
सीएम साहब पूरा करों वादा सरकारी निर्माण में बंद करो सीमेंट की ईंट
राजगढ़@प्रकाश विजयवर्गीय की रिपोर्ट...
शासन द्वारा जारी सीमेंट की ईंटो से सरकारी भवनों के निर्माण के आदेश के बाद ऐेसे ईंट संचालक जो मिट्टी की ईंट बनाते है जो छोटे व्यवसाई है। उनके धंधे चोपट हो गए है। मुख्यमंत्री से किए निवेदन के बाद उन्होंने मंच से मिट्टी की ईंट के संचलन का आश्वसन दिया था, लेकिन अभी तक कहीं भी सरकारी निर्माण में मिट्टी की ईंटो का उपयोग शुरू नहीं हुआ है। कर्ज और धंधा पिटने से परेशान ईंट भट्टा संचालक संकटमोचन कालोनी में बनाए जा रहे प्रधानमंत्री आवास के निर्माण को रोकने पहुंचे, यहां काम बंद कराने के बाद सीधे नगरपालिका गए और वहां जमकर नारेबाजी की।
जिसके बाद वहां नगरपालिका सांसद प्रतिनिधि शैलेष गुप्ता और सीएमओ हरिओम वर्मा भी पहुंचे उनके सामने भी सरकार नगरपालिका और अध्यक्ष उपाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की गई, और चेतावनी दी की यदि तीन के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं होता तो वे हाईवे का जाम करेंगे और प्रशासन इसका जिम्मेदार होगा।
नपा का घेराव कर विधायक निवास पहुंच ज्ञाापन दिया। जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में मिट्टी की र्इंट पर लगे प्रतिबंध को हटाने के आश्वसन को कारगर करवाने की मांग की गई। दरअसल सरकारी निर्माण कार्यो में सीमेंट की ईंट का ही उपयोग करने के से वर्षो से मिट्टी की ईंट बनाकर अपना भरण पोषण करने वाले प्रजापति समाज के पास रोजगार का संकट आ गया है। अप्रेल माह में राजगढ़ के दौरे पर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी प्रजापति समाज द्वारा की गई मांग के बाद सरकारी निर्माण में मिट्टी की ईंटो पर लगे प्रतिबंध को हटवाने का आश्वसन दिया था। इस मौके पर कैलाश प्रजापति, मुकेश कुमार, सत्यनारायण, प्रकाश प्रजापति, बद्री प्रजापति, कमलेश प्रजापति, धमैन्द्र प्रजापति सहित बड़ी संख्या में समाज सदस्य मौजूद रहे।
पीयूआई और आवास निर्माण में हो रहा उपयोग सुप्रीम कोर्ट से मिली गाइड लाइन के बाद केन्द्रीय वन पर्यावरण परिवर्तन मंत्रालय द्वारा मिट्टी से बनी लाल रंग के ईंट पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की थी। जिसके बाद शासन ने सरकारी निर्माण कार्या में सीमेंट की ईंट का उपयोग करने के निर्देश जारी किए। जिले में फिलहाल पीआईयू के माध्यम से होने वाले उन सभी कामों में सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। जिनकी लागत बीस लाख से अधिक है। जबकि लोक निर्माण विभाग द्वार इस लागत कम लागत के निर्माण कार्य में फिलहाल लाल रंग की मिट्टी से बनी ईंट का उपयोग जारी है।
लेकिन इस श्रेणी की कामों की संख्या बहुत कम होने के कारण ईंट व्यवसाईयों के धंधे पर संकट आ गया है। आधी कीमत में बेचकर चला रहे काम इस आदेश के पहले तक जिले में मिट्टी से बनी ईंटो का दाम चार से पांच हजार रूपए प्रति हजार ईंट तक था। लेकिन सरकारी उपयोग में प्रतिबंध लगने के बाद ईंटो की मांग आधी से भी कम हो गई है। जबकि ईंट व्यवसाईयों के पास इसका भारी स्टाक जमा है। ऐसे में माल की लागत निकालने और आर्थिक आवश्यकता पूरी करने के लिए व्यवसाईयों द्वारा पहले से आधी कीमत में ईंट की बिक्री की जा रही है। जिससे शहर सहित जिले के सैकड़ो ईंट व्यवसाईयो को भारी नुकसान हो रहा है।
Published on:
29 Jul 2018 04:04 pm
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