20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

70 फीसदी स्कूल राजस्व विभाग की जमीन पर

अक्रिमण होने पर स्कूल शिक्षा विभाग नहीं कर पा रहा कार्रवाई।

2 min read
Google source verification
70 फीसदी स्कूल राजस्व विभाग की जमीन पर

70 फीसदी स्कूल राजस्व विभाग की जमीन पर

रायसेन. जिले के 70 फीसदी स्कूल भवन राजस्व विभाग की जमीन पर बने हैं। स्कूल भवन बनाने के लिए शासन ने जमीन तो आवंटित कर दीं, लेकिन बाद में उनका नामांतरण शिक्षा विभाग को नहीं किया गया। इससे न तो स्कूलों के संचालन में कोई दिक्कत है और न भवन के निर्माण में कोई परेशानी है, लेकिन स्कूलों की जमीनो पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शिक्षा विभाग नहीं कर पा रहा है। चूंकि जमीन शिक्षा विभाग की नहीं हैं, इसलिए वो कार्रवाई करने के लिए भी अधिक्रत नहीं है। राजस्व विभाग इन जमीनों के नामांतरण में रुचि नहीं ले रहा है, बताया जाता है कि नामांतरण की प्रक्रिया लंबी होने के कारण यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है।
हालांकि शिक्षा विभाग ने कुछ स्कूलों की जमीन पर हुए अतिक्रमण अपने स्तर पर नोटिस आदि देकर हटवा दिए हैं, लेकिन जहां अतिक्रमणकारी रसूखदार हैं, वहां शिक्षा विभाग भी असहाय साबित हो रहा है। ऐसे दस स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण की सूची शिक्षा विभाग ने तैयार की है। जिन पर सालों से अतिक्रमण है, लोगों ने पक्के निर्माण कर लिए हैं और अब उन्हे हटाना टेढ़ी खीर नजर आ रहा है। इन स्कूलों में सांची का हायर सेकंडरी स्कूल, सुल्तानपुर का हायरसेकंडरी स्कूल, बेगमगंज, पड़रिया गंज, बम्होरी गोदड़, देहगांव, अजीतनगर के स्कूल शामिल हैं। बेगमगंज स्कूल की चार एकड़ जमीन पर अतिक्रण बताया जा रहा है। जो सबसे अधिक है। सुल्तानपुर स्कूल के खेल मैदान पर अतिक्रमण किया गया है।
जिले में कुल 2145 स्कूल भवन
जिले में कुल 2145 स्कूल भवन हैं। इनमें 185 भवन हाई और हायर सेकंडरी स्कूल के हैं, जबकि 1960 प्राथमिक और मिडिल स्कूल भवन हैं। अतिक्रमण की स्थिति के वल हाई और हायर सेकंडरी स्कूल भवनों में ही है।
नहीं कर पा रहे सुरक्षा व्यवस्था
स्कूलों की जमीनों पर अतिक्रमण होने से शिक्षा विभाग उक्त स्कूलों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग या बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं कर पा रहा है। संबंधित स्कूल के प्राचार्य इसके प्रयास करते भी हैं तो अतिक्रमणकारी अड़ंगा लगाते हैं। असुरक्षित स्कूलों में लोग बे रोक टोक प्रवेश करते हैं। अधिकतर स्कूलों के मैदान रात में शराबियों का अड्डा बने रहते हैं। सिलवानी स्कूल का खेत मैदान इसका उदाहरण है, जहां हर दिन शराब की खाली बोतलें मिलती हैं। स्कूलों की खिड़कियों, दरवाजों में तोडफ़ोड़ होना आम बात है।
इधर स्कूल खोलने की तैयारियां शुरू
बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा 25 -26 जुलाई से स्कूल खोलने की घोषणा की गई है। जिसे लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, हालांकि अभी विधिवत आदेश आने का इंतजार है। जल्द स्कूल खुलने की संभावना को देखते हुए प्राचार्यों ने स्कूलों का रंगरोगन करा लिया है। नगरीय मुख्यालयों पर तो स्कूलों में तैयारियां जारी हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के महीनों से ताले नहीं खुले हैं।
इनका कहना है
- कुछ स्कूलों की जमीनो पर अतिक्रमण है, जबकि कुछ स्कूलों से अतिक्रमण हटा दिया गया है। अधिकतर स्कूल राजस्व की जमीन पर पर बने हैं, इसलिए विभाग सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं कर पाता है।
एमआर बागड़ी, एडीपीसी शिक्षा विभाग
- स्कूल खोलने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। आदेश आते ही कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए निर्देशानुसार उपस्थिति के साथ स्कूलों में अध्यापन शुरू किया जाएगा। नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो गई है।
आनंद शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
----------------------