
राजगढ़ जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना में से एक मोहनपुरा डैम से सोमवार की शाम 7 बजे एक गेट खोलकर 7 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी छोड़ने को लेकर मोहनपुरा डैम प्रबंधन की टीम ने ना सिर्फ गांव गांव में सूचना पहुंचाई है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी हर व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया है।मोहनपुरा डैम से हर साल बारिश से पूर्व पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस पानी को छोड़ने के पीछे कारण ये है कि गर्मियों के इन दिनों में कई गांव पथरीले क्षेत्र होने के कारण पानी की कमी बढ़ जाती है, पेड़ भी सूखने लगते हैं। यही कारण है कि पर्यावरण को व्यवस्थित रखने के साथ ही गांव-गांव में पानी की पूर्ति करने के उद्देश्य यह पानी छोड़ा जाता है। हालांकि इस साल पानी को ज्यादा नहीं छोड़ा गया है, क्योंकि राजगढ़ के छोटे पुल से लेकर सर्किट हाउस तक दीवार निर्माण का काम भी चल रहा है। यदि पानी को ज्यादा छोड़ा जाता है तो कहीं ना कहीं निर्माण की गति पर भी असर पड़ेगा।
शहर के छोटे पुल पर आ सकता है पानी
बताना होगा की मोहनपुरा के गेट से 10 सेंटीमीटर गेट खोलते हुए पानी को छोड़ा जाएगा। राजगढ़ के छोटे पुल की बात करें तो यहां अभी भी बैराज बंधा हुआ है। इसमें से गेट नहीं निकाले गए हैं। पानी का फ्लो तेज होता है तो यह पानी छोटे पुल के ऊपर से वह सकता है।
इस बार पूरा भरेगा मोहनपुरा डैम
मोहनपुरा डैम को बने हुए लगभग 6 साल हो गए हैं। लेकिन इस साल पहली बार डैम को फुल लेवल में भरा जाएगा। क्योंकि इससे पहले जब डैम को भरा जाता था तो कहीं ना कहीं करनवास के पास जो रेलवे पटरी है वह डूब में आ जाती थी और वहां से निकलने वाली ट्रेन इस पानी के कारण प्रभावित होती थी। यही कारण है कि अभी तक डैम को 392-93 मीटर तक भरा गया। लेकिन अब इस डेम को 397 मीटर तक भरा जाएगा। ऐसे भी अब डैम का जो पानी है। वह और ज्यादा एरिया में फैलेगा, जिसके कारण अब और भी बड़ा क्षेत्र प्रभावित होगा।
बारिश से पूर्व किसी भी बड़े डैम के गेट चैक करने को लेकर भी पानी छोड़ा जाता है। लेकिन यह प्रक्रिया फिलहाल अभी नहीं अपनाई गई। क्योंकि बारिश में जब लगातार पानी गिरता है, तो डैम पूरी तरह से लबालब हो जाते हैं। पानी छोड़ने के लिए कई बार तकनीकी खराबी के कारण गेट किसी तरह व्यवधान न बने, इसके लिए इन्हें बारिश से पूर्व ही चैक कर लिया जाता है।
मोहनपुरा डेम के ईई अशोक दीक्षित कहते हैं कि डैम से पानी छोड़ा गया है। यह नियम में ही आता है निकले इलाके में पानी की कमी पड़ने पर यह व्यवस्था की जाती है। पर्यावरण के साथ ही नीचे के सूखेपन को खत्म करने के लिए पानी छोड़ा है।
Updated on:
30 May 2023 07:53 pm
Published on:
30 May 2023 07:48 pm
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