26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लागत दो लाख दे रहे सवा लाख, कैसे बनें प्रधानमंत्री आवास

आवास का लक्ष्य पूर्ण करने कर्मचारियों पर दबाब, हितग्राही नहीं बना रहे आवास।

2 min read
Google source verification
लागत दो लाख दे रहे सवा लाख, कैसे बनें प्रधानमंत्री आवास

लागत दो लाख दे रहे सवा लाख, कैसे बनें प्रधानमंत्री आवास

रायसेन. प्रधानमंत्री आवास योजना, भवन निर्माण सामग्री पर महंगाई की मार के चलते खटाई में पड़ गई है। एक ओर सरकार हितग्राहियों को कुल सवा लाख रुपए मकान बनाने के लिए दे रही है, दूसरी ओर भवन निर्माण सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में गरीबों का अपने घर का सपना और प्रधानमंत्री की हर परिवार को आवास देने की मंशा चकनाचूर हो रहा है। वहीं निर्देशों से बंधे अधिकारी मैदान कर्मचारियों पर आवास निर्माण का लक्ष्य पूर्ण करने के लिए तमाम तरह से दबाब बना रहे हैं। कर्मचारी गांव-गांव और गली-गली घूमकर हितग्राहियों से आवास बनाने की मिन्नतें कर रहे हैं, जबकि हितग्राही चाहकर भी निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
योजना पुरानी सामग्री के दाम नए
प्रधानमंत्री आवास योजना 2016-17 से चली आ रही है। तब से ही इसके तहत हितग्राही को एक लाख 20 हजार रुपए दिए जाते हैं, साथ ही मनरेगा के तहत मजदूरी के नाम पर 15 हजार रुपए दिए जाते हैं। इस तरह कुल एक लाख 35 हजार रुपए में हितग्राही को 300 वर्ग फीट में एक कमरा, एक किचिन और लेट बाथ सहित आवास बनाना है। यह उस समय तय की गई राशि है, जब लोहा का दाम तीन से साढ़े तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल था। आज हालात बदल गए हैं। लोहे का दाम लगभग आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल है। बाकी सामग्री के दाम भी इसी अनुपात में बढ़े हैं। सिविल इंजीनियर भी कहते हैं क इस राशि में प्रधानमंत्री आवास बनाना असंभव है।
ये मिला है लक्ष्य
जिला पंचायत में आवास योजना प्रभारी प्रवीण झोपे के अनुसार वर्ष 2022-23 के लिए जिले में 12797 आवास बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले ही 2016-17 से अभी तक लगभग 10 हजार आवासों का काम अपूर्ण है।
इस वर्ष मिले लक्ष्य में बाड़ी विकास खंड को 1621 आवास, बेगमगंज को 2145, गैरतगंज को 1430, औबेदुल्लागंज को 1761, सांची को 1967, सिलवानी को 2315, उदयपुरा को 1558 आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया है। जिनकी पूर्ति के लिए दबाब बनाया जा रहा है।
ऐसे समझें महंगाई का असर
सेवानिवृत्त इंजीनियर ब्रजेश श्रीवास्तव के अनुसार 300 वर्ग फीट में एक कमरा, किचिन और लेट बॉथ बनाने के लिए दो लाख से अधिक राशि का खर्च है। इसमें पुराव के लिए मिट्टी, रंगाई पुताई आदि छोटे खर्च नहीं जोड़े गए हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तुलना में सस्ता पड़ते हैं।
सामग्री मात्रा दर राशि
सीमेंट 65 बोरी 380 24,700
रेत 250 क्यूबिक फीट 100 25,000
गिट्टी 150 क्यूबिक फीट 110 16500
लोहा 600 किलो 78 46,800
ईंट 4500 05 22,500
मजदूरी 50,000
कुल लागत 2,02000
--
इनका कहना है
- सरकार ने जितने पैसे घर बनाने के लिए दिए थे, उनमें आधा काम हुआ है। अब बाकी काम के लिए पैसे नहीं है। जब पैसे होंगे तब पूरा घर बनाएंगे।
जसवंत खंगार हितग्राही, प्रधानमंत्री आवास योजना
लोहा, सीमेंट, रेत सब महंगे हो गए है। जितने पैसे मिले थे उनमें दीवारें खड़ी कर दी हैं। अब छत डालने के लिए रुपए नहीं हैं। लोहा खरीदने के लिए पैसे कहां से लाएं।
काशीवन गोस्वामी, हितग्राही प्रधानमंत्री आवास योजना
वर्जन...
प्रधानमंत्री आवास के लिए लक्ष्य आ गए हैं, जो जनपद पंचायतों को दिए गए हैं। हितग्राहियों को आवास आवंटन करने का काम तेज गति से करने के लिए कहा गया है। ताकि पंचायत चुनाव की आचार संहिता लगना से पहले अधिक से अधिक आवंटन हो सके।
पीसी शर्मा, सीइओ जिला पंचायत
------