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भगवान से मिलने का समय है ब्रह्म मुहूर्त: शास्त्री

प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर, भगवान का पूजन करें

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भगवान से मिलने का समय है ब्रह्म मुहूर्त: शास्त्री

भगवान से मिलने का समय है ब्रह्म मुहूर्त: शास्त्री

सुल्तानगंज. कस्बे से छह किलोमीटर सुनवाहा रोड स्थित रहमा गांव में श्रीमद्भागवत कथा आयोजन कराया जा रहा है। चतुर्थ दिवस की कथा में कथावाचक पं. रविकांत शास्त्री ने कहा कि ईश्वर से मिलने का मुहूर्त है ब्रह्म मुहूर्त। जिस प्रकार कहीं जाने का मुहूर्त होता है, आवास बनाने का मुहूर्त, कुआं खुदवाने का मुहूर्त होता है। दुकान खोलने एवं विवाह मुहूर्त, मुंडन कराने का मुहूर्त होता है। यहां तक की कथा कराने का भी मुहूर्त होता है। भगवान की स्थापना कराने का मुहूर्त होता है, उसी प्रकार भगवान से मिलने का मुहूर्त है ब्रह्म मुहूर्त। प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर, भगवान का पूजन करें। उसके बाद अपने गृह कार्य में लगें। कार्यक्रम का आयोजन बंशी सिंह पिता रामचरण सिंह बेरीवाले द्वारा कराया जा रहा है। इस अवसर पर ग्राम के श्रद्धालु सहित समस्त बेरीवाले राजपूत परिवार उपस्थित रहा। महाराज श्री ने कहा कि कलयुग अपने कर्मों का युग है।

आप जैसा कर्म करेंगे, भगवान आपको वैसा ही फ ल प्रदान करेंगे। जब सतयुग था तो ऋषि-मुनि हजारों लाखों वर्ष तपस्या करते थे। त्रेता में भी बहुत यज्ञ किए, द्वापर आया द्वापर में भी बहुत राजा महराज हुए, तपस्या की, यज्ञ किए जाते रहे। अब कलयुग आया कलयुग के बारे में बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज रामचरितमानस में लिखते हैं कि कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरे पारा। कलयुग में भगवान का नाम ही यज्ञ, भगवान का नाम ही तपस्या है, भगवान का नाम ही सब कुछ है। हमें ईश्वर को नहीं भूलना चाहिए ईश्वर का भजन पूजन करते चाहिए। दान धर्म करते रहो, भगवान के प्रति हमारी आस्था और भगवान के चरणों में प्रेम होना चाहिए।

कंस का अत्याचार बढ़ा तो भगवान अवतरित हुए
नरवर. कस्बा सांचेत स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में अधिक मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को कथावाचक पंडित संतोष उपाध्याय द्वारा श्रीकृष्ण जन्म का विस्तार से वर्णन किया।
श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। पंडित संतोष उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार करने व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, अत्याचार, व्याभिचारी लोगों की संख्या बढ़ती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं और अधर्मी लोगों का नाश कर पृथ्वी और समाज में धर्म की स्थापना करते हैं। पं. उपाध्याय ने भगवान के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत संजीदगी के साथ सुनाया।

बंधन टूट गए थे
कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान श्रीकृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उन्हें अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वंय ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा का संगीतमयी वर्णन सुनकर श्रद्धालु झूमने लगे। नंद घर आनंद भयो, जय हो नंद लाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जयघोष श्रद्धालुओं ने लगाए।