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विंध्याचल की गुफा में विराजे महादेव

गुफा के बीच स्थित है प्राकृतिक शिवलिगं, वर्षभर अविरल जल धारा पहाड़ी से बूंद-बंूद गिरती रहती है।

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विंध्याचल की गुफा में विराजे महादेव

रायसेन/बरेली. नगर से करीब २० किमी दूर जामगढ़ के समीप विन्ध्याचल की पहाडी पर स्थित प्राकृतिक शिव गुफा का अलग ही महत्व है। यहां स्थानीय एवं दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं और त्रिलोकीनाथ के दर्शन पूजन अभिषेक कर अपने आप को धन्य करते हैं। विंध्याचल पर्वत माला के बीचों-बीच भावी को मेटने में समर्थ त्रिपुरारी विराजते हैं।

यहां का इतिहास उतना ही पुराना है जितना विंध्याचल पर्वत माला का इस पर्वत के ठीक मध्य में गुफा है यहां औगढ़दानी प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। बारिश में हरे भरे वृक्ष और झरने की कल कल ध्वनियां यहां का सौन्दर्य बढाती है। बारिश के दिनों में यह पर्वत माला अनेक छोटे झरनों के कारण धूदिया पहाडी का रूप धारण कर लेती है और एक बडा झरना वर्षा काल में जल प्रपात के रूप में सौन्दर्य को बढाता है।

गुफा के बीच है शिवलिगं
गुफा के बीच में जहां प्राकतिक शिवलिंग है, वहीं भीतर एक प्राकृतिक बावडी मौजूद है। इस रहस्यमयी बाबड़ी में पानी तक लेटकर जाना पडता है। प्राकृतिक क्षरण जैसे कारणों से बावड़ी तक पहुंचना अवश्य कठिन होता जा रहा है। किन्तु यहां सदैव जल भरा रहता है जो तीर्थों के जल जैसा पवित्र माना जाता है। अनुमान है कि गुफा पहाड़ी के काफी अंदर तक है। शिवालय के ठीक बगल से एक संकीर्ण गुफा मौजूद है जो प्राकृतिक क्षरण व भूकंपीय हलचलों के चलते संकीर्ण हो गई है। गुफा में अंदर लंबा चौडा मैदान है। ऐसी किवदंती है कि यहां कई संत आराधनारत एक समाधिस्य हैं।

जलकुण्ड के नजदीक वर्षभर अविरल जल धारा पहाड़ी से बूंद-बंूद गिरती रहती है। भीषण गर्मी में पहाड़ की वनस्पति सूख जाती है। लेकिन यहां यह रहस्यमी जल धारा बूंद-बंूद टपकती रहती है। इस अमृत जल का पान मधु मक्खियां अपनी प्यास बुझाने में करती हैं। शिवलिंग की परिक्रमा हेतू प्राकृतिक परिक्रमा मार्ग है। जहां लेटकर दर्शनार्थी परिक्रमा करते हैं। यहां की परिक ्रमा के बाद अलोकिक शन्ति की अनुभूति होती है।