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धान से धन्य हो रहा रायसेन जिला

बीते कई सालों से ज्यादा पैदावार इस बार हुई, गेहूं की पैदावार भी बढऩे की संभावना।

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धान से धन्य हो रहा रायसेन जिला

धान से धन्य हो रहा रायसेन जिला

रायसेन. जिले में इस बार धान की बंपर पैदावार हुई है। पहले मंडी में आई बासमती धान और अब समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर क्रांति धान की आवक रिकॉर्ड तोड़ रही है। सरकार ने प्रदेश के 18 जिलों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तारीख 20 जनवरी तक बढ़ाई है, इनमे रायसेन जिला भी शामिल है। जबकि अब तक बीते कई सालों से अधिक धान खरीदी जा चुकी है। 20 जनवरी तक आंकड़े और बढ़ेंगे। केवल धान ही नहीं बल्कि इस बार गेहूं का उत्पादन भी बंपर होने की संभावना है, क्योंकि जिस तरह यूरिया खाद की मांग आ रही है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार गेहूं का रकबा बीते सालों की तुलना में बढ़ा है। जो कृषि विभाग के अनुमान से कहीं अधिक है।
तीन माह से हो रही खरीदी
जिले में धान की खरीदी तीन माह से हो रही है। पूसा बासमती के लिए प्रसिद्ध रायसेन जिले की हर मंडी में बीते तीन माह से पूसा बासमती की खरीदी चल रही है। अभी भी मंडी में धान आ रही है। इस बीच समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर क्रांति धान की खरीदी शुरू हो गई। जिले में 20 केंद्रों पर यह धान खरीदी जा रही है। लाल दाना मिली धान रिजेक्ट करने के बाद भी अब तक 81 हजार 596 मेट्रिक टन मोटी धान की खरीदी की जा चुकी है। अब खरीदी की तारीख बढऩे से 15 से 20 हजार मेट्रिक टन धान और आने की संभावना है। इस तरह इस साल जिले में केवल मोटी धान का उत्पादन ही एक लाख मेट्रिक टन के आस-पास पहुंच रहा है।
रायसेन मंडी में अब तक डेढ़ लाख मेट्रिक टन से अधिक बासमती धान खरीदी जा चुकी है। जबकि अभी भी धान की आवक जारी है। हालांकि रायसेन मंडी में विदिशा, सीहोर, अशोकनगर आदि जिलों से भी धान आती है। जो कुल खरीदी की 20 प्रतिशत तक मानी जा सकती है। इसके बाद भी जिले में पैदा हुई धान की मात्रा बीते सालों से कहीं अधिक है। मार्कफैड से मिली जानकारी के अनुसार बीते साल जिले में 30 हजार 450 मेट्रिक टन क्रांति धान खरीदी गई थी। यही आंकड़ा इस बार जिले में धान के उत्पादन को स्पष्ट करता है। बीते साल रायसेन मंडी में लगभग सवा लाख मेटिक टन धान खरीदी गई थी।
टैग मिलने पर और उढ़ेगा उत्पादन
किसानो और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिले की पूसा बासमती धान को जीआई टैग मिलने की पूरी उम्मीद है, जल्द ही यह उपलब्धि मिलते ही जिले में बासमती धान का उत्पादन और बढ़ेगा। जिन क्षेत्रों में अभी धान की खेती कम की जा रही है, वहां के किसान भी इसे प्रमुख फसल के रूप में लेंगे। उल्लेखनीय है कि जिले की बासमती सालों से कंपनियों के माध्यम से विदेशों तक पहुंच रही है। जिसका अधिकतम लाभ कंपनियां ले रही हैं। स्थानीय किसानों को उपज का उचित दाम नहीं मिलता है। कई बड़ी कंपनियां व्यापारियों से धान की खरीदी कराती हैं। बासमती को जीआई टैग मिलने पर जिले में ही प्रोसेसिंग इकाइयां भी खुलेंगी।
इनका कहना है
- रायसेन जिले में लंबे समय से बासमती धान की खेती की जा रही है। बीते कुछ सालों से लगातार धान का रकबा बढ़ रहा है। यह जिले के लिए अच्छी बात है, यहां की बासमती विदेशों तक जाती है। इस बार बासमती के साथ क्रांति धान की पैदावार भी अच्छी हुई है।
स्वप्रिल दुबे, कृषि वैज्ञानिक
- जिले में धान प्रमुख फसल बन गई है। अब किसान सोयाबीन की जगह धान की खेती ज्यादा कर रहे हैं। बासमती को जीआई टैग मिला तो इसका रकबा और बढ़ेगा साथ ही किसानों की आय भी बढ़ेगी।
दुष्यंत धाकड़, सहायक उपसंचालक कृषि
- जिले में अब तक ८१ हजार मेट्रिक टन से अधिक क्रांति धान की खरीदी की जा चुकी है। खरीदी की तारीख बढऩे से यह आंकड़ा एक लाख टन तक जा सकता है। जो पिछले कई सालों से ज्यादा है।
अशोक पुरोहित, मार्कफैड
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