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स्वामी विवेकानंद के शब्दों से मिली प्रेरणा ने शिक्षक को पहुंचाया राष्ट्रपति पुरस्कार तक

रायसेन के शिक्षक को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार, प्रदेश के छह शिक्षकों की सूची में नीरज सक्सेना शामिल।

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स्वामी विवेकानंद के शब्दों से मिली प्रेरणा ने शिक्षक को पहुंचाया राष्ट्रपति पुरस्कार तक

स्वामी विवेकानंद के शब्दों से मिली प्रेरणा ने शिक्षक को पहुंचाया राष्ट्रपति पुरस्कार तक

रायसेन. एक आदिवासी गांव में जहां पहुंचने के लिए कई किमी पैदल चलना पड़े, वहां के प्राथमिक स्कूल में एक युवा को शिक्षक के रूप में पदस्थापना मिली। जब वह पहले दिन स्कूल पहुंचे, तो लगा कि उनके सपनों पर कुठाराघात हो गया। तभी उन्हे स्वामी विवेकानंद के कहे शब्द याद आए कि संघर्ष जितना बड़ा होगा, जीत भी उतनी ही बड़ी होगी। इन शब्दों को अपनी ताकत बनाकर उक्त स्कूल सहित पूरे गांव के लोगों की मनोदशा बदलने वाले शिक्षक नीरज सक्सेना का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है। सक्सेना की इस उपलब्धि ने स्वामी विवेकानंद के शब्दों को भी सार्थक कर दिया, साथ ही जिले का नाम रोशन किया है।
गुरुवार को नीरज सक्सेना को दिल्ली से सूचना मिली कि उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। पत्रिका से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि छह नवंबर 2009 कसे उन्होंने ग्राम सालेगढ़ के प्राथमिक स्कूल शिक्षक के रूप में ज्वाइन किया था। पहली बार जब स्कूल पहुंचा तो पैरों तले जमीन खिसक गई, चारों तरफ जंगल और सुनसान जगह जहां पहुंचने का कोई रास्ता नहीं। सकूल में महज 20 से 22 बच्चे, छोटे छोटे दो कमरे और स्कूल से लगी पथरीली बंजर जमीन देख कर मन कांप गया। स्कूल पहुंचने का एकमात्र साधन बैलगाड़ी या पैदल, वह भी 4 से 5 किलोमीटर। वहां जो शिक्षक पदस्थ थे वह भी ट्रांसफर करा कर चले गए थे। स्वामी विवेकानंद के कहे शब्द याद आए और संकल्प लेकर अपना काम शुरू किया। सबसे पहले लोगों के घर घर जाकर शिक्षा का महत्व बताया और अभिभावकों को स्कूल से जोड़ा। इसके बाद स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया। धीरे-धीरे अभिभावक एवं ग्रामीण शिक्षा, स्वच्छता एवं पर्यावरण के महत्व को समझने लगे। फिर सबने मिलकर स्कूल से लगी पथरीली बंजर भूमि पर तार फेंसिंग कर एक सुव्सुयवस्थित पार्क का निर्माण किया। जिसमें लगभग 1500 छोटे बड़े पेड़ लगाए। 200 पेड़ों पर शैक्षणिक बोर्ड लगाकर जिनपर विषय एवं मध्यप्रदेश की छोटी-बड़ी जानकारियां लिखीं। इससे बच्चे खेल खेल में दिन प्रतिदिन शिक्षण गतिविधि करने लगे और उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढऩे लगी। स्कूल के बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय एवं अनु जनजाति कन्या परिसर छात्रावास रायसेन में होने लगा। इन सब नवाचारों को देख कर भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने शासकीय प्राथमिक शाला सालेगढ़ एवं शिक्षक पर एक डॉक्यूमेेंंट्री फिल्म बनाई, जिसका प्रसारण 21 जुलाई 2020 को किया गया।
इनका कहना है
आदिवासी और सुदूर गांव में जाकर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ कई नवाचार करने वाले हमारे शिक्षक नीरज सक्सेना की उपलब्धि पर हम सभी गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जिले का नाम रोशन किया है। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
एमएल राठोरिया, जिला शिक्षा अधिकारी
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मैने अपना फर्ज और जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई है। सालेगढ़ के निवासियों और बच्चों ने मेरा पूरा सहयोग किया। शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छा के महत्व को समझा और अपनाया। जिसका परिणाम सुखद मिला है।
नीरज सक्सेना, शिक्षक सालेगढ़
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