25 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

टाइम लिमिट में होनी थी जांच, कमिश्रर के पत्र के बाद अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

मामला निर्धारित जमीन से अधिक जमीन की रजिस्ट्री कराने का....

2 min read
Google source verification
news

टाइम लिमिट में होनी थी जांच, कमिश्रर के पत्र के बाद अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

राजगढ़@ भानु ठाकुर की रिपोर्ट. ......
खुजनेर रोड पर एक जमीन का रकबा बढ़ाकर खरीदार को सरकारी जमीन थमाने का मामला शिकायत के बाद टीएल बैठक में आया था। लेकिन जिस मामले की जांच समय सीमा होनी थी। उस जांच को ही अधिकारी पिछले पांच माह से दबाकर बैठे है।


खास बात यह है कि अब जिन्हें जांच करना है वे ऐसी किसी जांच से ही इंकार करते नजर आ रहे है। ऐसे में दोषियों पर कैसे कार्रवाई होगी। जो क्षेत्र में न सिर्फ अपने पद का दुरूपयोग कर रहे है बल्कि भूमाफियाओं की मिलीभगत से सरकारी जमीनों को भी बेचने में लगे हुए है।

मामला खुजनेर रोड स्थित मोतीपुरा गांव का है। जहां भगवानसिंह व हरिसिंह के नाम 3.794 हेक्टेयर भूमि थी। जिसे वह अलग-अलग भागों में तीन लोगों को बेच चुका था। पूरी जमीन बिकने के बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे इसी जमीन को शहर के राजेन्द्र दुबे के नाम पर बेच दी थी।

मामले का खुलासा होने के बाद दुबे ने जब शिकायत की तो विक्रेता के नाम पर जमीन नहीं थी। ऐसे में दूसरे खाते से शासकीय पट्टी की जमीन की बिना अनुमति रजिस्ट्री कराई गई। सवाल उठता है जो जमीन थी ही नहीं पटवारियों ने मिलकर उस जमीन का नामांतरण भी कर डाला था।

यह अकेला ऐसा मामला नहीं है। सूत्र बताते है कि तहसील से जुड़े कुछ लोग भूमाफियाओं से मिलकर शासकीय जमीनों को खाते में दर्ज कर बेचने का रैकेट चला रहे है।

कहां तक पहुंची जांच.....

मामले में आरआई जगन्नाथसिंह सौलंकी ने खुलासा करते हुए इस पूरे मामले की शिकायत पहले स्थानीय स्तर पर और जब कार्रवाई नहीं हुई तो कमिश्रर कार्यालय में बिंदुवार की। कलेक्टर ने मामले को टीएल में शामिल किया।

जिसकी शिकायत तत्कालीन नायब तहसीलदार प्रदीप भार्गव सहित चार सदस्यीय टीम को सौंपी गई। जांच दल ने मोतीपुरा और करेड़ी का रिकार्ड एकत्रित करते हुए कुछ बिंदुओं पर फोकस किया। जांच दल कुछ खुलासा कर पाता।


इससे पहले ही उन्हें राजगढ़ से सुठालिया भेज दिया और जांच एसडीएम के माध्यम से वर्तमान तहसीलदार राकेश खजुरिया को दी गई। हालांकि इसको दिए हुए भी करीब एक माह से ज्यादा का समय हो चुका है।

सात दिन के अंदर मांगा था जवाब.....

शासकीय पट्टों के मामले में की गई शिकायत को लेकर कमिश्रर भोपाल द्वारा सात दिन के अंदर जांच कर प्रतिवेदन मांगा गया था। इसी आधार पर कलेक्टर ने पूरे प्रकरण को टीएल में लिया था। कमिश्रर का यह पत्र 12 मई 2018 को जारी किया गया था।

इनका कहना है...

मामले की जानकारी कुछ-कुछ है। लेकिन यह कौन कह रहा कि मुझे इसकी जांच करना है। कार्रवाई के संबंध में अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
राकेश खजुरिया, तहसीलदार राजगढ़

मेरे सहित चार लोगों को इस मामले में जांच सौंपी गई थी। कई तथ्य एकत्रित किए गए थे और कुछ बयान भी लिए थे। लेकिन मेरा स्थानांतरण हो जाने के कारण मैं वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर रिकार्ड तहसील में सौंपकर आया।
प्रदीप भार्गव, नायब तहसीलदार सुठालिया