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सिद्धचक्र महामंडल विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन

कार्यक्रम में विवोध सागर महाराज सहित समाजजन मौजूद रहे

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कार्यक्रम में विवोध सागर महाराज सहित समाजजन मौजूद रहे

सिद्धचक्र महामंडल विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन

सिलवानी. विश्व के सभी देशों में शांति और सद्भाव कायम रहे, अराजकता ना फैले। सौहार्द बना रहे इसके लिए विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को भी सिलवानी नगर में भी अखंड दिगंबर जैन समाज ने विश्व शांति महायज्ञ किया। यह महायज्ञ शांति की कामना में सहायक होगा। यह बात विलोक सागर महाराज ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान की अंतिम कड़ी में पाश्र्वनाथ जिनालय में आयोजित विश्व शांति महायज्ञ के समापन पर कही। कार्यक्रम में विवोध सागर महाराज सहित समाजजन मौजूद रहे। सिद्ध चक्र महामंडल विधान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस दौरान अनुष्ठान के माध्यम से जो भी पुण्य प्राप्त किया है। उस पुण्य में बढ़ोत्री करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में अपनी सहभागिता निरंतर दर्ज कराते रहें। विधान के समापन अवसर पर पाश्र्वनाथ जिनालय से नगर में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। वहीं शोभा यात्रा में चांदी जडि़़त 3 विमान में श्रीजी की प्रतिमा को विराजमान किया गया था। समाजजनों ने श्रीजी की प्रतिमा की आरती उतारी।

सात रथों में विधान के पात्र सौधर्म इंद्र, कुबेर, महायज्ञ नायक, इशान इंद्र, सनत इंद्र, श्रीपाल मैना सुंदरी, भरत चक्रवर्ती, यज्ञ नायक, बाहुवली, ध्वजारोहणकर्ता सहित समस्त पात्र सवार हुए व नगर भ्रमण किया। शोभायात्रा में महिलाए विभिन्न रंगों के परिधान पहने शामिल हुईं जो कि आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा में शामिल हुई बालिकाएं आकर्षक डांडिया कर कार्यक्रम को चार चांद लगा रही थीं।

निकला चल समारोह
बेगमगंज. नगर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर समता सागर, महासागर, निष्कंप सागर और ऐलक निश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में चल समारोह निकाला गया। इस अवसर पर उन्होंने बेगमगंज वालों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों, कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद दिया। उन्होंने भगवान के विहार को साक्षात समवशरण की उपमा देते हुए कहा कि जिन लोगों ने भगवान की इस शोभायात्रा में सहयोग दिया और बिहार कराया, उनको किसी न किसी भव में साक्षात भगवान के समवशरण में जाने का और बैठने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो समय के कदम से कदम मिलाकर चलता है वह समयसार को उपलब्ध हो जाता है।