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शिक्षा का एकदम नया तरीका: पौधों की पत्तियों से बनाई वर्णमाला

टीचिंग लर्निंग मेटेरियल मेला... क्रिएटिव पढ़ाई के लिए एक से आठ तक के स्कूलों में शुरू हुआ टीचिंग लर्निंग प्रोग्राम

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ब्यावराराजगढ़। सरकारी स्कूलों के प्रति पैरेंट्स का नजरिया बदलने, वैल्यू बेस्ड एजुकेशन देने के लिए जिले में रचनात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इसी में टीचिंग लर्निंग प्रोग्राम के तहत टीचिंग लर्निंग मटेरियल मेला शुक्रवार को स्थानीय बीआरसी भवन में लगाया गया। दरअसल, एक से आठ तक के ऐसे बच्चे जो प्रतिभा पर्व के दौरान जिस विषय में जिस एंगल से कमजोर रहे हैं उनकी परेशानी क्रिएटिव ढंग से कुछ नये तरीके से दूर करने की योजना बनाई गई है। कार्यक्रम का मकसद रचनात्मक ढंग से बच्चों में पढ़ाई की समझ पैदा करना है। ब्यावरा ब्लॉक के 12 ही जनशिक्षा केद्रों से 10-10 शिक्षक रचनात्मक प्रोग्राम बनाकर लाए। इसमें मटेरियल के जरिये उन्होंने अलग-अलग विषय की समझ पैदा करने की कोशिश की।

रोचक बना दिया बोर विषयों को
घर के अनुपयोगी सामग्री से एक पौधा तैयार किया जिसमें फल, पत्तियों, शाखाओं और जड़ के माध्यम से हिंदी वर्णमाला समझाई गई। साथ ही गणित की बारीकियों को समझाने ईकाई, दहाई, सैंकड़ा और हजार का चार्ट तैयार किया गया, जिसे रचनात्मक तरीके से समझाया गया। इसके अलावा शिक्षिकाओं ने रबी, खरीफ, दलहन, तिलहन के जरिये बच्चों को अनाज में अंतर की समझ पैदा की। थर्माकोल से अंतरिक्ष की संरचना, गांव में टूटे-फुटे तार से विद्युत पैदा करना सहित अन्य चीजें बताई गईं। अंग्रेजी की समझ पैदा करने के लिए भी विशेष चार्ज बनाए गए, शरीर के अंग की संरचना बनाकर उनके बारे में बताया गया। उत्कृष्ट स्कूल में लगे उक्त मेले को एसडीएम अंजली शाह, डाइट प्राचार्य विक्रससिंह राठौर सहित अन्य ने काफी सराहा।

जिले के लिए सिलेक्ट होंगे 25 शिक्षक
मेले में शामिल ऐसे शिक्षक जिनका काम बेहद रचनात्मक होगा उन्हें जिले में शामिल करने के लिए चुना जाएगा। जिलास्तर पर सभी ब्लॉक की प्रविष्टियां मंगाई जाएंगी, वहां बेहतर परफॉर्मेंस करने वालों को पुरुस्कृत किया जाएगा। इस पूरे मेले की विशेषता यह थी कि इसमें जिन शिक्षकों ने क्रिएटिव काम किया उसमें किसी तरह का खर्च नहीं आया। घर की ऐसी अनुपयोगी सामग्री उन्होंने काम ली जिस पर रुपए खर्च नहीं होते। यानी शून्य निवेश से उक्त शिक्षकों ने नवाचार कर बताया। बता दें कि टीचर्स लर्निंग प्रोग्राम के लिए उक्त शिक्षकों को पहले ही मास्टर ट्रेनर्स ट्रेंड कर चुके हैं।

बच्चों में समझ पैदा करना मकसद
इसका मकसद है कि ऐसे कमजोर बच्चे जिन्हें थोड़ी कम समझ रुटीन पढ़ाई से पैदा होती है उन्हें अच्छे से समझाया जा सके। साथ ही इसमें किसी प्रकार का कोई विशेष खर्च भी नहीं है। यहां से विशेष परफॉर्म करने वालों को जिले में चयनित किया जाएगा, वहां विजेता रहने वालों को पुरुस्कृत किया जाएगा। इसके बाद उक्त शिक्षक अपने स्कूलों में भी इसे लागू करेंगे।
-ओ. पी. नामदेव, बीआरसी, ब्यावरा

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