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CBI के रडार पर केनरा बैंक के कई अधिकारी, ये है कारण

- बैंक में 16 करोड़ के घोटाला का मामला- दलालों के माध्यम से दिए लोन पर सीबीआइ ने दर्ज की एफआइआर

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राजगढ़। बैंकों से जुड़े घोटाले एक-एक करके लगातार मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में देखने को मिल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला यहां के केनरा बैंक से आया है, जिसके बाद से इस बैंक के कई अधिकारी एजेंसियों के रडार में आने के चलते जांच के घेरे में आ गए हैं। यहां तक की इस मामले में अब सीबीआई को तक कार्यवाही के लिए सामने आना पड़ा है।

दरअसल राजगढ़ में गोल्ड लोन के बाद अब केसीसी लोन घोटाला सामने आया है। जिसमें दलालों के माध्यम से दिए जाने वाले इस लोन की रिकवरी और दस्तावेजों को लेकर सीबीआई ने एफआइआर दर्ज की है। यह घोटाला साल 2017 से 2020 के बीच का बताया जाता है।

कमीशन अपने खाते में

जिसमें केनरा बैंक में मैनेजर रहे रामू लोधी निवासी पन्ना और अरमेन्द्र सिंह निवासी दिल्ली दोनों ने ही राजगढ़ के बांकपुरा निवासी बंकट सेन और करेड़ी के हिम्मत सिंह सहित बालाजी हार्डवेयर के संचालक के साथ मिलकर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। सामने आ रही जानकारी के अनुसार यह दलाल बैंक मैनेजर से मिलकर किसानों की केसीसी कराते थे और भारी मात्रा में उन्हें ऋण देते हुए कमीशन अपने खाते में डलवा लेते थे, जिसके बाद में यहां से निकालकर बैंक मैनेजर को उपलब्ध करा देते थे।

यह भी मामला
बताया जाता है कि इसमें कई ऐसे लोन के मामले भी हैं, जिनमें सब्सिडी दी जाती है। ऐसे प्रकरण स्वीकृत करते हुए पहले ऋण उपलब्ध करा देना और समय सीमा से पहले लोन वापस देना। जिससे बढ़ा हुआ ब्याज न लगे और बाद में सब्सिडी को मिल बांट लेते थे।

सीबीआई तक पहुंची शिकायत के बाद जब पूरे मामले की जांच की गई तो सारा मामला उभरकर सामने आ गया और इस तरह पूरी जांच के बाद तत्कालीन तो बैंक मैनेजर और दलालों के खिलाफ सीबीआई ने एफआइआर दर्ज की है।

घोटाले में स्कूल शिक्षक भी लिप्त
राजगढ़ के बांकपुरा स्कूल टीचर विनोद गुप्ता के खातों से भी पैसे ट्रांसफर किए गए। विनोद गुप्ता ने खुद बताया कि ईकेवाईसी के पेपर उसके द्वारा एकत्रित किए गए। जिनका उपयोग सब्सिडी लेने में किया गया। इधर, अरमेंद्र ने अपने कार्यकाल में 2.60 करोड़ रुपए के 25 पीएमईजीपी लोन भी स्वीकृत किए, जिसमें भी भारी धांधली की गई।

बालाजी हार्डवेयर संचालक
करेड़ी के मेसर्स बालाजी हार्डवेयर के फर्जी बिल वाउचर लगाए गए हैं और मौके पर इस तरह के कोई वेंडर ही नहीं मिले। बंकट सेन और हिम्मत सिंह के खातों में मेसर्स जायसवाल कृषि सेवा केंद्र के जगदीश गुप्ता (पीएमईजीपी वेंडर) के खातों से पैसा भी लेनदेन किया गया, जिसकी जांच की जा रही है।

10 प्रतिशत कमीशन मैनेजरों का
जांच में पाया गया कि मैनेजर रहते हुए राम लोधी ने लोन के 470 प्रकरण किए, जिसमें उसे 10 प्रतिशत कमीशन बनकट सेन और हिम्मत सिंह के माध्यम से दिया जाता था।

मैनेजर के परिजनों के खाते में कमीशन की रकम
अरमेंद्र कुमार तिवारी के समय में राजगढ़ से 8.34 करोड़ रुपए के 87 एमएसएमई लोन प्रकरण स्वीकृत किए, जिसके बदले कमीशन की रकम दिल्ली निवासी बरखा तिवारी के बैंक खाते और ब्रदर इन लाॅ बादल द्विवेदी, सास आभा द्विवेदी और दादी सास गिरिजा उपाध्याय के गोरखपुर के यूनियन बैंक के खातों में बड़ी मात्रा में रकम पहुंचाई गई। वहीं दलाल हिम्मत सिंह के खातों से 21 लाख रुपए दस दिन में भेजे गए। जबकि भगवत प्रसाद उपाध्याय ने 16.50 लाख रुपए कृष्ण मोहन द्विवेदी के खाते में भेजा। बाद में कुछ ही दिन में हिम्मत ङ्क्षसह का खाता बंद हो गया। सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि कहीं ना कहीं यहीं से बड़ी गड़बड़ी हुई है। करेड़ी के बालाजी हार्डवेयर से 17.75 लाख रुपए हिम्मत सिंह के खाते में डाले गए। बालाजी हार्डवेयर पीएमजीईपी का केनरा बैंक का एक वेंडर रहा। इससे 8.91 लाख रुपए अरमेंद्र तिवारी की पत्नी बरखा के खाते में क्रेडिट किया गया।

थाने में लंबित है गोल्ड लोन का मामला
इससे पहले आईसीआईसीआई बैंक में हुए गोल्ड लोन घोटाले का मामला अभी थाने में लंबित है। जबकि एचडीएफसी में किए गए गोल्ड लोन घोटाले में अभी बैंक आने तक नहीं पहुंचे। मगर जिन लोगों के नाम इस गड़बड़ी में शामिल हैं उन्हें नोटिस पर कॉल लगाकर बैंक में बुला रहे हैं। लगातार बैंक के माध्यम से किए जा रहे इन घोटालों के बाद उपभोक्ताओं का विश्वास बैंकों से कम हुआ रहा है।

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