
धूमधाम से मनाया जाएगा पर्युषण महापर्व
रायसेन. कल से जैन धर्म का दस दिवसीय पर्युषण पर्व प्रारंभ हो रहा है। समाज के प्रचार प्रसार व्यवस्थापक राकेश जैन ने बताया कि 10 सितंबर से प्रारंभ होने वाले पर्युषण महापर्व की तैयारी सकल दिगंबर जैन समाज रायसेन द्वारा बड़े स्तर पर की जा रही है। कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए सारे कार्यक्रम को संपन्न कराया जाएगा। सुबह नरेंद्र जैन के नेतृत्व में युवा टीम मंदिर में पूजन करने वालों के लिए द्रव्य की व्यवस्था करेगी। सुबह 7:30 बजे अभिषेक एवं शांति धारा का आयोजन किया गया है। 8:30 बजे से संगीत मय सामूहिक पूजन शुरू होगी। 9:45 बजे तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया जाएगा। दोपहर 2 बजे विधान का कार्यक्रम रखा गया है। रात्रि 7:45 पर संगीत मय आरती होगी तथा 8:30 बजे दशरथम धर्म पर पंडित कुंदन लाल जैन एवं बुद्ध सेन द्वारा प्रवचन किए जाएंगे। प्रवचन के बाद रात में हर वर्ग आयु के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। विमान उत्सव एवं सामूहिक भोज का आयोजन 21 सितंबर को श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रखा गया है।
जैन अनुयायियों के लिए 10 लक्षण धर्म का विशेष महत्व है। इन 10 दिनों में जैन अनुयाई व्रत एवं उपवास कर कर आत्म शुद्धि के रूप में इस पद को मनाते हैं। पहला दिन होता है उत्तम क्षमा का, दूसरा दिन होता है उत्तम मार्दव धर्म का, तीसरा दिन होता है उत्तम आर्जव धर्म का, चौथे दिन को उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया जाता है। पांचवा दिन उत्तम सत्य धर्म के लिए जाना जाता है, छठवां दिन उत्तम संयम का होता है, सातवां दिन उत्तम तप धर्म तथा आठवें दिन को उत्तम त्याग धर्म के रूप में अपनाया जाता है। नवां दिन समर्पित होता है उत्तम अकिंचन धर्म के लिए और 10 वां दिन होता है ब्रह्मचर्य धर्म के लिए। इसके बाद सबसे बड़ा पर्व विश्वमित्री का पर्व क्षमावाणी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन एक दूसरे से क्षमा मांग कर मन की कलुषता को दूर किया जाता है। जैन समाज में इस आयोजन की परंपरा पर्व राज पर्युषण के समापन संदर्भ में की जाती है। जाने अनजाने में हुए किसी तरह के अपराध या गलती के प्रति पश्चाताप का भाव रखते हुए मनो मालिनी को दूर करने की भावना इस पर्व का प्रयोजन है।
Published on:
08 Sept 2021 09:50 pm
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