
किसानो को उम्मीदों को लगे पंख
रायसेन. सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश की धान को जीआई टैग के मामले में प्रदेश सरकार के दावे पर फिर से विचार करने के लिए मद्रास हाइकोर्ट को निर्देश दिए हैं, इससे प्रदेश की बासमती धान को जीआई टैग मिलने की उम्मीद जाग गई है। इससे प्रदेश सहित जिले के किसानो की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। जिले में हर साल 4.5 लाख मेट्रिक टन धान का उत्पादन होता है, इसमें 90 फीसदी धान बासमती होती है। हजारों किसान धान की खेती करते हैं। चालू खरीफ सीजन में भी ढाई लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र धान लगाई गई है। वहीं दूसरी ओर एक जिला एक उत्पाद योजना में टमाटर के लिए शामिल किए गए रायसेन जिले में टमाटर की प्रसंस्करण यूनिट लगाने के लिए भी किसानो को तैयार किया जा रहा है। व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा बाड़ी क्षेत्र में धान के उत्पादन और विक्रय के लिए क्लस्टर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सब कुछ उम्मीदों के अनुरूप हुआ तो जिले के किसानो के लिए स्वर्णिम दिन दूर नहीं होंगे। लेकिन इसके लिए किसानो को अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर फोकस करना होगा। गुरुवार को बाड़ी में इस संबंध में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें व्यापार एवं उद्योग केंद्र के प्रबंधक केके रघुवंशी कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक स्वप्रिल दुबे, उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक एनएस तोमर सहित कई किसान शामिल हुए। किसानो को धान की प्रसंस्करण यूनिट लगाने के साथ गुणवत्ता बढ़ाने के बारे में जानकारियां दी गईं।
क्लस्टर से बढ़ेगा निवेश, आएंगे व्यापारी
व्यापार एवं उद्योग केंद्र प्रबंधक केके रघुवंशी ने बताय कि जल्द ही बासमती धान को जीआई टैग मिलेगा। इसका लाभ लेने के लिए हमने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाड़ी क्षेत्र में धान के क्लस्टर बनाने का काम शुरू किया गया है। फिलहाल जिले में चार कंपनियां धान की खरीदी कर निर्यात करती हैं। क्लस्टर बनाकर अन्य बड़े व्यापारियों, उद्योगपतियों को जोड़ा जाएगा। साथ ही जिले में ही धान की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रस्ताव बनाकर कलेक्टर के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजे जा रहे हैं। ताकि केंद्र से भी आर्थिक मदद मिल सके। गुरुवार की कार्यशाला के दौरान कुछ बड़े किसान प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए तैयार भी हो गए हैं।
ये करना होगा किसानो को
केके रघुवंशी ने बताया कि रायसेन जिले में सुगंधित धान का उत्पादन लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन होता है, जिसमें से केवल 1 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया जाता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि जिले के किसान बासमती धान में ट्राइसाइक्लाजोल, एसीफेट, विप्रोफेंजिन, इमिडाक्लोप्रिड आदि फफूंद व कीटनाशक अत्यधिक मात्रा में उपयोग करते हैं। निर्यात किए जाने वाली धान में इनका अधिकतम अवशेष स्तर पाया जा रहा है। इसलिए धान को रिजेक्ट कर दिया जाता है। यदि किसान सुरक्षित कीटनाशकों का उपयोग करें, तो उनकी उपज अधिक से अधिक मात्रा में निर्यात की जा सकने वाली गुणवत्ता की होगी। जिसका सीधा लाभ किसानो को ही मिलेगा।
उद्यानिकी विभाग के प्रयास धीमे
जिले के बाड़ी और बरेली क्षेत्र में धान के अलावा टमाटर की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है, जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में जिले के टमाटर को शामिल किया है। इस योजना में जिले में टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए किसानो, व्यापारियों को तैयार करना है। इसमें विभाग धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। अभी तक पांच यूनिट लगाने के लिए पांच किसानो के प्रकरण बैंक स्तर पर पहुंचे हैं। योजना में 40 प्रतिशत सबसिडी का प्रावधान है। टमाटर की खेती में उसकी किस्म एक बड़ा पहलु है। अभी जिले के किसान जो टमाटर पैदा कर रहे हैं, उसमें पल्प की मात्रा कम होती है, लिहाजा किसानो को अधिक पल्प और पतले छिलका वाली किस्म के टमाटर की खेती करने के लिए प्रेरित करना होगा।
इनका कहना है
- जिले में पैदा होने वाली बासमती धान की गुणवत्ता को लेकर किसानो को जागरुक किया जा रहा है, ताकि उनकी उपज निर्यात वाली श्रेणी की हो और किसानो को इसका अधिक से अधिक लाभ मिले। बाड़ी में हुई कार्यशाला में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी गई हैं।
स्वप्रिल दुबे, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र
- बाड़ी, बरेली और औबेदुल्लागंज के पांच किसानो के टमाटर प्रसंस्करण यूनिट के प्रकरण बैंक पहुंच गए हैं। दो यूनिट जल्द ही शुरू हो जाएंगी। किसानो को अधिक पल्प वाली किस्म के टमाटर की खेती करने का सुझाव दिया जा रहा है।
एनएस तोमर, उपसंचालक उद्यानिकी
- जिले की सुगंधित धान को अधिक से अधिक मात्रा में निर्यात के काबिल बनाने के साथ व्यापारियों, उद्योगपतियों को लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाड़ी क्षेत्र को धान का क्लस्टर बनाकर प्रासेसिंग यूनिट लगाने के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा रहे हैं। जल्द ही बासमती को जीआई टैग मिलने वाला, जिसे देखते हुए यह तैयारियां की जा रही हैं।
केके रघुवंशी, प्रबंधक व्यापार एवं उद्योग केंद्र मंडीदीप।
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Published on:
09 Sept 2021 09:28 pm
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