
रायसेन। जिला अस्पताल में मरीज अपनी परेशानी लेकर आते हैं कि उन्हें सही इलाज मिल सके। लेकिन कई बार मामूली चोटें व बीमारी मं बेवजह मरीजों, घायलों को डॉक्टर भोपाल रैफर कर देते हैं। इस कारण जिला अस्पताल में आमजन को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने का वादा यहां बेमानी साबित हो रहा है।वर्तमान में जिला अस्पताल में डॉक्टर स्टाफ सहित अन्य कई संसाधनों की कमी बरकरार है।
साथ ही वार्डों में पलंगों की कमी से लेकर अत्याधुनिक संसाधनों और अमले की व्यवस्था भी न के बराबर है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एसएस कुशवाह ने वीआरएस लेने से जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं और भी लडखड़ा गई हैं। वह सबसे महत्वपूर्ण विभाग का जिम्मा सोनोग्राफी का संभालते थे। इनके ऐच्छिक सेवा निवृत्त लेने के बाद से प्रसूति महिलाओं सहित पेट संबंधी बीमारों की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। इस कारण मजबूरी में वह बाजार से महंगे रेट पर सोनोग्राफी कराने के लिए मजबूर हैं। एक बार में सोनोग्राफी की फीस इन्हें ११०० से लेकर १२०० रूपए चुकानी पड़ रही है।
सोनोग्राफी के लिए सिर्फ मिल रहीं तारीखें .....
जिला अस्पताल के सोनोग्राफी यूनिट के बुरेहाल हैं। रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एसएस कुशवाह की ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद से व्यवस्थाएं बुरी तरह से चरमरा गई हैं। इस यूनिट का प्रभार फिलहाल मेडिकल आफीसर डॉ.दीपक गुप्ता और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.जिंसी ठाकुर को दे रखा है।
यह दोनों डॉक्टर सिर्फ प्रसूताओं की ही सोनोग्राफी कर रहे हैं। बाकी पेट संबंधी मरीज बगैर सोनोग्राफी कराए घर लौट रहे हैं। बिलाल मस्जिद के समीप बरेली निवासी शकीला बी अपनी बेटी फिरदोश बी को दूसरी डिलीवरी होना थी। इसीलिए वह उसेलेकर शनिवार को करीबन ११० किमी का सफर बस से तय कर जिला अस्पताल पहुंची। लेकिन उसकी अर्जेट सोनोग्राफी नहीं हो सकी। मजबूरी में उन्हें बाजार से १२०० रूपए खर्च कर सोनोग्राफी कराना पड़ी।
ता बाई बंजारा, बाड़ी के अमरावद कलांकी सेवंती बाई ठाकुर को दूसरी डिलीवरी होना है। उन्हें पहले २२ अप्रैल को बुलाया फिर ४ मई इसकेबाद १४ मई की तारीख की पर्ची थमा दी गई है।
इन विभागों में नहीं विशेषज्ञ
वैसे तो जिला अस्पताल में २४ डॉक्टर कार्यरत हैं। हाल ही में जिला अस्पताल के सोनोग्राफी में रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एसएस कुशवाह ने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। इस कारण यह पद रिक्त हो गया है। इसके अलावा अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. केके लेडवानी भी रिटायर्डमेंट हो चुके हैं। इसके अलावा दंत रोग चिकित्सक, एक महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त है। वहीं पैथॉलाजिस्ट का पद भी पिछले एक साल से खाली है।
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भी अभी तक स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की पदस्थापना नहीं हो सकी है। सर्जिकल वार्ड के लिए भी एक विशेषज्ञ का पद खाली है। जिला अस्पताल प्रबंधन के सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में ३६ पद शासन स्तर पर स्वीकृत हैं। इनमेें १० डॉक्टर के पद भरे हुए हैं। इसमें से डॉ.एके शर्मा डीएचओ, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.संध्या खोसले सीएमएचओ कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं। मजबूरी में इन ७ डॉक्टरों की सेवाएं अस्पताल में ली जा रही हैं।
मेडिकल आॅफिसरों के २२ पदों में से सिर्फ १५ पद भरे हैं ७ पद खाली हैं। जिला अस्पताल के शिशु रोग चिकित्सक डॉ. अंकुर छारी, रितुराज बघेल डॉ. ज्योत्सना भीमटे, डॉ.प्रीति टण्डन नौकरी से इस्तीफा देकर चले गए हैं। जिला अस्पताल में ज्यादा सुविधाओं को देने का दावा जरूस्र किया जाता है। लेकिन मरीजों को सुविधाए उस हिसाब से नहीं मिल रहीं जितनी मिलना चाहिए।
मरीजों को मिल रहा सिर्फ मामूली इलाज ....
जिला अस्पताल में मरीजों को वर्तमान में सिर्फ मामूली उपचार ही मिल रहा है। गंभीर मरीजों को चेकअप करने के बाद फौरन हमीदिया हास्पिटल लेडी हास्पिटल भोपाल रैफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में सिर्फ सामान्य मरीजों को ही इलाज लि पा रहा है। गंभीर मरीजों, घायलों को प्राथमिक उपचार करने के बाद डॉक्टर भोपाल रैफर कर रहे हैं। गर्मी के सीजन में इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में कभी १२०० तो कभी १००० से अधिक मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। शनिवार को हाई बीपी, एक युवक के बाइक से गिरने से गंभीर चोट आने पर उसे भोपाल रैफर कर दिया गया ।
Published on:
06 May 2018 11:05 am
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