कोरोना का असर ज्वैलरी बाजार पर भी, मार्केट में मंदीविदेशों से ज्वैलरी आना रुका, व्यापारी बोले- देश में स्थिति बारिश के सीजन जैसी, मार्केट में ग्राहक ही नहीं, शादियों के सीजन का भी असर नहीं
ब्यावरा.कोविड-19 कोरोना वायरस को असर आम जनजीवन के साथही ज्वैलरी बाजार पर भी पड़ा है। ज्वैलरी के विदेशी व्यापार पर ३0 फीसदी कटौती हुईहै। इसका असर लोकल में भी हुआहै। पूरे मार्केट में मंदी छाई हुई है, इस कारण इस काम से जुड़े कारीगर और श्रमिक बेरोजगारी की स्थिति में है।
दरअसल, कोरोना से जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का निर्यात थमा है वहीं, स्थानीय तौर पर भी व्यापारियों का कामकाज प्रभावित हुआहै। हालात यह हैं कि शादियों के सीजन में भी ज्वैलरी व्यापारी फुर्सत में हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में हालात ऐसे हैं जैसे बारिश हो रही हो और लोग समय निकाल रहे हों? स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार का बारीक काम कारीगरों के पास बचा ही नहीं। ऐसे में ज्वैलरी मार्केट में पूरी तरह से सन्नाटा है। व्यापारियों की सरकार से यह शिकायत भी है कि ज्वैलरी मार्केट और व्यापारियों को लेकर उनकी नीति गलत है। इसी कारण मंदी के दौर से पूरा मार्केट गुजर रहा है। हालांकि विदेशों से आने वाली ज्वैलरी का ज्यादा असर मुंबई, भोपाल, इंदौर, अहमदाबाद, कोटा जैसे शहरों में ज्यादा हुआ है। छोटे शहरों में तो वैसे ही दूसरी मंदी काफी है, इससे व्यापारियों को दिक्कतें हो रही है।
कृषि बाजार में भी मंदा : मक्का, सोयाबीन, धनिया के भाव गिरे
बीते तीन से चार माह से वैसे ही ठंडे बस्ते में चल रहे कृषिमार्केट को कोराना वायरस ने और मंदी की ओर धकेल दिया। स्थिति यह है कि मक्का का निर्यात कम हो जाने से उसका भाव काफी कम हो गया। ऐसी ही स्थिति धनिया, सोयाबीन में भी है। मुर्गियों की बिक्री थम जाने से मक्का, सोयाबीन की बिक्री पर भी रोक लगी है। साथही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात पर रोक लगने से काफी मंदी के दौर से कृषि बाजार गुजर रहा है। कब तक स्थितियां सामान्य होंगी यह भी कह पाना मुश्किल लग रहा है।
नही मंदी से गुजर रहा पूरा व्यापार
30-35 साल में ऐसी मंदी का दौर कभी नहीं देखा, पूरे मार्केट में सन्नाटा है। शादियों के सीजन से ज्वैलरी मार्केट को उमीद रहती है लेकिन वह भी इस बार ठंडा है। हालात यह हैं कि स्थानीय कारीगरों के पास काम ही नहीं है।
-राजीव जैन, ज्वैलरी व्यापारी, ब्यावरा
निर्यात ही नहीं, मार्केट ठंडा पड़ा
मंडी में आवक तो भरपूर हो रही है लेकिन निर्यात नहीं हो पाने से सही भाव नहीं मिल रहे। स्थिति यह है कि सोयाबीन, मक्का, धनिया के भाव बिल्कुल कम हो गएहैं।जिन व्यापारियों ने महंगी दरों में खरीद लिया उनके सामने कम भाव का संकट खड़ा हो गया है।
-पवन कुमार अग्रवाल, गल्ला व्यापारी, कृषि मंडी ब्यावरा