
Khargone
खरगोन. बुधवार को रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव में शाम को ओशो ओशो की गूंज सुनाई देती रही। क्योंकि दुनिया भर के ओशो प्रेमियों के लिए कुचवाड़ा गांव दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ है। यहां की पवित्र रज को माथे पर लगाकर ओशो प्रेमी स्वयं को धन्य मानते हैं। क्योंकि यहां रजनीश ओशो का जन्म हुआ था। बुधवार शाम को देश के साथ ही विदेश से आए ओशो भक्त ओशो तीर्थ के संस्थापक स्वामी सत्यतीर्थ भारती के सानिध्य में ओशो तीर्थ से हंसते गाते नाचते हुए कुचवाड़ा गांव की गलियों से होते हुए उस छोटे से घर पहुंचे जहां 11 दिसंबर 1931 को रजनीशचंद्र मोहन के रूप में ओशो का जन्म हुआ था। यहां मोमबत्ती जलाकर गुलाब के फूल ओशो की तस्वीर पर चढ़ाए और उस पवित्र रज को माथे पर लगाकर ओशो भक्त भाव विभोर हो गए।
पत्रिका से बात करते हुए ओशो तीर्थ के संस्थापक स्वामी सत्यतीर्थ भारती ने कहा कि जिस बंदे को ध्यान और साधना की गहरी प्यास होती है, वही बंदा ओशो तीर्थ आता है। स्वामी सत्यतीर्थ भारती कहते हैं बुद्ध पूरा राज छोड़कर जंगल में बैठे। किसी को राज में आनंद मिलता है तो किसी को जंगल में परमानंद की प्राप्ति होती है। स्वामी सत्यतीर्थ भारती कहते हैं कि सबकी अपनी अपनी इच्छा है, किन्तु यह ठीक नहीं है कि जिन्हें अध्यात्म से कोई लेना देना नहीं है वह अध्यात्म का दिखावा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह ठीक वैसा ही जैसे अंधे अंधे को रास्ता दिखा रहा है। जापान की ओशो भक्त मां देवा कविता ने कहा कि ओशो तीर्थ कुचवाड़ा में आनंद अद्भुत अनुभूति होती है।
Published on:
12 Dec 2019 06:29 pm
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