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बंद होने की कगार पर हलाली परियोजना

बिजली बिल के कर्ज में डूब रही परियोजना, माना प्लांट को फिर चालू करने पर विचार।

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बंद होने की कगार पर हलाली परियोजना

बंद होने की कगार पर हलाली परियोजना

प्रवीण श्रीवास्तव, रायसेन. 32 करोड़ की लागत से तैयार की गई हलाली परियोजना नगर पालिका के लिए गले की हड्डी साबित हो रही है। तीन साल में ही इस परियोजना ने नगर पालिका को कर्ज के गहरे गड्डे में धकेल दिया है। जिससे बाहर निकलना अब नपा को बूते से बाहर की बात लग रही है। ऐसे में यह परियोजना बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
शहर के लोगों को पानी की जरूरत की पूर्ति के लिए नगर पालिका ने मुख्यमंत्री जल आवर्धन योजना के तहत शहर से 33 किमी दूर हलाली बांध से पाइप लाइन के जरिए पानी लाने की योजना बनाकर उसे पूरा किया था। लेकिन तीन साल में ही यह योजना नपा के लिए सफेद हाथी साबित होने लगी है। कमाई तो दूर इसका खर्च निकालना भी असंभव हो गया है। ऐसे में बिजली बिलों का कर्ज बढ़कर लगभग दो करोड़ का हो गया है। कर्मचारियों का वेतन तक देने में असमर्थ नपा इतनी बड़ी राशि चुकाने की स्थिति में नहीं है। इसलिए अब शहर के लोगों को पेय जल उपलब्ध कराने के लिए पुराने उपायों को मजबूत करने का विचार करने लगी है। दो-तीन हजार रुपए का बिल बाकी होने पर ही लोगों के बिजली कनेक्शन काटने वाली बिजली कंपनी अभी तक इस परियोजना की सप्लाई इसलिए नहीं काट रही है कि यह आम जन से जुड़ी सुविधा का मामला है।
दो कनेक्शन के दो करोड़
हलाली बांध पर परियोजना के वाटर लिफ्टिंग प्लांट और बाइपास रोड पर फिल्टर प्लांट के बिजली कनेक्शन पर लगभग दो करोड़ की राशि बकाया है। बिजली कंपनी इन दोनो जगह की सप्लाई चालू रखने के लिए मजबूर है, लेकिन किसी भी दिन कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
माना प्लांट की आई याद
हलाली परियोजना में आए दिन खराबी, कभी पाइप लाइन फूटने तो कभी स्टार्टर खराब होने के कारण शहर में जल सप्लाई बाधित होती है। ऐसी स्थिति में बेतवा का माना फिल्टर प्लांट काम आता है। इससे लगभग 30 प्रतिशत शहर को पानी मिल जाता है। अब नगर पालिका इस प्लांट को फिर मजबूत करने पर विचार कर रही है। ताकि हलाली पर बिजली का संकट आए तो माना प्लांट से कुछ हद तक काम चल सके।
ये है खर्च और आय का गणित
हलाली परियोजना नपा के लिए पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार इस परियोजना का खर्च लगभग छह करोड़ रुपए साल का है, जबकि आय की बात की जाए तो शहर से जल कर के रूप में नपा को लगभग एक करोड़ रुपए ही मिल पाते हैं। इस तरह पांच करोड़ रुपए साल का घाटा हलाली से हो रहा है।
इनका कहना है
- हलाली परियोजना और फिल्टर प्लांट के बड़े बिजली बिल बाकी हैं। इसे बंद करने का विचार नहीं है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मामना प्लांट को चालू रखने की योजना पर विचार किया जा रहा है। ताकि जरूरत पडऩे पर शहर में पानी सप्लाई जारी रहे।
आरडी शर्मा, सीएमओ नगर पालिका रायसेन
- नगर पालिका पर हलाली परियोजना और फिल्टर प्लांट का दो करोड़ से अधिक बिल बकाया है। हम हर माह नोटिस दे रहे हैं, लेकिन राशि जमा नहीं की जा रही है। ऐसे में हमे सख्त कदम उठाना पड़ सकता है।
राजेश तुषाद, डीई बिजली कंपनी रायसेन
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