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अब भी खाते में बीमा राशि आने का इंतजार, भटक रहे किसान

छलावा साबित हो रही फसल बीमा योजना

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Ram kailash napit

Dec 26, 2016

raisen

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रायसेन.
जिला मुख्यालय पर दस दिसंबर को भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को वर्ष 2015 में बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल की बीमा राशि के प्रमाण-पत्र रस्म अदायगी के तौर मंत्री के हाथों बंटवा दिए गए। कार्यक्रम में मंच से ही घोषणा कर बाकी किसानों को उनके खातों में बीमा राशि आने की बात कही गई। उसी दिन के बाद से निरंतर किसान बैंक और सोसाइटियों के चक्कर काटने में लगे हुए हैं, लेकिन कई किसानों के खातों में बीमा राशि नहीं पहुंची है। किसान बैंकों के बाहर लगी सूची मे भी अपना नाम और राशि तलाश रहे हैं, लेकिन कहीं पर भी उन्हें अपना नाम नजर नहीं आ रहा है। उमरावगंज सेवा सहकारी संस्था के सैकड़ों किसान राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा के लिए भटक रहे हैं। बीमा की आस में भटक रहे किसानों ने आरोप लगाए हैं कि राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना उनके लिए महज छलावा साबित हो रही है।


मुआवजा मिला, बीमा नहीं

पैमद सोसाइटी के किसानों को भी बीमा की राशि नहीं मिली है, जबकि पटवारी सर्वे के अनुसार किसानों को बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल का मुआवजा मिला था, लेकिन अब बीमा राशि नहीं दी जा रही है। बीमा कंपनी और जिला सहकारी बैंक द्वारा बताया जा रहा है कि पैमद सोसाइटी के अधिकतर रकबे में धान की फसल लगाई गई थी। इस कारण बीमा क्लेम की राशि नहीं दी जा सकती है।


ये है किसानों का दर्द

किसान घनश्याम मालवीय विजय सिंह मीणा, आशाराम लोधी, रमेश चंद्र, अर्जुन सिंह, ओमप्रकाश गौर प्रभुलाल गौर ने कलेक्टर लोकेश जाटव से उमरावगंज सोसायटी के फसल बीमा क्लेम राशि दिलाने का अनुरोध किया है। मालूम हो कि किसान हर साल लाखों रुपए की बीमा प्रीमियम जमा करवाते हैं, लेकिन फसल बीमा राशि के लिए उनसे सोसायटी उमरावगंज के चक्कर लगवा रहे हैं। समिति प्रबंधक संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। परेशान किसानों का कहना है कि हमने तुअर, तिल्ली मूंगफली, सोयाबीन आदि की फसलों की बुआई के अलावा धान की उपज भी खेतों में बोई थी।


अन्नदाताओं ने अधिकांश रकबे में धान फसल बोई थी। इसलिए बीमा क्लेम मिलने की संभावना कम नजर आ रही हैं। सरकार की सोच यह भी है कि जब किसानों ने सोयाबीन समेत अन्य फसलों की बुआई नहीं हुई तो बीमा क्लेम फिर कैसे वितरित होगा।

माधो सिंह लौवंशी, सहायक प्रबंधक उमरावगंज।