
टीबी बीमारी से लड़ने के लिए अब इस सिस्टम को बनाया जाएगा हथियार
रायसेन. अक्सर टीबी के मरीज घबराहट के कारण दवाई लेना कम कर देते हैं।अथवा वहदवाई टीबी के मरीज नियमित नहीं लेते।लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नही होगा।क्योंकि सर्वे कराए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के मरीजों को दी जाने वाली डॉट्स थैरेपी में बदलाव किया है।
अब तपेदिक के मरीजों को देने के लिए कम डोज वाली दवाई आ गई है। इसे मरीजों को रोजाना लेना होगा। जबकि अभी तक जो दवाई उपलब्ध थी उसे हर तीसरे दिन लेना पड़ती थी। नई दवाई खाने से अब घराहट नहीं होगी।
जिला अस्पताल के टीबी जांच सेंटर की जिला कार्यक्रम समंवयक डॉ.आरती गंगवार से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल जिले में 550 टीबी के मरीजों का इलाज चल रहा है। २६ एमडीआर मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंस कैटेगरी।इन मरीजों को हर तीसरे दिन डॉट्स के माध्यम से 7 गोलियां खिलानी पड़ती थीें। 1 एचबीआर कैटेगरी का मरीज है और बाकी ५१३ डेली तपेदिक बीमारी से पीडि़त हैं।
इन मरीजों का इलाज 6 से 8 महीने तक नियमित ट्रीटमेंट दिया जाता है।लेकिन टीबी की बीमारी से निपटने के लिए अब नई दवा आ गई है। अब जो दवाई आई है उसकी २ गोली रोज लेना होगी । इसमें पुरानी दवाई से कम डेाज रहता है। नई टेबलेट खाने से टीबी के मरीजों को अब घबराहट,उल्टी व जी मचलाने वाली जैसी समस्या नहीं रहेगी।
एमडीआर की जांच सुविधा अब रायसेन में भी
टीबी की घातक स्टेज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंस की जांच पहले बड़े शहर इंदौर,भोपाल में ही हुआ करती थी । लेकिन अब इसकी सुविधा टीबी जांच केंद्र रायसेन में भी शुुरु हो गई है। पिछले दिनों जिला मुख्यालय आए सेंट्रल डिवीजन की टीबी हेल्थ डिपार्टमेंट से आए डॉ.श्री निवासन,राज्य क्षय अधिकारी डॉ.अतुल खराटे, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.पीएस ठाकुर ,जिला कार्यक्रम समंवयक डॉ.आरती गंगवार आरएनडीपी कंसल्टेंट संदीप मिश्रा,कृष्णमूर्ति चेन्नई की मौजूदगी में डॉट्स थैरेपी की नई दवा की जानकारी मीडिया कर्मियों को दी ।
टीबी की घातक स्टेज मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंस की जांच अब टीबी जांच सेंटर रायसेन में सबी नॉट मशीन से जांच की जाएगी। वर्तमान में जिले के २६ मरीजों की नियमित जांच कर कर उसके मान से दवाई दी जा रही है। नई डॉट्स थैरेपी की गाइड लाइन पर अमल शुरु हो गया है। इस टीबीकी टीम ने रायसेन, रीवा जिले के टीबी जांच केंद्रों का निरीक्षणकर टीबीके मरीजों को दवाई देने के तौर तरीकों से अवगत हुए ।
आ चुका है नई दवा का स्टॉक ....
विभागीय स्तर पर लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। किस रोग में दवाओं के सेवन से कैसी तकलीफ आती है ।इसका बाकायदा सर्वे भी होता है। इसके आधार पर ही थैरेपी में बदलाव हुआ है। नई दवा का स्टॉक आ चुका है।मरीजों को दवा का डोज देना भी शुरु करवा दिया गया है। पीएस ठाकुर ,जिला क्षय रोग अधिकारी रायसेन।
Published on:
23 Jul 2018 01:24 pm
बड़ी खबरें
View Allरायसेन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
