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छोटे किसानों के लिए महंगी साबित हो रही धान की रोपाई

मजदूरी 4 हजार रुपए एकड़, टैक्टर का किराया 1400 रुपए प्रति घंटा।

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छोटे किसानों के लिए महंगी साबित हो रही धान की रोपाई

छोटे किसानों के लिए महंगी साबित हो रही धान की रोपाई

थालादिघावन. जिले में इन दिनों धान की रोपाई का कार्य जोर शोर से चल रहा है। हर गांव में किसान अपने खेतों में धान की रोपाई में जुटे हुए हैं। लेकिन इसके बीच खेतों की मिट्टी को मचाने के लिए चलने वाले ट्रेक्टर का किराया सहित मजदूरी में हुई बढ़ोत्तरी किसानों के गले की फांस बनी हुई है। धान की रोपाई कर रहे किसानों को अनाप शनाप मजदूरी और किराया चुकाना पड़ रहा है। जिसके कारण उनके छोटे छोटे रकबों में धान की रोपाई की लागत बढ़ रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षो में जिले में बारिश के सीजन में धान की रोपाई की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। जिसके कारण जिले में धान का रकबा भी बढ़ा है। बारिश होने के कारण खेत भी पानी से लबालब हो गए हैं। जिससे उपयुक्त अवसर देख किसान जोर शोर से धान की रोपाई में जुट गए हैं। जिले भर में एक साथ चल रहे धान की रोपाई के चलते अचानक से ट्रेक्टर के किराए और धान की रोपाई की मजदूरी बढ़ गई है। इस फसल को छोटे बड़े किसान अपने खेतों में लगाते हैं। जिनमें से लघु और सीमांत किसान इसकी एक से दो एकड़ या कई जगहों पर आधा एकड़ जगह में भी बुआई करते हैं। लेकिन इस साल मजदूरी और किराए की दरों में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। जिसके कारण छोटे किसानों की लागत भी बढ़ रही है।
मजदूरी से बढ़ी लागत
बीते वर्षो में फसल की धान की रोपाई दर लगभग दो से ढाई हजार रुपए प्रति एकड़ थी। लेकिन मौजूदा समय में यह चार हजार रुपए प्रति एकड़ तक लग रही है। वही दैनिक मजूदरी भी बढकऱ ढाई सौ से तीन सौ और साढ़े तीन सौ रुपए तक पहुंच गई है। इसी प्रकार ट्रेक्टर किराया जहां बीते साल 8 सौ रुपए से एक हजार रुपए प्रति घंटे था वहीं इस साल यह किराया बढकऱ 12 सौ से 14 सौ रुपए प्रति घंटे तक पहुंच गया है।
धान की खेती में मजदूरों की सबसे ज्यादा जरूरत
ज्ञात हो कि धान की रोपाई के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है। क्योंकि रकबा छोटा या बड़ा रोपाई के लिए मजदूर को खेत में एक एक पौधा रोपना पड़ता है। थालादिघावन के किसान संदीप सोमिया, जगदीश लोधी बताते हैं कि बढ़ी हुई मजदूरी के चलते वे खुद ही अपने परिवार के साथ मिलकर धान की रोपाई की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हे ट्रेक्टर का किराया का इंतजाम तो करना ही पड़ेगा।
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