
समस्याओं से घिरे मतदाता उठा रहे अपनी आवाज
थालादिघावन. त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों की तारीख जैसे ही नजदीक आती जा रही है, वैसे ही प्रत्याशियों की धड़कने तेज होती जा रही हैं। चुनाव नजदीक आते ही सभी प्रत्याशी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र की ग्राम पंचायतें थाला दिघावन, पतई, रिछावर, कैकड़ा आदि में जनता विकास को तरस रही है। ग्रामीणों को अब ऐसे सरपंच की उम्मीद है, जो कर्मचारियों पर नकेल कर सके और लोगों के समय पर कार्य करा सके। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय तो वादे करते हैं और फिर सब भूल जाते हैं। ग्राम पंचायत की हालत है यह है कि ग्रामीण पूर तरह शहर पर निर्भर हैं। थालादिघावन के उप स्वास्थ्य केंद्र पर तारा लटका रहता है।
केंद्र पर उपस्थित रहने वाली सीएओ बाहर से ताला डालकर अंदर बैठी रहती हैं। स्कूलों में शिक्षक समय पर नहीं आते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पात्र हितग्राही को समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। कुटीर निर्माण, राशन कार्ड, गांव की गलियों में सीसी सड़क का निर्माण, साफ सफाई जैसे काम ग्रामीणों की प्राथमिकता में हैं।
वोट मांगने वालों के सामने रख रहे ये समस्याएं
- स्कूलों के शिक्षक अपनी मनमर्जी से आते हैं कोई समय निर्धारित नहीं है।
- ग्राम पंचायत कार्यालय सप्ताह में एक दिन ही खुलता है।
- पाइप लाइन बिछाने का काम अधूरा पड़ा है।
- सड़क खुदी होने से मोहल्ला वासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- गांव के मुख्य मार्ग पर पुलिया के पास गहरीकरण न होने से घरों में पानी भरा जाता है।
- गांव की सड़कों पर नाली निर्माण अधूरा पड़ा है।
- घटिया सामग्री का उपयोग होने से बिजली लाइन बंद पड़ी है।
सड़क की पांच साल से नहीं हुई मरम्मत
रायसेन. रायसेन से विदिशा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हुए लगभग 15 साल पहले सड़क का निर्माण किया गया था।
कोड़ी मेहगांव होते हुए विदिशा पहुंचने वाली इस सड़क के निर्माण के बाद एक बार ही मरम्मत की गई। लगभग पांच साल से सड़क बदहाल स्थिति में है। सड़क पर एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनके चलते बारिश में वाहनों का आवागमन बंद हो जाता है। मजबूरी में लोगों को सांची होकर विदिशा आना-जाना पड़ता है। यहां तक कि ग्रामीण इस सड़क से पैदल भी नहीं चल पाते हैं। सालों से लोग सड़क मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा बारिश भर लगभग 30 गांव के लोगों को भुगतना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि हर साल बारिश में यह मार्ग आवागमन के लिए लगभग बंद हो जाता है, यहां यात्री बसों के बारिश भर नहीं निकलने से उन्हे पैदल ही कई किमी का सफर तय कर हाइवे पर आना पड़ता है।
Published on:
22 Jun 2022 11:52 pm
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