
राजगढ़. अगर हौसले मजबूत हों तो दुखों का पहाड़ भी घुटने टेक देता है..ये बात सच कर दिखाई है राजगढ़ की रहने वाली संध्या ने। मजदूर की बेटी संध्या ने हर मुसीबत झेली लेकिन फिर भी अपनी लगन को कम नहीं होने दिया। दूसरे के खेतों में मजदूरी की लेकिन पढ़ाई का हौसला नहीं टूटने दिया और अब मजदूर की बेटी संध्या फौजी बन गई है जो देश की सीमा पर ड्यूटी करेगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 8 महीने की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर जब संध्या अपने गांव लौटी तो गांव वालों ने उसका जोरदार स्वागत किया।
फौजी बनकर लौटी बेटी का जोरदार स्वागत
राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ तहसील के पिपल्या रसोड़ा गांव की रहने वाली संध्या भिलाला जब बीएसएफ की ट्रेनिंग पूरी कर फौजी की वर्दी पहनकर गांव लौटी तो गांववालों ने फौजी बिटिया का जोरदार स्वागत किया। बीएसएफ की वर्दी में संध्या को घोड़े पर बैठाकर गांव में जुलूस निकाला गया। ढोल नगाड़ों की थाप पर लोग थिरकते रहे और अपनी खुशियों का इजहार किया। गांव वालों की ओर से किए गए स्वागत को देखकर संध्या भी भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि ये पल उनकी जिंदगी का सबसे यादगार पल है।
संध्या के हौसले की कहानी
पिपल्या रसोड़ा गांव की रहने वाली संध्या के पिता मजदूर हैं। बेहद ही गरीबी के बीच संध्या ने दूसरों के खेतों में मजदूरी की और फिर मजदूरी के पैसों से ही फीस जमाकर 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। गांव के दो युवक फौज में थे जिनकी बातें सुनकर संध्या ने भी फौज की नौकरी करने का मन बनाया। 12वीं पास करने के बाद निजी स्कूल में पढ़ाना शुरु किया और आगे की पढ़ाई भी जारी रखी। फौज की भर्ती के लिए गांव की गलियों में दौड़ लगाकर तैयारी की। दो बार फौज की भर्ती में विफल भी हुई लेकिन हार नहीं मानी और आखिरकार सात साल बाद अब उसका चयन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हुआ। ट्रेनिंग राजस्थान में पूरी हुई और अब संध्या नेपाल, भूटान की बॉर्डर पर देश की सुरक्षा करेगी।
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Published on:
19 Dec 2021 05:29 pm
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