रायसेन। भोपाल से रायसेन
होते हुए सांची तक निर्माणाधीन सड़क का काम रूक जाने से जहां भोपाल और रायसेन के
बीच जर्जर सड़क परेशानी का कारण बन रही है।
वहीं रायसेन से सांची तक बनी
सड़क पर दो प्रमुख पुलों का निर्माण अटका हुआ है। रायसेन से दस किमी दूर कोड़ी
नाले पर पुल का निर्माण नहीं हुआ है, इसके अलावा पगAेश्वर में बेतवा नदी पर पुल का
निर्माण भी अटक गया हैं। हालांकि ठेकेदार ने रायसेन से सांची तक सड़क का निर्माण
काफी हद तक पूरा कर दिया था। लेकिन ये दो पुलों का निर्माण नहीं किया। आजादी के
पहले बने पग्नेश्वर पुल और कोड़ी पुलिया की हालत जर्जर हो चुकी है। साथ ही बहुत
नीचे हैं। जिससे हर साल बारिश में आए दिन इनके जलमग्न होने से इस रास्ते पर आवागमन
बंद रहता है।
तीन साल पहले सड़क का निर्माण शुरू होते ही लोगों ने इस परेशानी से
मुक्ति की उम्मीद लगाई थी, लेकिन एक के बाद एक साल बीतते जा रहे हैं और पुलों का
निर्माण टलता जा रहा है। इस साल भी इनके निर्माण की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही।
एनएचएआई की ढील क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई
है।
कई-कई दिन तक बंद रहता है मार्ग
बारिश के दिनों में कोड़ी और
पगAेश्वर पुल के जलमगA होने पर कई-कई दिनों तक रायसेन का सांची और विदिशा से संपर्क
कटा रहता है। इस मार्ग पर जिले के सैकड़ों गांवों का संपर्क मुख्यालय से कटा रहता
है। जबकि सांची विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
जिला मुख्यालय से कट जाता है
संपर्क
रायसेन तहसील का विकासखंड मुख्यालय सांची में है, जबकि इसके लगभग आधे
गांव इन पुलों के दूसरी ओर स्थित हैं। ऎसे में बारिश भर ब्लॉक के आधे गांवों का
संपर्क जिला मुख्यालय से तो आंधे गांवों का संपर्क ब्लॉक मुख्यालय से कटा रहता
है
जान जोखिम में
बारिश में पुलों के जलमगA होने पर लोग जान हथेली पर
लेकर पुल पार करते हैं। ऎसा करते हुए बीते सालों मे कईदुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
कईलोगों की इनमें जान जा चुकी हैं। बाबजूद इसके प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या
के निराकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं। सड़क के साथ पुलों का निर्माण नहीं होना
इसी लापरवाही का परिणाम है।
राहत में भी आफत
भारी बारिश के दौर में बेतवा
नदी जब उफान पर होती है, तब सांची के आस-पास कई गांवों मे पानी भर जाता है। इस
दौरान पगAेश्वर और कोड़ी पुल भी जलमगA हो जाते हैं, ऎसे में प्रभावित गांवों तक
राहत पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। दो साल पहले आई भीषण बाढ़ में ऎसी ही स्थिति
बनी थी। तब प्रशासन को सेना की मदद लेना पड़ा था, तब कहीं ग्रामीणों की जान बचा पाए
थे।
इनका कहना है
बारिश में दो पुलों के कारण तहसील का आधा हिस्सा
मुख्यालय से कटा रहता है।जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से इन पुलों का निर्माण
नहीं हो सका। जबकि सड़क के साथ पुल भी बनना चाहिए था।राजेंद्र बाबू राय, मंडी
उपाध्यक्ष
सांची और रायसेन के बीच दो पुल साल मे चार माह परेशानी का कारण
बनते हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा ठेकेदार पर इन पुलों के निर्माण के लिए उचित
दबाब नहीं बनाया गया। इस साल फिर हमारा क्षेत्र बारिश में मुख्यालय से
कटेगा।
जावेद उद्दीन, किसान नेता सलामतपुर
री-टेंडर की प्रक्रिया जारी
है
हाईवे के री-टेंडर की प्रक्रिया जारी है। टेंडर होने के बाद रायसेन से भोपाल
तक सड़क, बाइपास के साथ इन पुलों का निर्माण भी कराया जाएगा। जल्द ही इस पर काम
शुरू होने की संभावना है।सुनील जैन, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई