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अब धीरेन्द्र शास्त्री के शिष्य ने लगाया दिव्य दरबार, खूब बनाईं पर्चियां

पंडोखर सरकार और बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के बाद तीसरे 'पर्ची वाले' बाबा

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राजगढ़. बिना बताए ही पर्ची पर मन की बात लिख देने वाले दो बाबाओं के बारे में तो आपने सुना होगा। इनमें से एक हैं पंडोखर सरकार तो दूसरे हैं बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, लेकिन मध्यप्रदेश में एक ऐसे तीसरे बाबा की एंट्री हो गई है जिनकी शक्ति और अंदाज ठीक इन दो बाबाओं की ही तरह है और उन्होंने भी दरबार लगाना शुरु कर दिया है। पहली बार जब इन तीसरे बाबा ने दरबार लगाया तो खूब पर्चियां लिखीं और काफी लोगों को समस्याओं का समाधान भी बताया। तो चलिए आपको बताते हैं इन तीसरे बाबा के बारे में..

शिवधाम में लगाया दिव्य दरबार
पंडोखर सरकार और पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की ही तरह दरबार लगाकर लोगों के मन की बात पर्ची पर लिखकर समाधान बताने वाले तीसरे नए बाबा का नाम है हनुमंत दास। हनुमंत दास ने राजगढ़ जिले के जूनागढ़ के शिवधाम में दो दिवसीय दिव्य दरबार लगाया। हालांकि इस दरबार की भव्यता और लोगों की भीड़ पंडोखर सरकार और पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के दरबार के जितनी नहीं थी लेकिन आस्था और विश्वास उतना ही नजर आ रहा था। रविवार व सोमवार को यहां लगे दरबार में युवा पुजारी हनुमंत दास ने लोगों की समस्याओं को बिना बताए पर्चे पर लिखकर उन्हें बताया और समाधान का आश्वासन भी दिया। दो दिन दरबार लगाने के बाद हनुमंत दास अब यहां से जा चुके हैं और अप्रैल में फिर से उनका तीन दिवसीय दरबार यहां पर लगाया जाएगा।

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हाथ में हनुमान की गदा और गले में हनुमानजी का लॉकेट
बागेश्वधाम प्रमुख पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की तरह दिव्य दरबार लगाने वाले हनुमंत दास उनकी ही तरह हाथ में हनुमान की गदा व गले में हनुमानजी का लॉकेट धारण किए रहते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ले गुरुदीक्षा ली है। हनुमंत दास का अंदाज अपने गुरु पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से काफी मिलता है। दरबार के दौरान जिस तरह से उन्होंने लोगों को नाम लेकर पुकारा और उनकी समस्याएं बिना बताए ही पर्चे पर लिखकर बताईं वो पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के दरबार की याद दिला रहा था।

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आखिर कौन हैं हनुमंत दास ?
चलिए अब आपको युवा पुजारी हनुमंत दास के बारे में बताते हैं। उनका पूरा नाम हनुमंत दास सेनिल है। वो गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले हैं और 19 साल की उम्र से पूरी तरह से आध्यात्म से जुड़कर पूजा पाठ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई और 1 बहन है। कहते हैं परिवार बहुत ही सामान्य है। BA तक की पढ़ाई की है और बीते 4 से 5 साल से पूरी तरह से हनुमान जी की कृपा से सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। राघौगढ़ में मंशापूर्ण हनुमान मंदिर में ही अब तक हनुमंत दास दिव्य दरबार लग रहा था। पहली बार राघौगढ़ के बाहर उनका दरबार लगा।

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