुमति के जहां-तहां खुदाई करते देखे जाते हैं। जिससे शासन को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है। जनचर्चा का विषय है कि बरसात से पूर्व बिना रायल्टी की रेत का ढेर बनाने में भी कंपनी ने कोई कसर नहीं रखी।


बरसात में जाम लगने से होगी यात्रियों की फजीहत
कंपनी द्वारा रोड निर्माण में एक साइड पर काम किया जा रहा, परन्तु दूसरी साइड को जगह-जगह से खोद दिया गया। जिससे बारिश में कई जगह जाम की स्थिति बनेगी और यात्रियों की घण्टो की फ जीहत के साथ दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना हुआ है। कंपनी द्वारा सांकेतिक का भी उपयोग नहीं किया जा रहा। कहीं इक्का-दुक्का जगह पर संकेतक देखने को मिलते हैं। जबकि नियम अनुसार हां भी काम चालू है, वहां संकेतक लगे होना जरूरी है। सांकेतिक नहीं लगने से दुर्घटनाएं भी हो चुकी।

सड़क निर्माण कार्य में यदि किसी तरह से मिट्टी की अवैध खुदाई या अन्य कार्य किया जा रहा है। तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सुनील वर्मा, प्रभारी तहसीलदार उदयपुरा

इनका कहना
बरेली से खरगोन तक की सड़क को जल्द बनवाने के लिए बंसल कंपनी के अधिकारियों को निर्देशित किया है। जहां-जहां भी सड़क की स्थिति खराब है, उसे सुधारने के लिए कहा गया है। तीस अक्टूबर तक एक तरफ की सड़क को पूरी तरह से बनाकर आवागमन शुरू कर दिया जाएगा।
एमएच रिजवी, प्रोजेक्ट अधिकारी, एमपीआरडीसी भोपाल।