
Counseling of public teacher and BAC again in balance
राजगढ़. शिक्षा विभाग में रीड की हड्डी कहे जाने वाले जनशिक्षक और बीएसी की काउंसिलिंग रविवार को होनी थी, लेकिन यह काउंसलिंग बगैर किसी ठोस कारण के रद्द कर दी गई। ऐसे में एक बार फिर यह कार्रवाई विवादों में आ गई है।
हालांकि कोई इसे जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप बता रहे हंै तो किसी का कहना है कि न्यायालीन प्रक्रिया भी इस काउंसिलिंग में आड़े आ रही है। बात जो भी हो, लेकिन वर्ष 2013 में की गई प्रतिनियुक्ति के बाद 2016 से कई शिक्षक जनशिक्षक या फिर बीएसी बनने का इंतजार कर रहे हैं और शायद उनका यह इंतजार रविवार को होने वाली काउंसिलिंग में खत्म हो जाता लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
जिले में 148 जनशिक्षक के पद हैं जो विभिन्न संकुल केन्द्रों से जुड़कर अपनी सेवाएं देते हंै। हालंाकि अभी जो काउंसिलिंग की जा रही थी। वह 114 पदों पर हो रही थी। बकायदा इसकी विज्ञप्ति भी जारी की गई। ऐसे में कई लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई कि जब पद 148 है तो फिर 114 पर काउंसिलिंग क्यों।
विभाग का कहना है कि बचे हुए जनशिक्षक न्यायालीन प्रक्रिया के माध्यम से 2018 में एक बार फिर Óवाइन हुए हैं' जिसके कारण यह स्थिति बनी है। कुछ ऐसी ही हालत बीएसी के पदों की है जिसमें हर ब्लॉक में पांच पद हैं। इस तरह छह ब्लाक में 30 बीएसी में से 16 की ही काउंसिलिंग की जा रही थी।
यहां भी शेष 14 प्रकरण न्यायालय से जुड़े होने के कारण इनको इस प्रक्रिया से दूर रखा गया है। मिडिल स्कूल तक की मॉनीटरिंग बीएसी और जनशिक्षकों पर होती है। ऐसे में शिक्षा के स्तर को जांचने के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं भी इनके माध्यम से ही संचालित होती हैं। वहीं यह पढ़ाई से हटकर खुद को अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में कोई भी इस पद को छोडऩा नहीं चाह रहा और जो कतार में है। वे हर स्थिति में इसे पाने की चाह रख रहे हैं।
राजनीति और न्यायालीन प्रक्रिया आई सामने
2013 में प्रतिनियुक्ति के बाद 2016 में कुछ जनशिक्षक और बीएसी न्यायालय पहुंचे। यहां उन्होंने कोर्ट से स्थगन लेते हुए प्रक्रिया में शामिल होने की मांग रखी फिर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। 2017 में फिर काउंसलिंग की तारीख तय हुई। लेकिन काउंसलिंग हो पाती इससे पहले ही राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते यह टाल दी गई।
रविवार को जब यह प्रक्रिया की जानी थी। इससे पहले ही विज्ञप्ति देख कई शिक्षक अपनी आपत्ति दर्ज कराने पहुंच गए। यहां स्थानीय विधायक बापूसिंह तंवर ने भी आपत्ति दर्ज कराई कि शेष पदों को क्यों छोड़ा जा रहा है।
वर्ष 2016 में हुई थी काउंसिलिंग
वर्ष 2013 में नियुक्त किए गए जनशिक्षकों का कार्यकाल 2016 में पूरा हो रहा था। ऐसे में साल के अंत में यह काउंसिलिंग की गई, लेकिन कुछ लोग न्यायालय पहुंचे और उन्होंने पूर्व के कार्यकाल और अनुभव का हवाला देते हुए अपने आप को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की।
जबकि प्रतिनियुक्ति में चार साल का समय पूरा हो जाने के कारण जनशिक्षा केन्द्र द्वारा इन्हें इस प्रक्रिया से दूर खा गया था। न्यायालय ने अनुभव का आधार देखते हुए इन्हें भी काउंसिलिंग में शामिल करने के निर्देश जारी किए है। तभी से यह पूरी प्रक्रिया उलझी हुई है और लंबे समय बाद एक बार फिर काउंसिलिंग रखी गई थी, लेकिन उसे टाल दिया गया।
Updated on:
23 Dec 2019, 10:28 AM IST
Published on:
23 Dec 2019, 10:28 AM IST
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