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ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना बेअसर

2021 में एक करोड़ रुपए के ऊपर खर्च करने के बाद भी 11 गांवों में नल-जल योजना फेल हैं

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2021 में एक करोड़ रुपए के ऊपर खर्च करने के बाद भी 11 गांवों में नल-जल योजना फेल हैं

ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना बेअसर

बाड़ी. पीएचई विभाग की जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजनाएं कागजों में पूरी हो रही हैं, परन्तु धरातल पर पूरी तरह फेल हैं। सरकार की मंशा के अनुरूप हर अंतिम छोर के व्यक्ति को नल से जल मिले इसी मंशा से पीएचई विभाग को यह काम सौंपा गया है। 2021 में एक करोड़ रुपए के ऊपर खर्च करने के बाद भी 11 गांवों में नल-जल योजना फेल हैं। अधिकारी अपने केबिन में बैठकर कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि एक भी नल-जल योजना सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रही है। बाड़ी ब्लॉक में 11 गांवों खुर पाटनी, कासिया पाटनी, चन्द्रपुरा, डुंगरिया, महका, खेरी प्रतापगढ़, छेना कछार, घोटी, पांजरा आदि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद ग्रामीणों को घर-घर पानी पहुंचाने पाइपलाइन बिछाने का काम तो किया गया है, मगर इन नलों में पानी नहीं आता। कहीं कहीं तो टेस्टिंग में ही पाइपलाइन उखड़ गई या फूट गई।

लोगों का कहना है पाइपलाइन भी बिछाई और टंकी भी पांच-पांच हजार लीटर की दो बनाई परंतु पानी आज तक नहीं आया। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह हैंडपंप लगाए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को पानी मिल सके, लेकिन खेत में मूंग फसल लगने से वाटर लेवल नीचे चला गया, जिससे हैंडपंपों से पानी आना बंद हो गया, जिसके कारण ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
ग्रामीणों ने खुद किया काम शुरू
कासिया में हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया, गांव वालों के सामने जल का संकट छाया तो नल-जल योजना में बिछाई गई पाइपलाइन को खुद ही सुधार रहे हैं। फूल सिंह, राकेश विश्वकर्मा, प्रदीप विश्वकर्मा, हरि शंकर, सुंदर पाल आदि ने टीम बनाकर कार्य शुरू कर दिया है।

क्या है नियम
विभाग जिस ठेकेदार से कार्य करवाता है, उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह काम पूरा होने बाद विभाग के अधिकारियों को सारी चीज़ें चैक करवाने के बाद विभाग के हैंडओवर करे। उसके बाद विभाग ग्राम पंचायत सचिव एवं ग्रामीणों के साथ एक समिति गठित करते हैं और वहीं समिति इसका संचालन एवं रखरखाव करती हैं।
-मेरे संज्ञान में नहीं था कि पानी सप्लाई नहीं हो रहा है, मैं आज ही ठेकेदार से बोलता हूं कि पानी कि सप्लाई जल्दी ही चालू की जाए।
-नितिन राठौर, एसडीओ पीएचई मैकेनिकल रायसेन