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अब पीओएस मशीन से चालान की वसूली करेगी पुलिस

मशीन के लिए स्टेट बैंक से हुआ अनुबंध, चार अन्य बैंकों से भी जल्द होगा अनुबंध।

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अब पीओएस मशीन से चालान की वसूली करेगी पुलिस

अब पीओएस मशीन से चालान की वसूली करेगी पुलिस

रायसेन. यातायात के नियमों को तोडऩे वाले वाहनों का चालान बनाने के लिए पुलिस कागज की रसीद काटती है। जिसकी एक कार्बन कॉपी अपने पास रखती है। यही कार्बन कॉपी पूरी चालानी कार्रवाई का ब्योरा होती है। जिसमें कई बार भूल चूक की संभावना भी बनी रहती है। साथ चालान जमा करने वाले वाहनो का ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं रहता जिससे कभी जरूरत पडऩे पर तत्काल उसकी जानकारी मिल सके। ऐसी कई विसंगतियां चालानी कार्रवाई में आती हैं, जिन्हे दूर करने और पूरी कार्रवाई को पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस ने चालानी कार्रवाई में तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। जो अब महानगरों से छोटे नगरों और कस्बों तक पहुंच रही है। हाल ही में पुलिस ने संभाग के चार जिलों में इस तकनीक के इस्तेमाल का निर्णय लिया है।
अब यातायात नियम को तोडऩे वाले वाहन का चालान पीओएस यानि प्वाइंट आफ सेल मशीन से बनाया जाएगा। संभाग के चार जिलों रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में इस योजना को लागू किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अनुबंध किया है। जो पुलिस को पीओएस मशीन उपलब्ध कराएगा। चार अन्य बैंकों से भी इसके लिए जल्द अनुबंध किए जाएंगे।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीटीआरआई जीजनार्दन ने बताया कि पुलिस और स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के बीच पीओएस मशीनें प्रदान करने के लिए गत दिवस एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। उन्होंने बताया कि इससे चालानी कार्यवाही में गति आएगी। एक सप्ताह में 4 अन्य बैंकों के साथ भी एमओयू साइन होंगे। जनार्दन ने बताया कि बैंकों को मशीनें प्रदान करने के लिए कार्य क्षेत्र आवंटित कर दिए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया को भोपाल संभाग के 4 जिलों के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नरेट और सागर संभाग के 6 जिले आवंटित किए हैं। यूजर फ्रेण्डली पीओएस मशीनों के उपयोग के लिए जिलों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पुलिस कर्मी चालान वसूली का कार्य बेहतर तरीके से कर सकेंगे। उल्लंघनकर्ताओं से वसूली भी त्वरित की जा सकेगी। बैंक के अधिकारी तथा तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा एनआइसी के साथ मिलकर जिला मुख्यालयों पर पीओएस मशीन संचालन संबंधी प्रशिक्षण दिए जाएंगे।
पुलिस को ये होगा फायदा
चालान काटने की इस नई तकनीक से पुलिस को कई फायदें होंगे। सबसे पहला तो काम की गति तेज होगी। इसके अलावा चालानी कार्रवाई में पूरी तरह से पारदर्शिता रहेगी। जिस वाहन का एक बार चालान बन जाएगा, दूसरी बार यदि वह वाहन नियम का उल्लंघन करते पकड़ा जाता है तो नंबर डालते ही उसका पुराना रिकॉर्ड निकल आएगा, ऐसे में नियमानुसार दूसरी बार नियम तोडऩे पर चालान की डबल राशि वसूल होगी। चोरी के वाहन आसानी से पकड़ में आएंगे। इस तरह पुलिस के पास वाहनो का एक डाटाबेस तैयार होगा, जो अन्य जांच पड़ताल में भी उपयोगी साबित होगा।
ेजिले को मिलेंगी 21 मशीने
जिले के 23 थानों में से एक महिला थाना और एक हरिजन कल्याण थाना को छोड़कर 21 थानो को यह मशीन मिलेगी। मशीन के संचालन और इसे ऑपरेट करने वाले हर थाने के एक-एक कर्मचार को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए एएसपी अमृत मीणा को नोडल बनाया गया है।
इनका कहना है
अब पीओएस मशीन से यातायात नियमों को तोडऩे वाले वाहनो का चालान बनाया जाएगा। जल्द ही जिले को 21 मशीने मिलेंगी। महनगरों में यह तकनीक लगभग दो साल पहले से उपयोग में लाई जा रही है।
अमृत मीणा, एएसपी रायसेन.
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