
नरसिंहगढ़। शहर सहित आसपास क्षेत्र में मौजूद हजारों वर्ष पुराने शैल चित्र भी यहां के पर्यटन की प्रमुख पहचान है। हिंगलाज माता पहाड़ी और कोटरा की पहाड़ियों पर प्राचीन सभ्यता को प्रदर्शित करते इन शैल चित्रों की खोज शहर के ही पुरातत्वविद स्वर्गीय डॉ. जितेंद्र दत्त त्रिपाठी ने की थी। वर्तमान में यह शैल चित्र भी क्षेत्र की पुरातात्विक धरोहर हैं, जिनके संरक्षण को लेकर काम तो किया जा रहा है, लेकिन टूरिज्म के लिहाज से इन्हें अभी और संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। यदि शहर को पर्यटन का दर्जा मिलता है, तो इन धरोहरों को भी सहेजा जा सकेगा।
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बहुत कम देखने को मिलते हैं करणी और हिंगलाज माता के मंदिर
शहर के दुर्लभ धरोहरों में करणी माता मंदिर और हिंगलाज माता मंदिर के नाम सबसे पहले सामने आते हैं। क्योंकि यह दोनों ही मंदिर विश्व में बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। मंदिरों के इतिहास पर यदि नजर डालें तो करणी माता के भारत में दो ही मंदिर देखने को मिलते हैं। वहीं हिंगलाज माता के भी बहुत कम मंदिर नजर आते हैं। शहर में रियासत के दौर में इन मंदिरों की स्थापना की गई है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से यह क्षेत्र की दुर्लभ धरोहर है।
पुरातत्व संग्राहालय हो स्थापित
वर्तमान में शहर में स्थित पुरातत्व संग्रहालय जीर्ण शीर्ण हालत में है। नगरपालिका के पास स्थित भवन में बने पुरातत्व संग्रहालय में ऐतिहासिक अवशेष मौजूद हैं। लेकिन उनका संरक्षण नहीं हो पा रहा है। नागरिकों ने उनके संरक्षण की मांग उठाई है।
नरसिंहगढ़ शहर और उसके आसपास का क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विस्तृत है। आवश्यकता है तो बस उसे सहेजने की। शहर को यदि पर्यटन का दर्जा मिलता है तो यहां रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। शहर को पर्यटन का दर्जा दिलाने पत्रिका द्वारा शुरू की गई मुहिम सराहनीय है।
-शरद श्रीवास्तव, अधिवक्ता और पूर्व अध्यक्ष अभिभाषक संघ नरसिंहगढ़
पर्यटन के नक्शे पर शहर का नाम अंकित हो और उसी तरीके से यहां काम होने चाहिए। हम भी इसको लेकर प्रयासरत हैं। लेकिन शहरवासियों को भी इस मुहिम से जुड़कर शहर को पर्यटन स्थल बनाने पुरजोर मांग उठानी चाहिए। सभी के प्रयासों से शहर को पर्यटन की पहचान दिलाई जा सकती है।
-गिरीश भण्डारी, पूर्व विधायक नरसिंहगढ़
Updated on:
02 Feb 2023 05:06 pm
Published on:
02 Feb 2023 05:00 pm
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