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बारिश में जो उड़द खराब हुई उसे रिजेक्ट कर रहा प्रशासन

समर्थन मूल्य खरीफ की जिन फसलों को शासन स्तर पर खरीदा जा रहा है उन तमाम केंद्रों पर किसान पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।

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Beaua. In the month of September, during the rains it was spoiled like this.

ब्यावरा. समर्थन मूल्य खरीफ की जिन फसलों को शासन स्तर पर खरीदा जा रहा है उन तमाम केंद्रों पर किसान पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। बारिश में जो उड़द खराब हो गई थी उसे प्रशासन नहीं ले रहा जितने किसान पहुंच रहे उनकी उपज भी रिजेक्ट कर रहे हैं। इसके अलावा मार्केट में भी उनके भाव नहीं मिल पा रहे हैं।

जिले के जिन किसानों की उड़द बारिश से खराब हो गई थी, शासन स्तर पर उनका सर्वे करवाना था, लेकिन न सर्वे हुआ न ही कोई समाधान हो पाया। ऐसे में किसान अभी भी असमंजस में हैं। शासन ने जो रेट (5600 रु. प्रति ङ्क्षक्वटल) तय किए उसमें क्वालिटी वाले उड़द ही खरीदे जा रहे हैं। जिन उड़द पर दाग लग गया या जो थोड़े भी खराब हैं उन्हें सीधे तौर पर रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे में जिलेभर के 14 खरीदी केंद्रों पर किसान ही नहीं पहुंच रहे। 19 जनवरी 2019 तक शासन स्तर पर होने वाली उक्त खरीदी में उड़द के साथ ही तिल, तिलहन, मूंगफली लेकर भी किसान नहीं पहुंच पा रहे हैं। अतिवृष्टि के दौरान जब कटे हुए उड़द खेत में थे तब जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने दावा किया था कि सर्वे करवाकर स्थिति का आंकलन लगाया जाएगा, लेकिन जब वही उड़द निकलकर मार्केट में पहुंचा तो उन्हें कोई भाव नहीं मिल पाया। यहांद तक सर्वे भी नहीं हुआ। ऐसे में जिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर में बोए उड़द का फिलहाल भविष्य तय नहीं हो पाया है।

फैक्ट-फाइल
-2.5 लाख पंजीयन (भावांतर) मक्का-सोयाबीन के।
-13, 619 पंजीयन (समर्थन मूल्य) उड़द, मूंग, मूंगफली के।
-150 किसान ही अभी तक उपज बेचने पहुंचे।
-19 जनवरी 2018 तक बेचने का समय।
-90 फीसदी उड़द हो रहे रिजेक्ट।
-14 सेंटर्स बनाए जिलेभर में।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार)

&हमारे लगभग सभी सेंटर्स खुले हैं, लेकिन कहीं भी किसान नहीं पहुंच रहे रहे। साढ़े 13 हजार में से महज 150 किसान अभी तक पहुंचे हैं। जो पहुंच भी रहे हैं उनमें से अधिकतर उड़द क्वालिटी डल होने से रिजेक्ट हो रहे हैं। हमें जैसे निर्देश हैं वैसे ही जिंस हम खरीद रहे हैं।
-राखी रघुवंशी, डीएमओ, राजगढ़

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