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श्रावण विशेष: इस मंदिर में हैं एक हजार शिवलिंग समाहित-ऐसा मंदिर नहीं देखा होगा आपने

आस्थावान लोगों का कहना भगवान भोले के दर्शन मात्र से खत्म हो जाते हैं पाप

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सीहोर

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Sunil Sharma

Jul 29, 2018

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इस मंदिर में हैं एक हजार शिवलिंग समाहित-ऐसा मंदिर नहीं देखा होगा आपने

सीहोर। श्रावण मास का पहला सोमवार 30 जुलाई को होगा। श्रावण मास हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए भगवान शिव के आशीर्वाद का विशेष मास माना जाता है। श्रावण सोमवार को शिवभक्त भोले की आराधना में जुटे हुए नजर आएंगे। इसी के साथ श्रावण मास में भगवान भोले के अभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसके बाद भव्य रूप से श्रृंगार किया जाएगा। जिले के शिव मंदिर इतिहास समेटे हुए हैं।

आस्थावान भक्तों का कहना है कि श्रावण मास में भगवान भोले के दर्शन मात्र करने से पाप खत्म हो जाते हैं। शहर मे वैसे तो भगवान भोलेनाथ के अनेक मंदिर हैं और शहर के अलावा दूरस्थ अंचलों के लोग भी भोले की कृपा पाने दर्शनों के लिए आते हैं। खासकर श्रावण मास में मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है।

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एक हजार शिवलिंग के एक साथ दर्शन
शहर के बढिय़ाखेड़ी में सबसे पुराना शिवालय स्थित है। यह सहस्त्रलिंगेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां एक शिवलिंग में एक हजार शिवलिंग समाहित हैं। मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा बताते हैं कि मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है। सहस्त्रलिंगेश्वर की प्रतिमा सीवन नदी से निकली थी। इसी कारण सीवन नदी के किनारे सहस्त्रलिंगेश्वर का मंदिर बना दिया गया। इस मंदिर की ख्याति पूरे देश में है और देशभर के श्रद्धालु यहां दर्शनों के लिए आते हैं। श्रावण मास में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

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पेशवाकालीन मंदिर मनकामेश्वर
तहसील चौराहे के पास स्थित मनकामेश्वर मंदिर पेशवाकालीन है। इस मंदिर में भगवान के दर्शन मात्र से भक्तों के पाप खत्म हो जाते हैं और मन्नत पूरी जाती है। इस मंदिर की विशेषता है कि यहां बनी बावड़ी में हमेशा पानी रहता है। मनकामेश्वर मंदिर में श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मनोहारी शिव मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन श्रावण मास में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के अलावा भव्य रूप से भोले का श्रृंगार किया जाता है।

भूतेश्वर महादेव मंदिर
सीवन नदी तट के पास गणेश मंदिर रोड पर भूतेश्वर महादेव मंदिर पर श्रद्धालुओं की आस्था श्रावण मास में काफी बढ़ रही है। श्रावण मास में यहां मेले सा दृश्य रहता है। एकांत स्थान और सीवन नदी के तट पर मंदिर होने से श्रावण मास में यहां प्राकृतिक सौन्दर्य का नजारा रहता है। आराधना में लीन होकर पूजा-अर्चना करने शिवभक्त बड़ी संख्या में यहां पूजन पाठ करने पहुंचते हैं। इस मंदिर का इतिहास भी सौ साल से अधिक पुराना बताते हैं। यहां मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहता है।

गुप्तेश्वर महादेव मंदिर
स्टेशन रोड के पास स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर अमर टाकीज के पास स्थित है। भक्तों की गुप्त से गुप्त मन्नतें ही बिना मांगे यहां पूरी हो जाती है। मंदिर करीब 170 साल पुराना है। मंदिर के पुजारी रमेश पारिख बताते हैं कि जैसा नाम है, वैसे ही इस मंदिर के गुण है। समाजसेवी भगवान दास अग्रवाल ने इस मंदिर की नीव रखी थी। पूर्व में यहां बगीचा था और बगीचे में ही मंदिर की मड़ैया थी। श्रावण मास में यहां भव्य रूप से भगवान भोले की पूजा-अर्चना की जाती है।

चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर
चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर जिला अस्पताल के सामने और नगरपालिका के पास स्थित है। भगवान भोले के चमत्कार के यहां अनेक किस्से हैं। भगवान से जो मांगा जाता है भक्तों की कोई मुराद अधूरी नहीं रहती है। पिछले सालों से अच्छी बारिश के लिए इसी मंदिर में भगवान का अभिषेक किया जा रहा है। इसके बाद से शहर में बारिश हो रही है। इस मंदिर से मुराद पाने वाले अनेक शिवभक्तों की आस्था यहां जुड़ी हुई है।