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MP News: ‘आई एम सॉरी, लव यू पापा- मम्मी’, नीट की तैयारी कर रहे छात्र ने दी जान

MP News: पढ़ाई के प्रेशर में नीट की तैयारी कर रहे 20 वर्षीय छात्र ने घर में ही फांसी लगाकर की आत्महत्या, टीचर पिता और मां का रो-रोककर बुरा हाल।

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MP News: मध्यप्रदेश में 10-12वीं के परीक्षा परिणाम के बीच एक दुखी कर देने वाली घटना सामने आई है। घटना राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से है यहां नीट की तैयारी कर रहे छात्र ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। छात्र ने घर के कमरे में ही फांसी लगाकर अपनी जान दी, आत्महत्या करने से पहले छात्र ने कमरे की एक दीवार पर आई एम सॉरी, लव यू पापा-मम्मी भी लिखा है। बेटे को फांसी के फंदे पर झूलता देख शिक्षक पिता और मां को गहरा सदमा लगा है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

खिलचीपुर के गायत्री कॉलोनी में रहने वाले 20 वर्षीय शिवम शर्मा ने घर में कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शिवम मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रहा था। उसके पिता मनीष शर्मा शिक्षक हैं। परिवार में दादा-दादी, माता-पिता और एक बहन है। शिवम इकलौता बेटा था। सुबह करीब छह बजे पिता उसे जगाने कमरे में पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। आवाज देने पर जवाब नहीं आया। इस पर उन्होंने दरवाजा खोलकर देखा तो शिवम फंदे पर लटका मिला। परिजन तत्काल उसे नीचे उतारकर सिविल अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।

दीवार पर लिखा- आई एम सॉरी, लव यू मम्मी-पापा

खिलचीपुर टीआई कमलसिंह गहलोत ने बताया कि कमरे की दीवार पर अंग्रेजी में आई एम सॉरी, लव यू मम्मी-पापा लिखा मिला है। प्रारंभिक जांच में पढ़ाई के दबाव की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच शुरू की है। बताया जाता है कि करीब दो साल पहले वह 12वीं कर चुका है। अब गेप देकर नीट की तैयारी कर रहा था।

पत्रिका व्यू : बच्चों को संभालिए, तनाव मत दो उनका मन टटोलो

परीक्षा में अंक कम आएं या ज्यादा, बच्चों का चयन नीट, जेईई और एआईईईई में हो या न हो लेकिन आपको, हमें और तमाम अभिभावकों को बच्चों को समझने की जरूरत है। हो सकता है आपका दिया हुआ अत्यधिक तनाव वे झेल नहीं पा रहे हों? हो सकता है आपका डॉक्टर या इंजीनियर बनाने का सपना उन पर बोझिल हो रहा हो, क्यों न उन्हें समझा जाए और उनकी इच्छा जानी जाए। कई बार बच्चे दबाव में आकर इन कोर्स को लेकर सहमित जता देते हैं और फिर स्कूल, कोचिंग और परिजन के दबाव में पिसते रहते हैं। तो यह समय है बच्चों की काउंसलिंग का, उन्हें समझने का, ताकि किसी के घर के चिराग को बुझने से बचाया जा सके। पत्रिका अपील करता है ऐसे तमाम अभिभावकों, शिक्षकों और कोचिंग संचालकों से कि बच्चे के मन को जानिए, पहचानिए, दबाव मत बनाइए।