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जीवन में भटकाव आए तो संतों की आवश्यकता होती है

राजा परीक्षित ने यह जान कर उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया

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जीवन में भटकाव आए तो संतों की आवश्यकता होती है

जीवन में भटकाव आए तो संतों की आवश्यकता होती है

बाड़ी. ग्राम सिरवारा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पं. प्रदीप कृष्ण राधे-राधे महाराज ने बताया कि राजा परिक्षित को श्राप लगा कि सातवें दिन तुम्हारी मृत्यु सर्प के डंसने से हो जाएगी। जिस व्यक्ति को यहां पता चल जाए कि उसकी मृत्यु सातवें दिन हो वो क्या करेगा क्या सोचेगा। राजा परीक्षित ने यह जान कर उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया। राजा परीक्षित ने अपना सर्वस्व त्याग कर अपनी मुक्ति का मार्ग खोजने निकल पड़े गंगा तट पर। गंगा के तट पर पहुंचकर जितने भी संत महात्मा थे सबसे पूछा कि जिस की मृत्यु सातवें दिन है, उस जीव को क्या करना चाहिए। किसी ने कहा गंगा स्नान करो, किसी ने कहा गंगा के तट पर आ गए हो इससे अच्छा क्या होगा। हर संत अलग-अलग उपाय बता रहा है। तभी वहां भगवान शुकदेव जी महाराज पधारे और जब राजा परीक्षित भगवान शुकदेव जी महाराज के सामने पहुंचे तो उनको राजा ने शाष्टांग प्रणाम किया। शाष्टांग प्रणाम करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

शुकदेव जी महाराज जो सबसे बड़े बैरागी है चूड़ामणि है उनसे राजा परीक्षित जी ने प्रश्न किया कि हे गुरुदेव जो व्यक्ति सातवें दिन मरने वाला हो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए। किसका स्मरण करना चाहिए और किसका परित्याग करना चाहिए, कृपा कर मुझे बताइए। अब शुकदेव जी ने मुस्कुराते हुए परीक्षित से कहा की हे राजन ये प्रश्न केवल आपके कल्याण का ही नहीं अपितु संसार के कल्याण का प्रश्न है। तो राजन जिस व्यक्ति की मृत्यु सातवें दिन है उसको श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए तो उसका कल्याण निश्चित है। श्रीमद् भागवत में 18000 श्लोक, 12 स्कन्द और 335 अध्याय है जो जीव सात दिन में सम्पूर्ण भागवत का श्रवण करेगा वो अवश्य ही मनोवांछित फ ल की प्राप्ति करता है।

भागवत सुनने से होता है कल्याण
राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से प्रार्थना की हे गुरुवर आप ही मुझे श्रीमद् भागवत का ज्ञान प्रदान करे और मेरे कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। भागवत सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भागवत में कहा है जो भगवान को प्रिय हो वही करो, हमेशा भगवान से मिलने का उद्देश्य बना लो, जो प्रभु का मार्ग हो उसे अपना लो। इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है। भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। राजा परीक्षित के कारण ही भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा सुनाई जाएगी।