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नीरज ने ‘शिक्षक’ को गौरवान्वित किया

राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने पर पिता और मां ने कहा बेटे पर गर्व।

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नीरज ने 'शिक्षक' को गौरवान्वित किया

नीरज ने 'शिक्षक' को गौरवान्वित किया

रायसेन. नीरज ने अपने कर्म और शिक्षक धर्म का पालन कर शिक्षक शब्द को गौरवान्ति किया है। एक पिछड़े और छोटे से गांव में शिक्षा का उजियारा फैलाकर उसने अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया है, इसी का परिणाम है कि आज उसे शिक्षा का सर्वोच्च पुरस्कार मिला है। आज हमारा परिवार और जिला गर्वित है। यह बात शिक्षक नीरज सक्सेना के पिता अवधनारायण सक्सेना ने कही। अपने बेटे नीरज को राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने पर फूले नहीं समा रहे पिता और मां शीला देवी सहित बड़े भाई सूर्यप्रकाश सक्सेना खुशी से झूम उठे, जैसे ही दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नीरज का नाम पुरस्कार के लिए पुकारा गया। उनके घर भारत माता के जयकारों से गूंज गया। बच्चे तालियां बजाकर स्वागत कर रहे थे। पुरस्कार वितरण होते ही घर के बाहर आतिशबाजी शुरू हो गई। पूरे परिवार सहित आस-पड़ोस के लोग भी एकत्र हो गए और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाईयां दीं। नीरज के भाई शिक्षक सूर्यप्रकाश सक्सेना ने कहा कि यह पल जीवन भर की खुशी दे गया। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ी उपलब्धि और जीवन में इससे बड़ी खुशी और कुछ नहीं।
उल्लेखनीय है कि बाड़ी विकासखंड के ग्राम सालेगढ़ के प्राथमिक स्कूल शिक्षक नीरज सक्सेना ने 14 साल की अथक मेहनत और समर्पण से आदिवासी क्षेत्र के स्कूल को एक आदर्श स्कूल बनाया है। स्कूल के बच्चों सहित पूरे गांव को शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया है। यही कारण है कि सालेगढ़ के स्कूल का नाम आज पूरे देश में रोशन हो गया है। नीरज की इस उपलब्धि पर जिला शिक्षा विभाग भी गौरवान्वित हुआ है।
इनका कहना है
नीरज सक्सेना ने अपने शिक्षक होने को सार्थक किया है। उनकी इस उपलब्धि से जिले का नाम रोशन हुआ है। जिला शिक्षा विभाग का नाम पूरे देश में रोशन हुआ है। हम पूरे विभाग की ओर से उन्हे बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।
एमएल राठोरिया, डीइओ रायसेन
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अपने कार्य और जिम्मेदारियों के प्रति ईमानदार प्रयास और निष्ठा से ही ऐसी सफलता मिलती है। नीरज सक्सेना की उपलब्धि अनुकरणीय है। अन्य शिक्षकों को भी उनसे प्रेरणा लेना चाहिए। कठिन परिस्थतियों को अपने अनुकूल बनाना सीखना चाहिए।
अरविंद कुमार दुबे, कलेक्टर रायसेन
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