
अब इल्ली कुतर रही सोयाबीन और मक्का,अब इल्ली कुतर रही सोयाबीन और मक्का,अब इल्ली कुतर रही सोयाबीन और मक्का
रायसेन/सुल्तानगंज. बारिश नहीं होने से पहले ही फसलों पर खतरा मंडरा रहा है, इधर कीट के प्रकोप से भी फसलें खतरे में पडऩे लगी हैं। किसानों की सोयाबीन और मक्का की फसलें कीड़े और इल्ली लगने से धीरे-धीरे खराब हो रही हैं। सुल्तानगंज और इसके आसपास दो दर्जन से अधिक गांव में फसलों पर इल्लियों का प्रकोप हो गया है। समय पर बारिश नहीं होने के बाद अब खड़ी फसलों पर इल्लियों का प्रकोप होने के बाद किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। क्षेत्र के कई गांवों में फसलों पर इल्लियां हावी हो रही हैं। जो दिन दूनी और रात चौगुनी बढ़ रही हैं।
कृषक डालचंद रैकवार ने बताया कि सुल्तानगंज सहित आसपास के कई गांवों में मक्का और सोयाबीन की फसलों पर कीट व इल्लियों का प्रकोप है, जिससे खड़ी फसल चौपट हो रही हैं। इससे किसानों को नुकसान हो सकता है। खैरी गांव के किसान महेंद्र पठ्या ने बताया कि सोयाबीन और मक्का की फसल पर इल्लियों का काफी ज्यादा मात्रा में प्रकोप हैं, जिससे दोनों फसलें चौपट होने की कगार पर हैं। इल्लियों का प्रकोप काफी तेजी से फैल रहा है, यह किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ग्राम बरखेड़ा गुलाब के कृषक आशीष कुर्मी ने बताया कि उन्होंने लगभग 15 एकड़ के रकबे में मक्का की और 5 एकड़ में सोयाबीन की बोवनी की है, लेकिन इल्लियों के प्रकोप से फसल अभी से कमजोर हो गई है। भविष्य में फसलों के उत्पादन औसत में काफी गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही सोयाबीन की फसल भी चौपट होने की कगार पर है। यह इल्लियां एक रात में सैकड़ों की संख्या में बढ़ती हैं, इल्लियों का प्रकोप इतना ज्यादा है कि यदि वह स्वयं अपने खेत में दवा का छिड़काव कर लेते हैं। बाजू के खेत में दवा का छिड़काव नहीं किया जाता है तो इल्लियां पुन: फसल पर हमला बोल देती हैं। इसीलिए जल्द ही दवा का छिड़काव करना आवश्यक हो गया है।
इल्लियों से इस तरह होगा नुकसान
इन दिनो इल्लियां सोयाबीन के पत्ते और मक्का के तना में लगी हैं। इल्लियों द्वारा पत्तों को काटने ने फसल की बढ़वार रुक जाती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। मक्का का तना कमजोर होने से पौधा बढ़ता नहीं है। पानी की कमी से फसलें पहले ही कमजोर हैं, धूप निकलने के कारण उन पर इल्लियों का प्रकोप बढ़ रहा है। यदि समय रहते दवा का छिड़काव नहीं किया जाता है तो पूरी खड़ी फसलें तबाह हो सकती हैं।
मक्का की फसल का ऐसे करें बचाव
- नीम की खली 250 किग्रा/हैक्टेयर
- फ्युजीपरडा फिरोमोन प्रपंच 15/हैक्टेयर
- टी आकार की खूटियां 30-40/हैक्टेयर लगाएं।
- ग्रसित फसल की पोगली में बारीक सूखी रेत, राख अथवा बुरादा डालें।
- नीम तेल 1500 पीपीएम
- बिवैरिया बेसियाना 5 ग्राम/लीटर, फ्लूबैन्डामाइट 480 एससी 150 मिली/हैक्टेयर, क्लोरेन्ट्रनीलीप्रोल 18.5 एससी 150 मिली/हैक्टेयर, इमामेक्टीन बेन्जोएट 5 एससी 200 ग्राम/हैक्टेयर, स्पीनोसेड 45 एससी 200 मिली/है।
इनमे से किसी एक का छिड़काव करें।
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सोयाबीन की फसल का ऐसे करें बचाव
- क्लोरएन्ट ऊानिलिप्रोल 18.5 एससी 150 मिली/हैक्टेयर
- बीटासायफ्लुथ्रिन 8.49 + इमिडाक्लोप्रिड 19.81 प्रतिशत
- ओडी 350 मिली/हैक्टेयर
- लैम्बडा सायहेलोथ्रिऩ 9.5 प्रतिशत जेडसी थायमिथोक्सम 12.6 प्रतिशत 125 मिली/हैक्टेयर।
किसी एक का छिड़काव करें।
इनका कहना है
बारिश नहीं होने और तेज धूप निकलने के कारण कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन और मक्का फसल पर इल्लियों का प्रकोप हो रहा है। इससे बचाव के लिए बताई गई तकनीक और दवाओं का उपयोगि किया जा सकता हे। मान्यता प्राप्त मानक स्तर की दवाओं का ही उपयोग करें।
स्वप्रिल दुबे, कृषि वैज्ञानिक
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Published on:
15 Jul 2021 09:31 pm
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