
जमीनों के खेल के जादूगर होते हैं पटवारी, नौकरी छोटी लेकिन कमाई मोटी, जानें हकीकत
राजगढ़. पटवारी का पद वैसे तो राजस्व विभाग में सबसे छोटा पद होता है, लेकिन उसकी कमाई सबसे मोटी होती है, क्योंकि जमीन से संबंधित कोई भी काम बगैर पटवारी के संभव नहीं होता है, पटवारी को ही जमीन संबंधी एक-एक जानकारी होती है, यही कारण है कि कई पटवारी जमीनों के बड़े-बड़े खेल कर देते हैं, प्रदेश में इस समय पटवारी भर्ती को लेकर हाहाकार मचा है, ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पैसे के लिए कुछ पटवारी क्या-क्या खेल कर जाते हैं।
पटवारी का पद वैसे तो राजस्व विभाग में सबसे अंतिम पायदान का माना जाता है, लेकिन इनके बिना विभाग का पत्ता भी नहीं हिलता। जमीन से संबंधित कोई भी काम हो, आपको पटवारी के पास जाना है पड़ेगा। पटवारी को जमीन का जादूगर कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। हाल में मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के एक पटवारी ने ऐसा ही जादू किया कि हाइवे के किनारे की जमीन सरकारी दस्तावेजों में पीछे कर दी और पीछे के कुछ लोगों की जमीन आगे कर दी। हालांकि इस खेल की पोल खुल गई और पटवारी को सस्पेंड कर एफआईआर करवा दी गई। बीते कुछ समय की बात करे तो, यहां गड़बड़ी करने वाले एक दर्जन पटवारियों पर न सिर्फ निलंबन की कार्रवाई हुई, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करनी पड़ी। दो-तीन पटवारी जेल भी भेजे जा चुके हैं।
ये होता है पटवारी का मुख्य काम
-पटवारी का मुख्य काम अपने नियुक्ति क्षेत्र की भूमि का रिकॉर्ड रखना होता है।
-भूमि की माप, खरीद-बिक्री आदि से सबंधित रिकॉर्ड रखना।
-राजस्व अभिलेखों का हिसाब रखता है।
-गांव में बेची गई जमीन और खरीदी गई जमीन का रेकॉर्ड रखना।
-आपदा के दौरान, आपदा प्रबंधन अभियान में सहयोग देना।
-जमीन, फसलों के रिकॉर्ड बनाए रखना और अपडेट करना और म्यूटेशन।
-अधिकारों की कटाई, उत्परिवर्तन और रिकॉर्ड के बारे में सांख्यिकीय जानकारी तैयार करना।
-विवादित जमीन की नापजोख कर रेकार्ड से पुष्टि करना।
ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में सबसे ज्यादा इनके ही नाम
यदि निलंबन के मामलों की पड़ताल करें तो सबसे ज्यादा मामले राजस्व विभाग के ही आते हैं। ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में दर्ज भ्रष्टाचार के केस में भी पटवारियों के नाम ज्यादा आते हैं। वह इसलिए क्योंकि जमीन में हेरफेर करने से लेकर बगैर लेनदेन के यहां काम कराना बहुत मुश्किल होता है। कई बार तो आवेदक इतना ज्यादा प्रताड़ित हो जाता है कि वह काम कराने को लेकर जब चक्कर लगा लगाकर थक जाता है तो इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की ठान लेता है। पिछले कुछ सालों की यदि बात करें तो राजगढ़, ब्यावरा, सुठालिया, नरसिंहगढ़ में पटवारियों के ऊपर लोकायुक्त की दबिश हो चुकी है। केस भी बन चुके हैं।
केस 1.
राजगढ़ तहसील में राधा गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने अन्य पटवारी की आईडी का उपयोग करते हुए रिकॉर्ड में हेरफेर किया था। वे सस्पेंड हैं। एफआईआर भी दर्ज है।
केस 2.
खिलचीपुर के ही पटवारी अविनाश शर्मा को राजस्व प्रकरणों में लापरवाही के कारण सस्पेंड किया गया। उन पर आरोप था कि वे प्रकरणों को लंबित रखते थे।
केस 3.
खिलचीपुर में जमीन में हेरफेर करने वाले पटवारी के खिलाफ गड़बड़ी करने पर मामला दर्ज करा दिया गया। मामला दर्ज होने के बाद से ही यह निलंबित है।
केस 4.
जीरापुर में पटवारी बद्रीलाल भिलाला और विजय मंडलोई ने एक पेट्रोल पंप का गलत नक्शा बना का गलत तरीके से मालिक को लाभ दिलवाने में दोनों सस्पेंड हैं।
केस 5.
ब्यावरा शहर के ही एक पटवारी सुनील शाक्यवार ने लगातार निर्देशों की अवहेलना की। सोशल मीडिया पर अनर्गल बातें लिखीं। सस्पेंड हुए।
केस 6.
ब्यावरा के पटवारी उपेंद्र नागर ने बेशकीमती जमीन का फर्जी बटांकन किया। कलेक्टर ने सस्पेंड किया। प्रकरण कोर्ट में भी चल रहा है।
केस 7.
ब्यावरा शहर के पटवारी मनीष तिवारी ने नरसिंहपुरा में जमीन की अदलाबदली कर दी। इस पर उन्हें सस्पेंड कर उन पर एफआईआर भी हुई।
एक्सपर्ट व्यू... कुछ पटवारी जमीन को आगे-पीछे कर देते हैं
इस तरह के मामले इसलिए निर्मित होते है, कई जगह के नक्शे गायब हैं या फिर रिकॉर्ड को बदल दिया गया है। ऐसी स्थिति में चाहिए कि जो पुराने नक्शे हैं, उनका वापस से रेकार्ड दुरुस्त किया जाए। ऐसे मामले जब भी सामने आते हैं तो मौजूदा नायब तहसीलदार, तहसीलदार या फिर एसडीएम को भी वहां विशेष ध्यान देना चाहिए। नहीं तो कुछ पटवारी होते हैं जो अपने हिसाब से जमीन को आगे पीछे कर देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी ऐसा करते हैं। जो करते है वह भी बच नही पाते हैं। जांच में गड़बड़ी उजागर होने पर उन पर कार्रवाई भी होती है।
-एमबी ओझा, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी
Published on:
17 Jul 2023 01:57 pm

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