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रामकथा सुन झूम उठे श्रद्धालु, लगे जयकारे

कथा सुनाने की शैली से श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे

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Sanchet. Spectacular Shriram Katha is being organized in the court of Mother Cholale, located at Khandera, on the holy festival of Navaratri. On Tuesday, the legendary Pandit Ramkrishna Maharaj recited the number of devotees present in hundreds of devotees of Ram birth. In the style of narrating their stories, the devotees woke up with devotion.

सांचेत. नवरात्र के पावन पर्व पर खंडेरा स्थित मां छोले वाली के दरबार में श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को कथावाचक पंडित रामकृष्ण महाराज ने सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को राम जन्म की लीला सुनाई। उनके कथा सुनाने की शैली से श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। इस अवसर पर महाराज ने बताया कि भगवान श्रीराम का जन्म होते ही अध्योध्या नगरी में खुशी छा गई, चारों ओर बधाई गीत गूंज उठे थे।

कथा पांडाल में भी भगवान के जन्म पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए खुशियां मनाईं। पंडित राम कृष्ण महाराज ने कहा कि हर मनुष्य के जीवन में विनम्रता होना जरूरी है। जब आप बड़े हो जाते हैं या बड़े लोगों के साथ रहते हैं तो यह और जरूरी है। बड़ा बनना या ऊंचे पद पर पहुंचना आसान है, लेकिन वहां पर टिके रहना आसान नहीं है, इसके लिए तप चाहिए।

बड़े आप बने हो तो आपकी परीक्षा तो होगी। उन्होंने जीवन में मां की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पिता तो केवल एक अंश देता है, लेकिन मां की भूमिका तो बच्चे के व्यक्तित्व को स्वरूप देती है। मां का स्वभाव उसके संस्कार बच्चे में सबसे ज्यादा आते हैं। नारी का परिचय धैर्य, समर्पण, ममता, वात्सल्य, शील, वीरता, मर्यादा व दोनों कुलों का सम्मान बनाए रखना है। यह जीवन में सफल होने का मंत्र है।

महामाई के दरबार में चल रहा शतचंडी महायज्ञ
बाड़ी. विंध्याचल की प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वत पर माता महामाई का दरबार लगा है। इस पावन धाम पर चैत्र नवरात्रि में देवी भक्ति के साथ ही शतचंडी महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। यहां स्थित सिद्ध संत की समाधि पर लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। पूर्ण होने की अरदास करते हैं।

एक किवदंती के अनुसार लगभग दो हजार वर्ष पूर्व इस घनघोर जंगल में सिद्ध संत ने मानव कल्याण के लिए शक्तिस्वरूपा राज राजेश्वरी की उपासना करने इस मनोरम स्थान को चुना और मां की भक्ति में लीन रहने लगे। पहाड़ी रास्ते से गुजरने वाले लोगों को कई चमत्कारिक अहसासों के चलते इस स्थान को सिद्ध धाम से जाने जाने लगा। पांच दशक पूर्व बाड़ी से भोपाल जाने के मार्ग बारना बांध बनने से परिवर्तित हो गया और मां विंध्यवासनी के सामने से नेशनल हाईवे 12 बना।

सिरबारा ग्राम मां की गोद में बस गया, यह अधिकांश आदिवासियों की बस्ती है। ग्राम सिरबारा के बुजुर्ग कमल आदिवासी ने बताया कि यहां पूर्व से ही मंदिर है, जिसे खेड़ापति नाम से जाना जाता था, अब यह अब यह मंदिर भव्य रूप ले चुका है।
लगता है मेला : चैत्र और शारदीय नवारत्र में यहां मेला लगता है। यहां शतचंड़ी यज्ञ कन्या भोज के साथ ही सामूहिक भंडारा प्रतिदिन चल रहा है। यज्ञाचार्य माखनलाल गाजीखेड़ी, आचार्य अभिषेक महाराज काशी, आचार्य राधे राधे महाराज के सानिध्य में यज्ञ किया जा रहा है।