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213 बच्चों ने बनाए विज्ञान के मॉडल 22 संभाग स्तर पर करेंगे जिले का प्रतिनिधित्व

- विद्यार्थियों को वैज्ञानिक गतिविधियों से जोडऩे के लिए आयोजन - वर्ष 2019-20 इंस्पायर अवार्ड का शुभारंभ

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 राजगढ़। बच्चों द्वारा बनाए मॉडलों का अवलोकन करते अतिथि।

राजगढ़। बच्चों द्वारा बनाए मॉडलों का अवलोकन करते अतिथि।

राजगढ़. विद्यार्थियों को वेज्ञानिक गतिविधियों से जोडऩे के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हर साल इंस्पायर अवार्ड का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में वर्ष २०१९-२० इंस्पायर अवार्ड का शुभारंभ गुरूवार को उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में ऊर्जा मंत्री प्रियवृत सिंह, विधायक बापू सिंह तंवर और गोवर्धन दांगी की मौजूदगी में हुआ।

इस दौरान ऊर्जा मंत्री ने कुछ कक्षों में जाकर बच्चों द्वारा बनाए मॉडलो को भी देखा लेकिन समय कम होने के कारण वे सिर्फ एक कक्ष में रखे मॉडलो का अवलोकर कर मंच पर आ गए। दो दिवसीय प्रदर्शन का समापन आज सांसद रोडमल नागर के मुख्य आतिथ्य में होगा।

कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर ऊर्जा मंत्री ने विज्ञान को विकास का आधार बताते हुए बच्चों को विज्ञान से जुडऩे और बेहतर प्रदर्शन की बात कही। वहीं विधायक तंवर ने इस तरह के आयोजन को बच्चों की वेज्ञानिक सोच और क्षमताओं को निखारने वाला बताया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष निस्बत खां, जीरापुर जनपद अध्यक्ष प्रकाश पुरोहित, जिला शिक्षा अधिकारी बीएस बिसोरिया, शिवसिंह बामलाबे, सहित विभिन्न स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थी, शिक्षा विभाग के अधिकारी कर्मचारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

21 लाख खर्च कर 213 बच्चों ने बनाए मॉडल...
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस साल इंस्पायर अवार्ड में जिलेभर के विभिन्न स्कूलों के कक्षा छटवीं से दसवीं तक के 213 बच्चों ने भागीदारी की है। जिन्हें मॉडल के निर्माण के लिए प्रत्येक बच्चें को दस हजार रूपए शासन की ओर से मिले है।

इन बाल वैज्ञानिकों में से 22 का चयन संभागस्तरीय अवार्ड के लिए किया जाएगा। चयनित बच्चों का चयन विभाग द्वारा नियुक्त तीन सदस्यी निर्णायक टीम द्वार मॉडल का प्रकार, उसका उपयोग, विद्यार्थी की प्रस्तुति, पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगिता आदि के आधार पर होगा।

हालांकि हर बार की तरह इस बार भी मॉडलों को अन्य माध्यमों से लाने की संभावना नजर आ रही है। क्योंकि कई कक्षों में ऐसे में मॉडल भी नजर आ रहे है जिन्हें बच्चों द्वारा बनाने के दावे किए जा रहे है। लेकिन इन्हें बनाने वाले बच्चें ही इनकी पूरी जानकारी नहीं दे पा रहे।

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