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बच्चों में निमोनिया के साथ झटका की बीमारी

समय पर नहीं किया इलाज तो बन सकती है मिर्गी, हर दिन आ रहे दो से तीन मरीज। डेंगू के दो नए मरीज मिले।

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बच्चों में निमोनिया के साथ झटका की बीमारी

बच्चों में निमोनिया के साथ झटका की बीमारी

रायसेन. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच बच्चों में निमोनिया का असर माता पिता की चिंता बढ़ा रहा है, हालांकि डॉक्टर इसे निमोनिया के सामान्य लक्षण बता रहे हैं। मौसम के प्रभाव से छोटे बच्चों को निमोनिया हो जाता है। इन दिनो जिला अस्पताल में इस बीमारी के बच्चे हर दिन पहुंच रहे हैं। इसके अलावा झटका (मिर्गी) से पीडि़त बच्चे भी हर दिन अस्पताल पहुंच रहे हैं। दो से तीन बच्चे इस बीमारी से पीडि़त होकर पहुंच रहे हैं। समय पर इस बीमारी का उचित इलाज नहीं हुआ तो यह बच्चों के शरीर में स्थाई रूप से ठहर सकती है। इस बीमारी को डॉक्टर निमोनिया से अधिक गंभीर बता रहे हैं। एक से पांच साल के बच्चों में यह बीमारी अधिक सामने आ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में झटका आने के साथ शुरू होने वाली इस बीमारी का समय पर और पूरा इलाज नहीं किया गया तो आगे चलकर यह मिर्गी का रूप ले सकती है, जो फिर जीवन भर के लिए व्यक्ति के साथ लग जाती है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. एलके गुर्जर का कहना है कि झटका के रूप में शुरू होने वाले मिर्गी रोग का इलाज लगातार तीन साल करना पड़ता है। इसकी दवा बिना नागा किए हर दिन देना जरूरी है। नियमित इलाज नहीं करने पर यह बीमारी बच्चे की आयु बढऩे के साथ मिर्गी का रूप ले लेती है और फिर इसे दूर करना मुश्किल हो जाता है।
हर दिन आ रहे दो से तीन मरीज
इन दिनो जिला अस्पताल में झटका बीमारी के दो से तीन मरीज हर दिन आ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों के हाथ पैरों में जकडऩ के साथ बार-बार हाथ पैर तेजी से हिलते हैं। कुछ देर में बच्चा बेहोश हो जाता है। यह बेहोशी पांच से दस मिनट तक रह सकती है। ऐसा होने पर घबनाएं नहीं, बल्कि इलाज कराएं।
जबकि निमोनिया के बच्चे इससे अधिक आ रहे हैं। रायसेन में ही इन बीमारियों का इलाज अब संभव है, इसलिए बच्चों को रेफर करने की स्थिति नहीं बन रही है। बहुत की क्रिटिकल स्थिति में बच्चों को भोपाल रेफर करना पड़ता है। शुक्रवर को बच्चों के वार्ड में कुछ पलंग खाली थे, यह संतोषजनक है।
सीटी स्केन मशीन पहुंची
शुक्रवार को सीटी स्केन मशीन भी जिला अस्पताल पहुंच गई। जिसके इंस्टालेशन का काम भी शुरू हो गया। कंपनी द्वारा भेजे गए विशेषज्ञ मशीन को स्थापित कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले तीन दिन में जिला अस्पताल में सीटी स्केन की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में सीटी स्केन की सुविधा नहीं होने से कई मरीजों में कोरोना संक्रमण के स्तर का समय पर पता नहीं चला था, जिससे मरीजों की स्थिति गंभीर हुई और कई मरीजों की मौत भी हुई थी।
डेंगू के दो नए मरीज मिले
जिले में डेंगू के भी दो नए मरीज मिले हैं। एक मरीज बरेली में तथा एक बेगमगंज में मिला है। इस वर्ष अब तक जिले में डेंगू के सात मरीज मिल चुके हैं, जबकि मलेरिया के 10 मरीज मिले हैं। मलेरिया विभाग उन्ही जगहों पर सर्वे और लार्वा नष्ट करने का काम कर रहा है, जहां मरीज मिल रहे हंै। प्रदेश में डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं, इसकी गंभीरता को देखते हुए भी विभाग सर्वे में ढील बरत रहा है।
इनका कहना है
- इन दिनो निमोनिया के साथ झटका बीमारी के मरीज हर दिन आ रहे हैं। हालांकि कोई खतरा नहीं है, लेकिन इन बीमारियों का समय पर और पूरा इलाज कराना जरूरी है। ताकि बीमारी बच्चों शरीर में घर न कर सके।
डा. लक्ष्मीकांत गुर्जर, शिशु रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल।
- जिले के बरेली और बेगमगंज में डेंगू के दो मरीज मिले हैं। अब तक सात डेंगू के और दस मलेरिया के मरीज मिल चुके हैं। सर्वे का काम लगातार चल रहा है। सेंपल लेने और स्लाइड बनाने का काम भी जारी है।
डा. प्रियंबदा गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी
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